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न जाने किस वक्त के इंतजार में जिन्दगी रुकी हुई है…

Posted: October 31, 2018

“न जाने किस वक्त के इंतजार में जिन्दगी रुकी हुई है बस, जिंदगी खत्म हो तो शायद जिंदगी आगे बढ़े”- थमी सी जिंदगी को जीने की इक उम्मीद।

नींद दिलो-दिमाग में है पर आँखों में नहीं है,
अक्सर चीज़ जहां के लिए होती है वहां वो होती नहीं है।

पूरा अहसास प्यार का मिला था उधर से भी हमें,
पर पता न था कि वक़्त की मार वो भी खा रहा है।

मौत से अब डर लगता है कि वो भी न आई तो,
किसी के न हुए हम और वो भी न अपनाए तो।

रूह की हिम्मत अब उतनी मजबूत रही नहीं,
जब देखती हूँ कि लोग सिर्फ शक्लों से प्यार करते हैं।

समझ लेती हूँ सब के दिलों मे उठे जज़्बातों को,
कोई मेरे जैसा बना होता तो क्या बात होती।

एक ही सपना देखा उम्र भर हमनें,
सपना वही रहा, बस तलब बढ़ती रही।

कहते हैं कोशिश से खुदा भी मिल जाता है,
पर प्यार को कोशिश की नहीं किस्मत की जरूरत होती है।

वक्त ही वक्त है हमेशा से मेरी जिंदगी में,
बस उसका मुझसे मिलने का सही वक्त नहीं आता है।

खामोशी बन चुकी है मेरी रूह की पहचान,
कभी इसके ख्वाबों में बड़ी जिंदगी हुआ करती थी।

याद करती हूँ तो लगता है जैसे जी रही हूँ उस वक्त को,
सुना है सोच, सोच से टकराती जरूर है।

हिम्मत ही तो थी, सराहत मिल जाती, जो कर लेते,
सुना है दूसरा मौका बड़ी किस्मत वालों को मिलता है।

वक्त कटता नहीं, वक्त को काटते हम हैं,
सुना है वक्त गुजारना भी बहुत बड़ा हुनर माना जाता है।

तकदीर में ही था जिन्दगी का बस यूँ ही गुजर जाना,
और उम्र भर दोष हम अपनों को ही देते रहे।

जिन्दगी तो मानो जैसे बस बच सी गयी है,
दफन सपनों पर बैठ कर सपने ही देख रहे हैं हम।

उम्मीद बिलकुल नहीं थी अपनी इस हालत की हमें,
और दूसरों को जीने की नसीहत दिया करते हैं।

कुछ न करते हुए जिन्दगी इस कदर बीत गयी हमारी,
अब बची-खुची जिन्दगी में बहुत कुछ करना चाहते हैं।

नींद अब वक्त की बरबादी महसूस होती है हमें,
पर नींद ही है जो हमारे दर्द संभाले जाती है।

खुद से न आँखें चुराए हम ये कोशिश है हमारी,
मौत के बाद तभी खुदा से नजर मिला पाएंगे हम।

न जाने किस वक्त के इंतजार में जिन्दगी रुकी हुई है बस,
जिन्दगी खत्म हो तो शायद जिन्दगी आगे बढ़े।

दरारें तो बहुत हैं अपने दिल में मगर उन्हीं दरारों का शुक्रिया,
क्यूंकि यही वो दरारें हैं जो हमारे दिल को मजबूत किये हुए हैं।

मूल चित्र: Unsplash

Ruchi is a new person who has dared to break all walls of monotony in

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