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माहवारी में खाना बनाने वाली औरत अगले जन्म में कुत्री बनेगी? कहना क्या चाहते हैं आप?

Posted: February 19, 2020

हम अपने संस्कार समझते हैं लेकिन ऐसी दकियानुसी बातों को बदलना बेहद ज़रूरी है। ये 2020 है और एक औरत को अभी भी इंसान नहीं समझा जा रहा?

मंदिर द्वारा संचालित गर्ल्स इंस्टीट्यूट में एक बेहद शर्मनाक घटना

अभी कुछ दिन पहले गुजरात के भुज में स्वामीनारायण मंदिर द्वारा संचालित सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट में एक बेहद शर्मनाक घटना घटी। 12 फरवरी को इस इंस्टीट्यूट की कुछ छात्राओं को क्लास से बाहर निकालकर बैठा दिया गया था। छात्राओं ने पूरे प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया है। छानबीन के बाद जब पूरी बात सामने आई तो सब हक्के-बक्के रह गए।

इस इंस्टीट्यूट के हॉस्टल में रहने वाली 68 छात्राओं को जबरन कपड़े उतरवाकर उनके पीरियड्स की जांच की गई। बात शुरू हुई तब जब किसी ने फोन करके ये शिकायत लगाई कि कुछ छात्राएं अपने पीरियड्स में हॉस्टल के मंदिर और रसोई में घुसी थीं। जिसके बाद छात्राओं को फोन करके बाहर बुलाया गया और फिर दो लाइनें बनाई गई।

एक-एक करके सभी छात्राओं की जांच

एक लाइन में वो लड़कियां थी जिन्हें पीरियड्स आए थे और दूसरी में वो जिन्हें फिलहाल पीरियड्स नहीं आए थे। फिर एक-एक करके सभी छात्राओं को जांच के लिए वॉशरूम में बुलाया गया और उनके कपड़े उतरवाकर ये चैक किया गया कि उन्हें पीरियड्स हैं या नहीं। इतना ही नहीं इन लड़कियों को धमकाया भी गया कि ये किसी को भी इस जांच के बारे में ना बताए और ना ही कोई ग़लत क़दम उठाएं। छात्राओं ने कहा कि उन्हें प्रिंसिपल रीटा बैन और अन्य टीचर्स ने चेकिंग के लिए मजबूर कर दिया और चुप रहने के लिए कहा। छात्राओं के विरोध के बाद ये विवाद बढ़ा, ख़बरों में आया और एक्शन भी लिया गया।

इस घटना का केस दर्ज किया गया 

आरोप के मुताबिक हॉस्टल की चार औरतों, प्रिसिंपल रीता बेन, रमीना बेन हीरानी, नैलना गोसरिया और अनीता चौहान को गिरफ्तार किया गया और धारा 384 (Extortion यानि जबरन वसूली), धारा 355 (criminal force to dishonour यानि अपमान के लिए आपराधिक बल का इस्तेमाल) और धारा 506 (criminal intimidation यानि धमकाना) के तहत केस दर्ज किया गया है।

हालांकि इंस्टीट्यूट की डीन दर्शना ढोलकिया (Darshana Dholakia) ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि मामला हॉस्टल का है। इसका यूनिवर्सिटी और कॉलेज से कोई लेना-देना नहीं है। जो कुछ हुआ वह लड़कियों की सहमति से हुआ। किसी को भी इसके लिए मजबूर नहीं किया गया। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस पूरे मामले में एंट्री कर ली है और छात्राओं के अपमान की जांच के लिए एक टीम भी बना दी गई है।

इसी इंस्टीट्यूट से जुड़ा एक और विवाद

अब सुनिए इसी इंस्टीट्यूट से जुड़ा एक और विवाद। छात्राओं के साथ हुए इस अपमान की ख़बर जब हर तरफ़ फैल गई तो एक और शर्मनाक बात सामने आई। इस सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट को चलाता है स्वामीनारायण भुज मंदिर। इस मंदिर का धर्मगुरू है कृष्णास्वरूप दास। इस शख्स की एक वीडियो जो शायद महीनों पुरानी है छात्राओं के इस विवाद के बाद वायरल हो गई।

इस वीडियो को सुनने के बाद इतना गुस्सा आया की पूछिए मत। आप भी सुनेंगी तो गुस्सा आ जाएगा। ये वीडियो है गुजराती में है लेकिन आपके लिए सब यहां हिंदी मैं लिख रही हूं।

ये आदमी अपने अनुयायियों को ये कह रहा है, “अगर आपने मासिक धर्म के दौरान औरत के हाथ की बनी रोटी खाई तो अगले जन्म में बैल बनेंगे!” इसके बाद इनके विचार हैं, “जो औरत महावरी के दिनों में रोटी बनाती है या रसोई में जाती है वो अगले जन्म में कुत्री (कुतिया) बनती है!”

