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द लंचबॉक्स देख कर, खाना बनाते हुए मैं हमेशा सोचती, ‘ये इरफ़ान को पसंद तो आएगा ना!’

Posted: अप्रैल 29, 2020
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यह मेरा, एक गृहणी का, एक ईमानदार कबूलनामा है कि जब भी मैं रसोई में जाकर कुछ बनाती हूं, तो यह जरूर सोचती हूं कि ये द लंचबॉक्स  में इरफ़ान को पसंद तो आएगा न!

जीवन में पहली बार जब भिंडी की सब्ज़ी बनाई तब उसमें पानी डाल दिया कि कहीं कच्ची न रह जाए। कसम से बहुत डांट पड़ी थी उस दिन मुझे! बहुत सीखा, कोशिश की लेकिन भिंडी की सब्जी खाने में बेशक सही लगती, लेकिन दिखने में न जाने क्यों चिपचिपी सी रह जाती।

फिर 2013 में एक फिल्म आई द लंचबॉक्स, जिसमें एक हाऊस वाईफ इला द्वारा अपने पति को भेजा टिफिन गलत पते पर एक अधेड़ शख्स साजन फर्नांडीस को चला जाता है।

साजन बने इरफ़ान खान, द लंचबॉक्स में उस डिब्बे को जिस प्रकार खोलकर धीरे-धीरे स्वाद लेकर खाते हैं, उसका जवाब नहीं! इस फिल्म को जिसने भी गौर से देखा होगा, तो वह जानता होगा कि खाने की चीजों को बनाने और खाने की हर बारीकी को कितनी गहराई से फिल्माया गया है!

बस इसी फिल्म के एक सीन में इरफ़ान के लंचबॉक्स से जब भिंडीं निकलती हैं और वे जब भिंडी का एक टुकड़ा जिस प्रकार मुंह में रखते हैं, वह दृश्य दिल में कुछ ऐसा उतर गया कि पता नहीं उस दिन से अचानक से मैं भिंडी को कमाल का स्वादिष्ट बनाने लगी।

कढ़ी में मिर्च का बघार भी बिल्कुल वैसे ही लगाती हूं जैसा फिल्म में इरफ़ान का टिफिन खुलते ही नज़र आता था। रोटियां भी वैसी ही पतली-पतली और भरवां करेले भी बिल्कुल उसी तरीके के! मलाई कोफ्ता भी हूबहू वैसा ही मानो ज़रा बहुत दिखने में या स्वाद में इधर उधर हो गया तो इरफान के चेहरे के भाव बिगड़ सकते हैं।

द लंचबॉक्स फिल्म देखने के बाद से ही जब भी कुछ बनाती हूँ, तो हर चीज़ बहुत देख, ठहर, नाप, तोल कर बनाती हूँ कि साजन उर्फ इरफ़ान यदि इसे चखेंगे तो कैसा रिऐक्ट करेंगें! ऊंगलियों पर कितनी ग्रेवी लगेगी, चावल कितने खिले होने चाहिए जो उनके सामने परसी दाल में सही से मिल जाएं!

यह मेरा, एक गृहणी का, एक ईमानदार कबूलनामा है कि हां, जब भी मैं रसोई में जाकर कुछ बनाती हूं तो हर बार यह जरूर सोचती हूं कि ये ‘इरफ़ान को पसंद तो आएगा न!’ क्योंकि भोजन, भूख और एक इंसान का आपस में क्या रिश्ता होता है यह इरफान खान उर्फ साजन को देखकर ही समझ आया!

इरफ़ान तुम मेरे दिल में बसते हो, मेरे हाथों बनाए गए भोजन के स्वाद में बसते हो!
यहीं तो हो ! बस नमक ज्यादा पसंद नहीं तुम्हें, यह हमेशा ध्यान रखूंगी!

नोट – जिन्होंने लंच बाक्स नहीं देखी, वे मेरी पोस्ट का मर्म भी नहीं समझ पाएंगें! लिखते हुए भी आँसू नहीं थम रहे!

आज लंचबॉक्स भी नहीं खोला मैंने
आज अश्क़ों ने पेट भर दिया मेरा!

मूल चित्र : YouTube 

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