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सेक्स और आपका रिश्ता : आप और आपके पार्टनर क्या करें और क्या न करें, कुछ ज़रूरी टिप्स

सेक्स हम सब की ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा है लेकिन इसके बारे में अभी भी बहुत सी बातें हैं जिनकी जानकारी ज़रूरी है - क्या करें, क्या न करें, यहां है कुछ टिप्स 

सेक्स हम सब की ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा है लेकिन इसके बारे में अभी भी बहुत सी बातें हैं जिनकी जानकारी ज़रूरी है – क्या करें, क्या न करें, यहां है कुछ टिप्स

अक्सर देखा जाता है के सेक्स के विषय में बात करना लोगों के लिए शर्मनाक और डराने वाला हो सकता है।लेकिन यह मज़ेदार और सुखद भी हो सकता है, और आपके सेक्स जीवन को और अधिक आकर्षक बनाने में मदद कर सकता है। हम खुद ही सुनिश्चित नहीं कर पाते के कब क्या बोलना है? या क्या कहना है? कोई समस्या है तो उसका क्या समाधान हो सकता है? या अपनी बातें किस व्यक्ति से साझा कर सकते हैं, ऐसे ही अन्य चिंता के विषय हमारे दिमाग में आते रहते हैं।मगर आज हम कुछ ऐसे तथ्य लाएं हैं जो आपकी सेक्स लाइफ में सहायक सिद्ध होंगे। आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं।

सेक्स के समय कब, क्या कहना चाहिए

डिस्क्लेमर : हालाँकि, यह लेख आपको बताता है के आप को क्या करना चाहिए, और क्या नहीं, जिस से आपके पार्टनर और आप दोनों सहज हों, लेकिन इस लेख को पढ़ने के बावजूद एक एक्सपर्ट की राय लेना ना भूलें।

सेक्स के वक़्त क्या करें

यदि आपको ऐसा लग रहा है कि आपका संबंध सेक्स की तरफ अग्रसर हो रहा है, और आपको यह भी महसूस हो रहा है के आपका साथी भी इसके लिए तैयार है, तो आप अपनी बातें खुलकर साझा कर सकते हैं। आप अपने साथी से सेक्स से जुड़ी कुछ बातें पहले से ही साझा कर के रखें, नहीं तो आप बिस्तर पर होंगे और आपको पता नहीं होगा कि क्या एक्सपेक्ट करना है और क्या करना है।

आप अपनी सोच के दायरे को तोड़ कर अपने विचारों को दिशा दे सकते हैं, उदाहरण के तौर पर, आप ये बता सकते हैं कि हम दोनों बिस्तर पर आलिंगन की दशा में सुखद अनुभूति प्राप्त कर सकते हैं, और साथ के साथ तनाव को कम करने वाला रसायन और हार्मोन्स जैसे इंडोर्सफिन्स(endorphins) आदि से हम अपना तनाव भी कम कर सकते हैं।

ऐसी कई बातों से पहल की जा सकती है और आप अपनी चॉइसेस को प्रकट कर सकते हैं कि आप क्या चाहते हैं। इन बातों को बताते समय आप अपने साथी की प्रतिक्रिया पर भी नज़र रखें, कि वो आपकी बातों में इच्छुक है या नहीं, क्या वह इन बातों से सहज है या नहीं? अगर आपको उनकी तरफ से नकरात्मक प्रतिक्रिया आती है तो आप समझ सकते हैं कि आपका साथी अभी मौजूदा समय में इन सब बातों से या यौन संबंध बनाने के लिए सहज नहीं है।

इस विषय को खुला रखने की कोशिश करें और इसके बाद अगर आपका साथी आपकी बातों से सहमत हो तो आगे बढ़ें और बात करें कि हम सुरक्षित सेक्स सम्बन्ध कैसे बना सकते हैं, उसको असुरक्षित यौन सम्बंध के बारे में जागरूक करें। गर्भावस्था से बचने के लिए और यौन संचारित रोगों के जोखिम और उनसे बचने के उपाय के बारे में बातें साझा करें। कॉन्डोम और अन्य गर्भनिरोधक तरीकों के विकल्पों को साझा करें। इससे आपको तनाव मुक्त यौन जीवन जीने में सहायता मिलेगी।

