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मुझे कमज़ोर समझने की भूल न करना …

Posted: April 21, 2020

धरती को माता कहते हो और मुझको गाली देते हो? ये तुम्हारा ही अपमान है, क्यूंकि मैं केवल औरत नहीं, मैं एक जननी हूँ, और ये एक ऊँचा सम्मान है।

औरत हूँ! अबला नहीं
सृष्टि की जननी हूँ मैं, प्राकृतिक का उपहार हूँ मैं।

अविरल हूँ पर्वत की भाँति
लहराती वायु हूँ मैं।

फूल कहो या कहो सितारे
आसमान का राग हूँ।

रूढ़िवादी दुनिया की ख़ातिर
जोश भरी चट्टान हूँ।

रातों के लिए एक उजाला हूँ
और दिन के लिए आवाज़ हूँ।

धरती को माता कहते हो
और मुझको गाली देते हो?
ये तुम्हारा ही अपमान है।

क्यूंकि मैं केवल औरत नहीं
मैं एक जननी भी,
और ये कमज़ोरी का निशान नहीं!

मूल चित्र : Canva 

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टिप्पणी

1 Comment


  1. Very melodious and relevant poem with respect for women. Beauty and respect had been expressed with the bottom of heart.We really need the youths who can think and adopt all these values in their cunduct.lovely expressions has been sense throughout the poem.

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