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मनोरम प्यार का तराना…

Posted: जून 30, 2020

इतने में रमा की पारी आती है, तो पहले बहुत जोर से हंसने लगती है और फिर एकाएक शांत होते हुए गाया… हमें और जीने की चाहत ना होती, अगर तुम ना होते …

कॉलेज की जिंदगी का भी एक अलग ही आनंद है, इसी तरह की कुछ कहानी है, “श्रीधर और रमा” की। तो चलिए मैं आपको सबको ले चलती हूं उस दुनिया में जहां स्कूल की पढ़ाई खत्म होते ही ग्रेजुएशन के लिए प्रथम चरण कॉलेज ही होता है।

श्रीधर का कॉलेज में आज पहला दिन था, इसलिए सायकल को ठीक जगह पर खड़ी करके वह दौड़ कर कॉलेज पहुंचा और सीढ़ियों पर बैठकर आराम करने लगा। तभी विक्रम ने उस पर एक बाल्टी पानी डाल दिया और कहा – ” मैं नए विद्यार्थी का सम्मान कुछ इसी तरह से करता हूं।” श्रीधर को गुस्सा तो बहुत आया पर उसने कुछ कहा नहीं।

उसकी मां ने गांव में मेहनत मज़दूरी करके किसी तरह यहां तक पढ़ाया था ताकि कॉलेज की पढ़ाई के साथ जीवन में एक नेक इंसान बन सके। 

श्रीधर पूरी तरह से गीला होकर घर पहुंचा तो उसने अपनी मां से कहा ” मुझे कॉलेज की पढ़ाई नहीं करनी”।

 तो मां ने कहा – “गुस्सा मत करो।” कुछ दिन बाद कॉलेज में सभी तुम्हारे दोस्त बन ही जाएंगे। कुछ दिन बाद ऐसा ही हुआ, कॉलेज में श्रीधर के कई दोस्त बन गए।

ना वह किसी की कुछ बातें सुनती और ना ध्यान देती

धीरे-धीरे समय बीतता गया और कॉलेज का द्वितीय वर्ष प्रारंभ हुआ ही था कि कॉलेज में एमबीबीएस करने के लिए एक नई लड़की का प्रवेश हुआ। 

जैसे ही उस लड़की का आना-जाना होता, विक्रम वही अपनी आदत के अनुसार कुछ न कुछ शरारते करता। वह लड़की बेचारी सहमी सी आती और जाती, ना वह किसी की कुछ बातें सुनती और ना ध्यान देती।

सब दोस्तों को उस लड़की का नाम जानने की बड़ी उत्सुकता, फिर पता चला उस लड़की के भैय्या पुलिस में बड़े अधिकारी हैं और अपनी बहन को एमबीबीएस की पढ़ाई  करवा कर डॉक्टर बनाना चाहते थे।

एक दिन श्रीधर ने उसके भैय्या से आखिर पूछ ही लिया, ” पता चला उसका नाम रमा है।”

रमा के बारे में जानने के बाद वह उसे और अधिक प्यार करने लगा

जहां पहले रहते थे, वहां किसी रूद्र नामक लड़के से प्यार हो गया था और शादी की नौबत आने तक मालूम हुआ कि लड़के का चाल-चलन ठीक नहीं है। वो तो किस्मत अच्छी बोलो रमा की जो शादी के पूर्व पता चला। 

भैय्या ने कहा “तब से ऐसे ही गुमसुम सी, सहमी सी रहने लगी, रमा। इसीलिए कॉलेज में दाख़िला कराया, ताकि आगे की पढ़ाई भी कर लेगी और दिल लगा रहेगा दोस्तों के साथ।

जब से रमा कॉलेज में आई थी, तभी से श्रीधर मन ही मन चाहने लगा था उसको, पर बोले कैसे? लेकिन आज जब रमा के बारे में जानने के बाद वह उसे और अधिक प्यार करने लगा।

फिर श्रीधर द्वारा अपने दोस्तों के साथ मिलकर कहीं पिकनिक मनाने की योजना या घूमने जाने की योजनाओं का सिलसिला शुरू हो गया। अब तो वह भी विक्रम के साथ मिलकर ऐसी शरारतें और मस्ती करता ताकि रमा कभी तो खिलखिला कर हंसे। 

