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जीवन में बदलाव आते हैं पर यह कैसी मानसिकता है

Posted: May 20, 2019

शादी को एक साल बीत गया। सोमेश दो-चार बार आया भी, लेकिन उसका आना ना आना, एक समान ही होता था। दिया को इस इंतज़ार से अब घुटन होने लगी थी।

शादी के बाद हर स्त्री के जीवन में बदलाव आते हैं। नया परिवार, नए लोग, अलग रहन-सहन, खान- पान। हर महिला के लिए शुरुवाती कुछ समय बेहद चुनौती पूर्ण होता है। लेकिन शुरुआत के दिनों में बेहद जटिल लगने वाली कुछ समस्याएं भी, कुछ समय बाद खुद ही सुलझने लगती हैं। कुछ बहुएँ और कुछ ससुराल वाले एक दूसरे को समझने लगते हैं और घर का माहौल सुधरने लगता है।

शादी के बाद पति-पत्नी के बीच आपसी समझ और प्रेम का होना सबसे ज़रूरी होता है। एक दूसरे को पर्याप्त समय देना खुशहाल दाम्पत्य का आधार है। लेकिन कुछ जोड़ों में यह प्रेम पनप ही नहीं पाता।

आइए, ऐसी ही एक कहानी से रूबरू कराती हूँ।

पापा ने रिश्ता देखा और लड़के की तस्वीर दिखा कर दिया से सहमति भी ले ली। दो महीने के भीतर ही धूमधाम से शादी हुई और दिया अपने ससुराल आ गई। पति सोमेश कलकत्ता में नौकरी करता था, सो तीन दिन पत्नी संग बिता कर वो वापिस लौट गया। दोनों के बीच मात्र औपचारिक सी बातें हुई थीं।

दिया पलकें बिछा कर सोमेश के लौटने का इंतजार करने लगी। पति के बिना ससुराल उसे खाली-खाली सा लगता। दो महीने बाद सोमेश फिर तीन दिन के लिए आया। दिया ने कितने ही सपने सजाए। सोचा था पति से ढेर सारी बातें करेगी उनकी पसंद-नापसंद को समझेगी, लेकिन सोमेश अधिकांश समय माँ के कमरे में ही बिताता।

इसी तरह वक़्त बीतता गया। शादी को एक साल बीत गया। सोमेश दो-चार बार आया भी, लेकिन उसका आना ना आना, एक समान ही होता था। दिया को इस इंतज़ार से अब घुटन होने लगी थी। एक दिन उसने अपने दिल की बात सोमेश से कही। सोमेश ने आव देखा न ताव, दिया पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगा, “एक साल में ही तुम मेरी माँ की सेवा में थक गईं। अरे तुम्हें लेकर किस लिए आया था मैं! माँ को अकेला छोड़कर तुम्हें अपने साथ ले जाऊँ? क्या इसी दिन के लिए तुम्हें बहु बनाकर लाई थी वो।” सोमेश गरज रहा था।

सुबकते हुए दिया ने कहा, “सोमेश, माँ अकेली कहाँ है। तुम्हारे छोटी बहन और भाई भी तो हैं यहाँ। अकेली तो मैं हूँ जिसने आज तक अपने पति के साथ दो प्यार के पल तक नहीं बिताए हैं।”

“क्या होते हैं प्यार के पल मैं नहीं समझता। तुम माँ के साथ ही रहोगी, कान खोल कर सुन लो। और, ये बेशर्मी भरी बात मैं फिर से सुनना नहीं चाहता।”

“सोमेश क्या बेशर्मी की मैंने! शादी आपसे की थी आपके परिवार से नहीं। आपका परिवार भी मुझे अपना तभी लगेगा जब आप मुझे अपनाओगे। जब अपने पति के लिए ही मैं एक अजनबी हूँ तो ससुराल वालों से क्या रिश्ता निभाऊँ मैं। बहुत हुआ अब, मैं आपके साथ रहना चाहती हूँ।”

सोमेश ने गुस्से में गुर्राते हुए फ़ोन पटक दिया। अगले कुछ दिनों तक दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई। एक दिन दिया ने सोचा क्यूँ न माँ जी से अपने मन की बात कहूँ, वो भी तो एक औरत हैं शायद मेरे दिल का हाल समझें।

माँ जी तो दिया कि बात सुनकर तिलमिला उठीं, “ना जाने कैसे संस्कार मिले हैं तुझे। बेशरम कहीं की। पति के संग रहने को मरी जा रही है। अरे छोटे ननद और देवर की ही शरम कर लेती। क्या असर पड़ेगा उन पर। हमारे यहाँ घर की बहुएँ यूँ पति के साथ ढूंगे से लग कर नहीं घूमतीं। अपनी मर्यादा में रहो।”

दिया को समझ नहीं आ रहा था उसने क्या गलत कह दिया जो सास और पति यूँ उसे बेइज्जत करने में लगे हैं। अगले कुछ दिन बेहद तनावपूर्ण बीते। हर रिश्तेदार को यह खबर मिल चुकी थी कि दिया सास-ससुर से अलग होना चाहती है।

दिया और सोमेश के बीच की खाई भी बढ़ती जा रही थी। सोमेश अब आता भी तो देर रात तक माँ और भाई-बहनों के साथ बैठा गप्पें लड़ाता। दो-चार दिन बिता वापस लौट जाता। दो साल बीत चुके थे लेकिन दिया और सोमेश के वैवाहिक जीवन में कोई बदलाव नहीं आया था। दिया धीरे-धीरे तनाव में जा रही थी।

मन की बीमारी अब धीरे-धीरे उसके तन को भी खोखला करने लगी थी। खोखले होते शरीर में अचानक एक नन्हे-मुन्ने के आने की आहट सुनाई पड़ी। इतनी बड़ी खुशखबरी सुनकर भी सोमेश और उसकी मां के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया। रोज-रोज के झगड़े और मानसिक कलह ने आखिर उस मासूम की जान ले ली।

अपने अजन्मे बच्चे को खोने के बाद दिया एक घायल शेरनी बन चुकी थी। आख़िरकार, तीन साल तक एक मृत प्राय रिश्ते में जान फूंकने की अपनी असफल कोशिशों के बाद, दिया ने सोमेश का घर सदा के लिए छोड़ दिया। सिर्फ़ बहू को अपने साथ रखने की सनक ने एक खूबसूरत रिश्ते का इतना दुखद अंत कर दिया।

मेरा मानना है ऐसे बेटों को शादी ही नहीं करनी चाहिए जो ब्याह के लाने के बाद पत्नी को अपनी माँ की सेविका समझते हैं। क्या वास्तव में दिया ने कोई अनुचित माँग की थी?

Vaginal Health & Reproductive Health - योनि का स्वास्थ्य एवं प्रजनन स्वास्थ्य (in Hindi)

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