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Rashmi Jain

Rashmi Jain is an explorer by heart who has started on a voyage to self-discover herself by means of her writings. Her writings mainly revolve around the freedom, equality and empowerment of women. It also involves exploring life by means of travelling and the life lessons learnt in the entire process. She keeps experimenting, creating and learning new things. She is a nature lover and adventure enthusiast.

Voice of Rashmi Jain

ज़िंदा है तू !

जब तक आपकी सांसें चल रहीं हैं तब तक आपको खुद को ज़िंदा ही समझना होगा इससे आपका मनोबल बढ़ेगा और ज़िन्दगी आसान लगने लगेगी।  ये दुनिया सुख दुख का मेला है,  इस मेले में तू क्यों अकेला है,  ग़म को ना समझ बोझ,  यह तो खुशी महसूस कराने का बस एक तरीका है।    […]

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बादलों को चीर, ये जहाँ रौशन करने निकली हूँ मैं…हाँ रश्मि हूँ मैं!

तो चल रोशनी से मुंह न मोड़, सूर्यमुखी बन रोशनी की ओर मुंह मोड़, अपनी किरणों से रोशन कर दूंगी तेरा ये जहाँ, क्योंकि सूरज की रोशनी हूँ मैं!

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ओ मेरे हमसफ़र यूँ ही काट जाएगा ये सफ़र…

ज़िन्दगी गुज़ारने के लिए एक अच्छे साथी का होना बहुत ज़रूरी है, समय है हमसफ़र के साथ समय बिताने का और जीवन को प्यार से भर देने का। 

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उड़ान

तन की उड़ान तो फिर भीं रुक जाती है, मगर मन की उड़ान को रोकने वाला कोई नहीं होता, न कोई रोक सकता, खुद को उड़ने दीजिए और रूह को परवाज़ करने दें, ज़िंदगी खूबसूरत हो जाएगी। 

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साँसों का खेल : ज़िंदगी की एक ज़रूरी कड़ी, जो जीवन को प्रवाहित करती है

ज़िन्दगी साँसों की मझदार में चलती हुई  एक नाव के समान है, जो कभी भी डूब सकती है, जीवन में सारा खेल साँसों पर ही निर्भर करता है। 

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कुदरत की देन : एक तोहफा ऐसा जिसका कोई मोल नहीं

प्रकृति को हम देख सकते हैं महसूस कर सकते हैं, पर उसका महत्व कम ही जानते हैं, प्रकृति ईश्वर द्वारा दी गयी सबसे प्रसंशनीय कृति है। 

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जंगल की एक सैर : प्राकृतिक के साथ साथ नन्हे दोस्तों की दास्ताँ

जंगल का नाम सुनते ही मन में एक प्राकृतिक की महक की लहर दौड़ जाती है। जानवर ,पेड़ ,हरियाली और कभी कभी झरनों की कलकल। मन करता है जानवरों से बात करे और खेलें।

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वक़्त का खेल कभी हँसाएगा कभी रुलाएगा, मगर हार नहीं माननी

समय रेत  की तरह फिसल रहा है। हमको हर पल को जी भर के जीना चाहिए। चाहे वह घनेरी धूप  हो या सावन की बरसात। मन को हमेशा प्रफुल्लित रखो,जो अति आवश्यक है।

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लहरों की पुकार:कुछ कहती हुई,और चट्टानों से लड़ती हुई। बेबाक सी लहरें।

सच्ची लहरें कितनी कठोर होती हैं,और अचल।  पहाड़ों और किनारों से टकराती हैं और अपना आत्मविश्वाश बिलकुल भी डगमगाने नहीं देती। इनसे हमको सीख लेनीलेनी चाहिए।

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पापा का दुलार : जीवन का एक बेशक़ीमती पहलू और एहसास

जीवन की बहुत सी यादों में से एक सबसे खूबसूरत एहसास होता है...पिता के साथ समय बिताना, यह वक़्त बेटी और पिता दोनों के लिए प्रभावशाली होता है।

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एक ख़्वाहिश ऐसी भी : प्राकृतिक से प्रेम भी और दोस्ती भी …..

कभी कभी प्राकृतिक के ऐसे ऐसे रूप देखने को मिलते हैं, जिससे मन में लालसा पैदा हो जाती है, काश ! हम भी ऐसे होते, आज़ाद परवाज़ और आज़ाद जीवन,जैसे नदियाँ और पेड़।

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हिमालय : एक जगता हुआ पहरेदार और एक प्राकृतिक दोस्त

हिमालय जिसको हम पर्वतों का राजा मानते हैं, पाँच देशों की रखवाली के लिए खड़ा यह न कभी थकता है और ना हार मानता है। 

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अनमोल ज़िंदगी की अनमोल सी खुशियां, बस ज़रूरत है थोड़ा ढूंढ़ने की ….

ज़िंदगीं में खुशिओं का कोई मोल नहीं, और लोग इसे ढूंढ़ते हैं, मगर यह तो आपके पास खुद आपके अंदर है, बस ज़रा ग़ौर से तलाश कीजिए, सब मिलेगा ... 

