कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

अब मैं कमला भसीन जैसा बनना चाहती हूँ…

अब कोई नहीं पूछता, मैं क्या बनना चाहती हूं! लेकिन मेरा दिल मचल कर कह रहा है, मैं अब 'कमला भसीन' जैसी, ओह सॉरी, 'जैसा' बनना चाहता हूं!

अब कोई नहीं पूछता, मैं क्या बनना चाहती हूं! लेकिन मेरा दिल मचल कर कह रहा है, मैं अब ‘कमला भसीन’ जैसी, ओह सॉरी, ‘जैसा’ बनना चाहता हूं!

बचपन में माँ ने पूछा,
क्या बनना चाहती हो ?
कभी कहा इंजीनियर,
कभी कहा डाक्टर,
कभी इंस्पैक्टर
तो कभी पायलेट!

वक्त बीता,
हर सपना रीता,
बन गई टीचर,
बच्चों का दिल जीता!

अब उम्र हुई ,
तो बचपन लौटा,
पचास में याद आया,
हर सपना टूटा!

अब कोई नहीं पूछता,
मैं क्या बनना चाहती हूं!
लेकिन मेरा दिल
मचल कर कह रहा है,
मैं अब ‘कमला भसीन’ जैसी,
ओह सॉरी,
‘जैसा’
बनना चाहता हूं!

(क्योंकि किसी से कभी कभी व्यक्तिगत तौर पर बिना मिले भी उसके सीने से लग कर आँखें नम हो सकती हैं ! शायद इन्हें ही वाईब्स कहते हैं !)
मूल चित्र : Kamla Bhasin

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

Never miss real stories from India's women.

Register Now

टिप्पणी

About the Author

98 Posts | 278,440 Views
All Categories