सेक्स में ‘ना’ कहने से पीछे न हटें

यदि आपको लगता है कि आप सेक्स करने के लिए मानसिक या शारीरिक तौर पर तैयार नहीं हैं तो आपको अपने साथी को यह स्पष्ट कर देना चाहिए के आप इस समय किस स्तिथि में हैं, और आप अभी शारीरिक संबंध बनाने के मूड में नहीं हैं।

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आप इसके बारे में निसंकोच और ईमानदारी से बात कर सकते हैं। कारण जो भी हो, अपने आप को व्यक्त करने में संकोच न करें। आप हमेशा अपने विचारों को शब्दों में ढालने का एक सटीक तरीका पा सकते हैं। यदि वे वास्तव में आपसे प्यार करते हैं, तो वे तब तक आपका इंतजार करने के लिए तैयार रहेंगे जब तक आप खुद को सेक्स के लिए तैयार नहीं मानते।

सेक्स के समय क्या न करें

यदि आप अपने यौनिक जीवन से संतुष्ट नहीं हैं या आप अपने साथी के साथ असहज महसूस करते हैं, तो ध्यान रखिए, ऐसी बातों को साझा करने में पीछे ना हटें, लेकिन इन बातों को सही समय पर साझा करें। उदाहरण के तौर पर किसी वित्तीय परेशानी या किसी बिल के झगड़े के समय, या किसी और परेशानी के समय आपको ऐसी बातें साझा नहीं करनी चाहियें। ऐसे क्षण जीवन में नकरात्मकता लाने के लिए प्राथमिक स्त्रोत का कार्य करते हैं। ऐसा समय चुनें जो तटस्थ हो – जब आप दोनों के बीच कोई तनाव न हो और न तनावपूर्ण स्तिथि और फिर बातचीत को धीरे से शुरू करें। इस तरह आप अपने पुराने मनमुटाव की तरफ अग्रसर नहीं होंगे।

अमानवीय कुंठित व्यवहार से दूर रहें

ऐसे समय जब आपका सेक्स जीवन उतना संतोषजनक नहीं होता जितना आप चाहते हैं, ऐसी स्तिथि में अपने भाव और संवेदनाओं को नियंत्रण में रखें। आप अपने विचार में स्वतंत्र रहें, और साथी को भी स्वतंत्र रहने का मौका दें। यह ज़रूरी नहीं के आप असभ्य और कुंठित हो जाएं। सेक्स एक बहुत ही भावनात्मक विषय है और असंतुष्ट और ख़राब यौन प्रदर्शन के लिए एक दूसरे को दोष देना निरर्थक साबित होता है, और सार्थक भी नहीं होता। अपने विचार या संदेश संप्रेषित करते समय अपने साथी की भावनाओं का ख्याल रखना अनिवार्य है और उनकी भावनाओं को आहत न करें। उनकी भावनाओं को खतरे में डाले बिना ही आप अपनी भावनाओं का संचार करें। हो सके तो एक सेक्स-एक्सपर्ट से मिलें।

‘ना’ को ‘हां’ के रूप में लेना व्यर्थ है

ऐसा कई बार हो सकता है जब आप सोचते हैं कि जब आपका साथी संकुचित मन से ‘नहीं’ कहता है, तो उनका मतलब ‘हाँ’ होता है। यह एक गलत धारणा है। जब कोई कहता है कि ‘नहीं’, तो उनकी पसंद का सम्मान करना और उन्हें वह स्थान और समय देना चाहिए जिसकी उन्हें आवश्यकता है। यदि आप अपनी बात का पछतावा बाद में करते हैं तो ये गलत है और इसका कोई फायदा नहीं। यदि, आपका साथी उस समय ‘शायद’ बोले, तब भी आपको उसकी भावनाओं को बिना ठेस पहुंचाए उनकी सीमाएं पूछ सकते हैं।

शारीरिक संबंध दो शरीरों का ही नहीं दो भावनाओं का और आत्मा का भी मेल है, जिसमे दोनों पात्र के सहमत होने की आवश्यकता है, चाहे वह शारीरिक हो या भावनात्मक।

मूल चित्र : Canva

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