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भूख : एक ऐसी तपिश जो आत्मा को तोड़ देती है

भूख एक ऐसा एहसास है, जिससे कोई अछूता नहीं ! न ही अमीर और ना ही गरीब। फिर भी यह दुखद है सिर्फ गरीबों क लिए, असहाय क लिए।

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अपनी ही कहानी की कलाकार हूँ मैं 

कलाकार हूँ मैं, कल ज़िंदगी को जीने का नया आधार दूंगी, यह वादा है मेरा, अपने कलम की रफ़्तार से कल को एक नया उपहार दूंगी।

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कुछ लोगों की फ़ितरत नहीं बदलती

मैंने सुना है, वक्त सभी का आता है, इंसान अपने कर्मों से ही पहचाना जाता है, कुछ लोगों की नीयत नहीं बदलती रुत बदल जाए पर फ़ितरत नहीं बदलती। 

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समझ वक़्त का इशारा और चमका अपने वजूद का सितारा

उठा हिम्मत की मशाल तू, बन खुद ही अपनी पतवार तू, दौड़ जा मंजिल के उस पार तू, क्योंकि वक़्त को भी है इंतजार, दे अपने वजूद का कोई तो प्रमाण

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है तुझे भी इजाज़त, कर ले खुद से थोड़ी तू भी मोहब्बत! 

हैं हज़ार राह में बिखरे काँटें, पर रोक सकेगा तुझे कौन, तू बस अपनी धुन में मग्न, काँटों भरी रहा को गुलशन समझ, आगे कदम बढ़ाए जा, जीने का जश्न मनाए जा!

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अब तू ही बतला दे ना माँ, क्या इतनी बुरी हूँ मैं माँ?

जिस देश में लड़कियों और नारी को पूजा जाता है फिर माँ क्यों उस देश में मेरे पैदा होने पर सब उदास हो जाते हैं? क्यों मेरे पैदा होने पर सब जश्न नहीं मानते?

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क्यों एक तरफा तराज़ू नहीं बतलाता सही भाव है!

जहां इंसाफ का तराज़ू हमेशा एक तरफ झुका रहता है, उस समाज में कोई तरक्की, कोई समानता, कोई बदलाव आना नामुमकिन हैं, ऐसा समाज इंसानियत का दुश्मन है! 

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माँ, अंतिम क्षण तक करती रहूंगी अपनी शक्ति का प्रदर्शन!

जा नहीं देना मुझे अपनी सफाई का कोई सबूत, जा अब और नहीं आना मुझे इस निष्ठुर कठोर पत्थर दिल जग में, जहाँ मेरी किलकारी सुन एक और शिकारी जन्म लेता है!

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माना है तुझमें क्षमा की शक्ति फिर भी जगा ले अंदर की शक्ति!

अपनी ताकत का भी करना पड़ता है प्रदर्शन, जब दुश्मन अपने इरादों से बाज ना आए, जब गलतियां बढ़ अपराध बन जाए, शक्ति से कर पथ प्रदर्शन विनय भाव का!

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काश कोई लौटा दे मेरा वो मासूम सा, नादान सा बचपन!

हर दिन पलकों पर नए सपने संजोता हुआ सा वो बचपन अपनी ही रवानी में मस्त वो बचपन, छोटी छोटी खुशियों का जश़न मनाता हुआ वो बचपन!

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बस इसी आस में कि कुछ और ना सही, मुट्ठी भर आसमान तो हाथ आए

अंधेरे से पहले सन्नाटा कैसा, ढलने से पहले ही ढलना कैसा, अंबर की ये बातें सुन, हैरान हुआ मन, जब सर उठाकर देखा, नभ के टिमटिमाते तारे बोले। 

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तू आशा की लौ दिल में जलाए जा

तू बस छोटी सी आशा की किरण लिए, तारों की मद्धम रोशनी में ही सही, आगे क़दम बढ़ाए जा, भोर तो होगी ही, तू बस आशाओं की लौ दिल में जलाए जा

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धन्य हो तेरी यह काया! ऐ वीर! तुझे प्रणाम!

ऐ वीर तेरी ख़ाकी वर्दी पर नाज़ है हमें, झुक कर तुझे सलाम करता हूँ, एक बार नहीं बारंबार प्रणाम करता हूँ

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देश के वीर जवान

गर चंद छींटे लहू के पड़े दामन पर तेरे, नम ना करना इन पलकों को तू, स्पर्श कर तेरे चरणों को, अमर हो जाने देना मेरे लहू को तू।

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दोस्ती – एक अनोखा रिश्ता

हमने भी दोस्तों को सदियों से इस दिल में महफूज़ रखा है, दूरियों को मीलों से नहीं गहराईयों से नाप रखा है। 

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यादों का पिटारा

यादें मरा नहीं करतीं, ये हमेशा दिलों में ज़िंदा रहती हैं, ये हमेशा दिलों में ज़िंदा रहती हैं...

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आज फिर-तुझे याद है ना माँ

अब थक सी गई हूँ, हँसना भूल सी गई हूँ, वक़्त के दिए ज़ख़्मों पर, आज फिर मरहम तू लगा दे ना माँ।  

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नारी हूँ नारी मैं-किस्मत की मारी नहीं

बीता वो पतझड़, मैं बसंत बन खिल आई हूँ, रूबरू रोशनी नई, आज ख़ुद चाँद बन, बादलों को चीर निकल आई हूँ।

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ये ज़िंदगी की पुकार है – खुद पर एतबार रख यारा

आज ज़िंदगी ने तुझ को है पुकारा, "कर ले इस दिल की सारी चाहतें पूरी, चल निकालें मिलकर आशाओं की अपनी ये टोली।"

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