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दुःख

भोर निकलने से पहले हीअचानक छोड़ जाए जीवनसाथी। कैसे तुम उसके संस्कारो पर सवाल उठाते होसंस्कारो से बड़ा है उसका दुःख क्यों ये भूल जाते हो।

भोर निकलने से पहले हीअचानक छोड़ जाए जीवनसाथी। कैसे तुम उसके संस्कारो पर सवाल उठाते होसंस्कारो से बड़ा है उसका दुःख क्यों ये भूल जाते हो।

कुछ दिनों पहले मंदिरा बेदी के पति की अकस्मात मृत्यु हो जाने के कारण मंदिरा बेदी के अपने दिवंगत की पति अंतिम यात्रा में जीन्स पहनने को लेकर शामिल होने तक उनके पति को मुखाग्नि देने तक समाज के लोगों ने उन पर बहुत सवाल उठाए।

पितृसत्तात्मक सोच से ग्रसित समाज ने उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया। यहां तक कि कुछ लोगों ने उनके लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग भी किया।

मैंने कविता के माध्यम से उन लोगों से कुछ सवाल पूछे हैं जो मंदिरा बेदी के संस्कारों पर सवाल उठा रहे हैं।

दुःख

भोर निकलने से पहले ही
अचानक छोड़ जाए जीवनसाथी
जलते दीपक से जैसे बुझ जाए
अचानक बाती।
कैसे तुम उसके संस्कारो पर सवाल उठाते हो
संस्कारो से बड़ा है उसका दुःख क्यों ये भूल जाते हो।
क्यों पहनी उसने दो-दो घड़ी?
क्यों पति की देह के पास वो जींस पहनकर हुई खड़ी?
क्यों उसने बेटे के होते
पति को दी मुखग्नि?
क्यों समाज के बनाये नियमों को
तोड़कर उसने दिखाई नारीशक्ति।
अरे! उसे तो सिर पर पल्लू रखकर
पति की देह के पास अपना सिंदूर मिटाना था।
पहनकर सफेद कपड़े उसे संस्कारो को निभाना था।
क्यों वो अपने पुरूष मित्रों के गले लग रही थी?
बेशर्मी की सारी हदें क्यों पार कर रही थी?
क्यों पति की अंतिम विदाई में वो
साथ-साथ उसके चली थी?
क्यों नहीं वो धर्म के अनुसार
कोई भी चाल चली थी?
ऐसी बातें बनाने वालों क्या तुम खुद को इंसान कहलाने के लायक हो?
सवाल उठाने वालों स्त्री हो या पुरुष हो
समाज की कुरीतियों के तुम ही असली
जन्मदायक हो।
उजड़ गयी जिसकी दुनिया एक पल में वो कैसे कपड़े बदलने की सोच पाती?

संभालते हुए अपने मासूम बच्चों को
वो धर्म के सभी नियम कैसे निभा पाती?
पहाड़ से भी भारी दुःख असमय ही
उसके जीवन मे आ गिरा था।
पितृसत्तात्मक सोच से ग्रसित समाज उसके कपड़ो और संस्कारों की बहस पर अड़ा था।
सुनो समाज के ठेकेदारों अपनी तुच्छ सोच को कुछ तो लगाम लगाओ
जीवनसाथी बिछड़ने के दुःख का खुद पर प्रयोग करके एक बार अनुमान लगाओ।

मूल चित्र: Prince Jewellers via Youtube 

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About the Author

Antima Singh

13 वर्ष की उम्र से लेखन में सक्रिय , समाचार पत्रों में कविताएं कहानियां लेख लिखती हूँ। एक टॉप ब्लागर मोमस्प्रेसो , प्रतिलिपी, शीरोज, स्ट्रीमिरर और पेड ब्लॉगर, कैसियो, बेबी डव, मदर स्पर्श, और न्यूट्रा लाइट जैसे ब्रांड्स के साथ स्पांसर ब्लॉग लिखती हूँ मेरी कहानियां समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के लिए होती है रिश्तों के उतार चढ़ाव मेरे ब्लॉग की मुख्य विशेषता है read more...

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