एक बार रमा ने डांट भी दिया,” मुझे मत परेशान क्यों, मेरे भैय्या पुलिस में अधिकारी हैं, शिकायत दर्ज कर दूंगी मैं। आसानी से मान जाओ।”

लेकिन एक दिन ऐसा कुछ होता है कि रमा जोर-जोर से हंसने लगती है

वे सब दोस्तों के साथ पिकनिक स्पॉट पर जाते हैं, जहां गीत-संगीत, अंताक्षरी के कार्यक्रम रखे जाते हैं ताकि रमा फिर अपने मूल स्वरूप में वापसी कर सकें।

अंताक्षरी खेलते-खेलते श्रीधर गाता है, प्यार दिवाना होता है, मस्ताना होता है… 

इतने में रमा की पारी आती है, तो पहले बहुत जोर से हंसने लगती है और फिर एकाएक शांत होते हुए गाया… हमें और जीने की चाहत ना होती, अगर तुम ना होते …

सब दोस्तों को बहुत खुशी होती है। आपस में सोचते हैं कि जो योजना बनाई, वह सफल हुई।

फिर उस दिन रमा श्रीधर से खुलकर बातें भी करती है, क्योंकि अब वह समझ चुकी थी कि “जिंदगी एक ठोकर लगने से खत्म नहीं होती कभी, हमें ही अपनी जिंदगी की नयी शुरुआत करनी है। ” 

बस शादी के पूर्व मेरी पढ़ाई पूरी कर लेने दिजीएगा

श्रीधर भी रमा से कहता है, “मैं सच्चे दिल से प्यार करता हूं तुम्हें रमा”… ( हवाओं के झोंके साथ लहरा रहे हैं और मंद-मंद कोयल की कुहु से गुंजन हो रही है)

रमा ने भी जवाब में कहा “आपके इस मनोरम प्यार का तोहफ़ा कबूल करती हूं सरकार, बस शादी के पूर्व मेरी पढ़ाई पूरी कर लेने दिजीएगा”…

श्रीधर ने भी कहा “हां हां बिल्कुल मोहतरमा, हम तो केवल आपको जीवन जीने की कला सीखा रहे थे। आपको एक लड़के ने धोखा दिया लेकिन दुनिया में सभी एक जैसे नहीं होते। आप बेशक अपनी पढ़ाई पूरी कीजिए, लेकिन पूरे जोश के साथ और हिम्मत के साथ डट कर हर परिस्थिति का सामना करना।” 

“मेरी तमन्ना है कि तुम ऐसे ही हंसते मुस्कुराते हुए अपना उद्देश्य पूरा करने में सफल हो और अपने माता-पिता और भैय्या का नाम रोशन करो।”

आप धन्य हैं जो बेटे को अच्छे संस्कार दिए

इतने में रमा के भैय्या और श्रीधर की मां भी कॉलेज में आते हैं क्योंकि अभिभावकों को प्राचार्य ने मीटिंग हेतु बुलाया होता है। 

अपनी बहन रमा को हंसते हुए देखकर भैय्या की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहता है और खुशी से गदगद होकर श्रीधर की मां से कहते हैं  “आप धन्य हैं जो आपने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने बेटे को अच्छे संस्कार दिए।” 

आज यह उसी का परिणाम है, इतने में श्रीधर के दोस्त विक्रम की भी आँखें खुल जाती है। 

सभी के सामने वह कहता है कि अब शरारत नहीं करेगा, “लेकिन श्रीधर और रमा की सगाई मेरे घर पर होगी” इतना कहते ही,  श्रीधर और रमा एक दूसरे की आंखों में इशारों से बातें करने लगते हैं।

 विक्रम ने धीरे से कहा……. “मैंने सब तैयारी कर ली है।”

“अब चलिए साथियों इनका टाईम तो आ गया, अब अपना टाइम आएगा”…. विक्रम दोस्तों के साथ शरारत करते हुए झूमते हुए बोलता है।

फिर पाठकों बताइएगा, कैसी लगी कहानी। मुझे आपकी आख्या का इंतजार रहेगा।

मूल चित्र: Pexels

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