धर्म की बात मैं नहीं बताऊंगा तो कौन बताएगा कहते हैं ये स्वामी

शर्म तो छोड़िए ये इंसान अपनी इस बात को ये कहकर सही बताने की कोशिश कर रहे हैं कि ये सब शास्त्रों में लिखा है। आगे कहते हैं, “आप इन नियमों के बारे में जो सोचना चाहें सोच सकते हैं लेकिन ये शास्त्रों में लिखा है। मुझे सिखाया गया था कि धर्म की सीक्रेट बात बतानी नहीं चाहिए लेकिन मैं नहीं बताऊंगा तो कौन बताएगा। मासिक धर्म में तीन दिन एक औरत को शास्त्रों में बताए इन नियमों के अनुसार रहना चाहिए वर्ना तो अगले जन्म में कुतिया ही बनेगी।”

नियम हैं कि तीन दिन लड़कियां ना मंदिर जा सकती हैं और ना ही रसोई

मीडिया के कुछ लोगों ने ये वीडियो हॉस्टल में जाकर दिखाई तो वहां के प्रशासन ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया और सिर्फ ये कहा कि यहां यही नियम हैं कि तीन दीन लड़कियां ना मंदिर जा सकती हैं और ना ही रसोई।छात्राएं इस पूरे विवाद के बाद डरी भी हुई हैं कि कहीं इसका असर उनके परिक्षा परिणामों पर ना हो जाए। अभी कुछ देर पहले ही शायद इस कॉलेज की वेबसाइट काम नहीं कर रही।

क्या ये है सामाजिक ज़रूरतों के अनुसार छात्राओं को इंटरनेशनल लेवल की शिक्षा

आख़िरी बार जब मैंने वेबसाइट पढ़ी थी तो लिखा था इस इंस्टीट्यूट का मिशन है वैज्ञानिक तकनीक के सहारे और सामाजिक ज़रूरतों के अनुसार छात्राओं को इंटरनेशनल लेवल की शिक्षा दी जाएगी जो भारतीय परंपराओं पर आधारित होगी। छात्राओं को सशक्तिकरण हो और उनका विकास आधुनिक वैज्ञानिक मूल्यों पर आधारित हो, इंस्टीट्यूट इस बात का दावा कर रहा था। मैं फिलहाल वेबसाइट पर लिखा ये सब साबित तो नहीं कर सकती क्योंकि ये इस समय दिखाई नहीं दे रहा लेकिन लगभग हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज की वेबसाइट पर ऐसी ही लुभावनी बातें लिखी होती है ताकि छात्रा ज्यादा से ज्यादा एडमिशन लें।

इन झूठे दावों के पीछे कितना शर्मनाक सच छिपा है

मैं ये बात यहां इसलिए रखना चाह रही थी कि इन झूठे दावों के पीछे कितना शर्मनाक सच छिपा है। आधुनिक तो छोड़िए पारंपरिक आधारों पर भी ये दोनों ही घटनाएं कहां से सही साबित होती हैं? इतनी पिछड़ी और छोटी सोच पर शर्म ना आए तो क्या करें। औरतें हर रोज़ अपने हक के लिए लड़ रही हैं और ऐसे-ऐसे लोग उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं। ख़ुद औरतें ही ऐसी सोच का साथ दे रही हैं। घिन आती है जब ये सब सुनने को मिलता है तो।

कई बार पीरियड्स पर हुआ विवाद

ऐसी घटनाएं कुछ पहली बार नहीं हुई हैं। इससे पहले भी पीरियड्स को लेकर कई विवाद हो चुके हैं। अभी कुछ महीनों पहले ही सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल तक की औरतों की एंट्री पर विवाद हुआ था क्योंकि उन्हें मासिक धर्म आता है। इस मामले में महिलाओं ने कई आंदोलन किए और लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में इसकी लड़ाई चल रही है।

पीरियड्स के वक्त औरतों को कितना टोका जाता है

रोज़ मर्रा की ज़िंदगी में भी पीरियड्स के वक्त औरतों को कितना टोका जाता है। अभी भी पुराने ज़माने की सोच रखने वाली औरतें आपको यही कहती सुनाई पड़ेंगी कि मंदिर मत जाए, आचार मत छुओ, नीचे ज़मीन पर सो जाओ। किस आधुनिकता की बात कर रहे हैं फिर हम? वैज्ञानिक आधार को समझने की बजाए शास्त्रों का हवाला देकर ऐसी निराधार बातें करना कहां की समझ दर्शाता है।

पीरियड्स के पीछे प्योर साइंस है

मुझे पीरियड्स को किसी भी तरीके से धर्म से जोड़ने में ही परेशानी है। क्योंकि ये पूर्णत: विज्ञान पर आधारित है। एक आम इंसान की तरह मेरे शरीर के इन बदलावों को क्यों इतना बड़ा हव्वा बना दिया जाता है मेरी समझ में नहीं आता। फिर कहते हैं औरत में जीवन देने की ताकत होती है, वो देवी होती है, औरत की पूजा करनी चाहिए। जब मन किया देवी बनाया, जब मन किया बंदी। मेरा मासिक धर्म आपको क्यों परेशान कर रहा है।

इस विज्ञान को क्यों बार-बार धर्म से जोड़कर बताया जाता है

हमें अपने स्कूल के सिलेबस में ही बता दिया जाता है कि मासिक धर्म लड़की के शरीर में होने वाला केमिकल बदलाव है। हर महीने ये ब्लड-वॉल महिला के शरीर में बनती है। अगर आप मां बनने वाली होती हैं तो ये ब्लड-वॉल अंडे की रक्षा करती हैं और अगर नहीं तो ये टूट जाती है जिसे हम पीरियड्स कहते हैं। अब इस विज्ञान को क्यों बार-बार धर्म से जोड़कर बताया जाता है?

चलिए मान लीजिए, शास्त्रों में कुछ लिखा भी हो लेकिन हज़ारों साल पुरानी बातें आज के इस युग में कहां से लागू होती हैं। हम अपने संस्कार समझते हैं लेकिन ऐसी दकियानुसी बातें जो लोग आंखें बंद करके सदियों से मानते आ रहे हैं उसे बदलना बेहद ज़रूरी है। ये 2020 है और एक औरत को अभी भी इंसान नहीं समझा जा रहा।

मूल चित्र : Ahmedabad Mirror

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