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इन टिप्स के साथ आपके छोटे बच्चे का खाना होगा पोषण से भरपूर!

Posted: दिसम्बर 20, 2020

मां बनने के शुरुआती समय में बच्चे के सही आहार का ध्यान रखना मुश्किल होता है पर इन टिप्स से आपके बच्चे का खाना हो सकता है पोषण से भरा हुआ।

डिस्केमर : इस लेख में सामान्य जानकारी दी गई है। बच्चे के सही आहार के लिए पहले संबंधित चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

मां बनने के साथ ही एक महिला की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। शुरुआती समय में बच्चे की देखभाल उसकी भूख का ध्यान रखना थोड़ा मुश्किल होता है पर धीरे-धीरे हम अपने बच्चे का व्यवहार व उसकी क्रियाकलाप समझने लग जाते हैं।

बच्चे का खाने में शुरू के चार से छः महिने तक स्तनपान कराना लाभकारी होता है। साथ में डिब्बे का दूध भी कुछ महिलाएं उपयोग करतीं हैं।

चार से छः महीने बाद शिशु को ठोस आहार की आवश्यकता होती है, ताकि बच्चे को शारीरिक व मानसिक विकास के लिए पर्याप्त पोषण प्राप्त हो। अतः पहली बार बच्चे को किस प्रकार का ठोस आहार दें तथा कितनी मात्रा में, कितनी बार दे एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।

 4 से 6 महीने के बच्चे का खाना 

विशेषज्ञों का मानना है कि ठोस आहार की शुरुआत ब्रेस्ट मिल्क के साथ मिलाकर करें ताकि बच्चे इसे आसानी से पचा सके। 4 से 6 महीने के शिशु को प्रथम बार ठोस आहार देते समय इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि उसे इन्हे पचाने में मुश्किल ना हो, वैसे तो 6 महीने के शिशु की पाचन व इम्यूनिटी सिस्टम धीरे-धीरे मजबूत होने लगता है और वह ठोस आहार पचाने में सक्षम होता जाता है।

इस समय बच्चे का खाना अगर आयरन युक्त हो तो, उचित माना जाता है। ठोस आहार की शुरुआत धीरे-धीरे तथा कम मात्रा में करनी चाहिए। फलों के साथ अगर हम ठोस आहार की शुरुआत करते हैं तो यह शिशु के पाचन के लिए लाभदायक सिद्ध होता है। इसमें फैट की मात्रा कम तथा फाइबर की मात्रा अधिक होती है।

बच्चे का खाना और 5 ज़रूरी फ़ल

  1. सेब का छिलका निकाल कर मसल कर शिशु को खिला सकते हैं।

2. केले में उच्चतम मात्रा में फोलेट होता है जो कि बच्चों के दिमाग के लिए बहुत लाभप्रद है, इसीलिए इसे सुपर फूड भी कहा जाता है।

3. बच्चों को शकरकंद भी दे सकते हैं, इसे उबाल कर तथा छिलका उतारकर मसल कर मां के दूध में मिलाकर शिशु को दिन में दो से तीन बार दे सकते हैं। इसमें मौजूद बीटा कैरोटिन आंखों की रोशनी तेज होने के साथ-साथ इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक है।

4. चुकंदर को फोलिक एसिड का स्रोत माना जाता है जो कि शिशु के लिए पोषण तत्व से युक्त है। इसे उबालकर शिशु को दिया जा सकता है।

5. नाशपाती एक ऐसा फल है जिसे शिशु आसानी से पचा सकता है। इसमें मौजूद कैल्शियम व फास्फोरस बच्चे की हड्डी को मजबूती प्रदान करने में सहायक है। इसका छिलका व बीज निकालकर प्यूरी बना शिशु को खिलाया जा सकता है।

7 से 8 महीने के बच्चे का खाना 

जब शिशु 7 से 8 माह का हो जाए तो उसे दही का सेवन करा सकते हैं। दही को कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसका सेवन पाचन क्रिया को भी ठीक रखता है।

ठोस आहार खिलाने से पूर्व इन 8 बातों का ध्यान रखें

ठोस आहार खिलाने से पूर्व कुछ बातों का ध्यान रखना माताओं के लिए अति आवश्यक है। जैसे

  1. ठोस आहार से पहले बच्चे को ब्रेस्ट मिल्क चम्मच कटोरी से धीरे-धीरे पिलाने की आदत डालनी चाहिए।
  2. शिशु को जबरजस्ती ठोस आहार ना खिलाए।
  3. कोई भी ठोस आहार जैसे दाल का पानी, पतली-पतली दलिया आदि खिलाने से पूर्व उसके तापमान को अवश्य चेक कर लें। अत्याधिक गरम आहार बच्चे को ना खिलाएं।
  4. आहार खिलाने के लिए प्रयोग में आने वाले बर्तनों की सफाई का भी विशेष ध्यान दें ताकि बच्चे को किसी भी प्रकार के इंफेक्शन का खतरा ना रहे।
  5. शुरुआत में एक दो बारी ही ठोस आहार देना शुरू करें ताकि शिशु आसानी से इसे पचा सके।
  6. ठोस पोषाहार की शुरुआत अच्छा होगा कि मसले हुए फल व सब्जियों से करें।
  7. शुरू में ठोस आहार का ओटमील और लोहा युक्त चावल एक सर्वोत्तम विकल्प है।
  8. 4 से 6 महीने के शिशु को फलों का रस पिलाना शुरू करना भी उचित है।

एक विशेष बात का ध्यान रखना अति आवश्यक है कि शिशु को जबरदस्ती आहार का सेवन ना कराएं। बच्चे की प्रतिक्रिया को समझते हुए उसे आहार दें मुंह बंद करना तथा सिर घुमा लेने का तात्पर्य है की बच्चे का पेट भर चुका है।

बच्चे को ठोस आहार शुरू करने से पहले संबंधित चिकित्सक की सलाह अवश्य ले लें। चिकित्सक के अनुसार अपने बच्चे का आहार निर्धारित करें। उचित पोषण शिशु के विकास के लिए अति आवश्यक है। स्वस्थ शिशु स्वस्थ समाज का प्रतिरूप है।

मूल चित्र : paupop from Getty Images Signature via Canva Pro

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