कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

अब तू ही बतला दे ना माँ, क्या इतनी बुरी हूँ मैं माँ?

जिस देश में लड़कियों और नारी को पूजा जाता है फिर माँ क्यों उस देश में मेरे पैदा होने पर सब उदास हो जाते हैं? क्यों मेरे पैदा होने पर सब जश्न नहीं मानते?

जिस देश में लड़कियों और नारी को पूजा जाता है फिर माँ क्यों उस देश में मेरे पैदा होने पर सब उदास हो जाते हैं? क्यों मेरे पैदा होने पर सब जश्न नहीं मानते?

आज फिर घर के आँगन में दस्तक हुई 
किसे के नन्हें कदमों की आहट से हुई 
दरवाज़ा खोल देखा 
फिर चहकी थी एक नन्ही सी चिड़िया 
आई मेरे आँगन एक प्यारी सी गुड़िया 
लगता है जैसे हो कोई जादू की पुड़िया 

अपनी छोटी छोटी आँखों से 
करती है सौ सवाल यह नन्ही सी जान 
लोगों के दिलों में थोड़ी सी जगह तलाशती  
सोच में पड़ी 
क्यों गुम है इनकी मुस्कान 

क्यों छाई लबों पर उदासी है 
क्यों आँखें हैं इनकी नम 
मेरी चहक सुन  
क्यों छाया है यह ग़म का मौसम 
क्यों मेरे आने की आहट से 
सबका है चेहरा मुरझाया 
क्या मेरी प्यारी किलकारियों से ना भर आता दिल इनका  

क्या मुझे गोद में ले 
खुशी से झूम उठने का ना करता मन इनका 
क्या मैं दूर देश से आई हूँ  
क्या मैं इतनी पराई हूँ  
देखे है मुझे हर कोई बेगानी नज़रों से 
जैसे ना हो कोई रिश्ता नाता इनसे 

अब तू ही बतला दे ना माँ 
क्या इतनी बुरी हूँ मैं माँ 
रौंद ना मुझे अपने पैरों तले  
अभी तो आई हूँ इस दुनिया में मैं 

साँसों को सीने में भर  
जीवन का एहसास तो कर लेने दे 
दो घड़ी तो जी लेने दे 
तेरी बगिया की एक मासूम सी कली हूँ मैं 

कल खिलकर खुशबू से भर दूँगी यह गुलशन 
तेरे ही घोंसले की चिड़िया हूँ मैं 
एक एक तिनका चुन 
तेरे घरोंदे को एक नया रूप दूँगी मैं  

Never miss real stories from India's women.

Register Now

एक बार सुबह से मिला दे 
सूरज की किरणों सा रोशन कर दूँगी तेरा यह जहाँ  
एक बार हाथ पकड़ चलना सिखा दे 
कल उड़कर हर मक़ाम हासिल कर लूंगी मैं 

समझ अपने सर का बोझ  
दौलत के तराज़ू में ना तोल मुझे 
प्यार से बस एक हाथ फेर सर पर मेरे 
बन हीरा तेरा किस्मत चमका दूंगी मैं 

नन्ही सी गुड़िया हूँ मैं 
तेरे आँगन में फिर खिलखिलाई हूँ मैं

मूल चित्र : Canva 

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

टिप्पणी

About the Author

Rashmi Jain

Founder of 'Soch aur Saaj' | An awarded Poet | A featured Podcaster | Author of 'Be Wild Again' and 'Alfaaz - Chand shabdon ki gahrai' Rashmi Jain is an explorer by heart who has started on a voyage read more...

32 Posts | 51,845 Views
All Categories