कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

भारत की इन 2 महिला खिलाड़ियों ने ओलंपिक कोटे पर अचूक निशाना लगाया है

Posted: November 29, 2019

बैंकॉक में चल रहे एशियन कॉन्टिनेंटल क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट में तीरदांज दीपिका कुमारी ने स्वर्ण और अंकिता भक्त ने कल सिल्वर मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया

बैंकॉक में चल रहे एशियन कॉन्टिनेंटल क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट में 28 नवंबर 2019 को महिला रिकर्व स्पर्धा में तीरदांज दीपिका कुमारी ने स्वर्ण और अंकिता भक्त ने सिल्वर मेडल जीतकर भारत के लिए ओलंपिक कोटा हासिल कर लिया है। इन दोनों महिला तीरंदाजों ने कमाल का प्रदर्शन किया और देश का गौरव बढ़ाया।

दीपिका ने जीतने के बाद कहा, “हम शुरुआत में थोड़ा नर्वस थे, लेकिन अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहते थे, अब फाइनली जीतने के बाद अच्छा महसूस कर रही हूं।” लास्ट 4 खिलाड़ियों में दीपिका ने वियतनाम को और अंकिता ने भूटान को हराया। फिर दीपिका ने फाइनल में अंकिता को 6-0 से मात तो दी लेकिन अंकिता की ये हार, हार नहीं जीत ही थी क्योंकि दीपिका को गोल्ड मिला तो अंकिता को सिल्वर और देश को मिला ओलंपिक कोटा।

ओलंपिक कोटा का मतलब है, ओलंपिक के लिए तय प्रदर्शन करकेक्वॉलिफाई करना।

दीपिका कुमारी

एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर के घर जन्मी दीपिका बचपन से ही पत्थरों से आम पर निशाने लगाया करती थी लेकिन परिवार आर्थिक रूप से अधिक मजबूत नहीं था। फिर भी माता-पिता ने दीपिका के सपने में विश्वास दिखाया और अपनी बेटी के लिए घर की और ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ कर दिया। दीपिका घर में बने बांस के धनुष और तीर से भी प्रैक्टिस किया करती थीं। इसी तरह मेहनत और परिवार के साथ से दीपिका आगे बढ़ती रहीं और देश ही नहीं दुनिया की बेहतरीन तीरदांज़ों में अपना नाम बना लिया। 25 साल की दीपिका अर्जुन अवॉर्ड और पद्मश्री सम्मान हासिल कर चुकी हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में गोल्ड मेडल के अलावा ना जाने वो कितने पदक दिलाकर देश का सिर बार-बार ऊंचा कर चुकी हैं।

अंकिता भक्त 

कोलकाता में जन्मी 21 साल की अंकिता भक्त भी 10 साल की उम्र से ही तीरंदाज़ बनने का सपना देखती थीं। उनके पिता एक मिल्कमैन थे। लेकिन दीपिका की ही तरह अंकिता के सपनों को कोई मुश्किल रोक नहीं पाई। परिवार और लगन से अंकिता ने अपना लक्ष्य पक्का कर लिया और कोलकाताआर्चरी क्लब में एडमिशन ले लिया था। अंकिता ने भी कई बार नेशनल-इंटरनेशनल कई लेवल पर देश का प्रतिनिधित्व किया है।

इस बार दीपिका और अंकिता दोनों फिर से देश को गौरवान्वित किया है। लेकिन ये तो बस शुरुआत है, वो कहते हैं ना अभी तो ज़मीन पर कदम रखे हैं, अभी तो आसमान छूना बाकी है…..

अपनी बेटियों को सपने देखने दो,
उन्हें अपनी उड़ान भरने दो।
फितूर है गर उसमें सपने पूरे करने का,
उन्हें उनकी उड़ान भरने दो।

मूल चित्र : Google

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य - महत्त्वपूर्ण जानकारी आपके लिए

टिप्पणी

अपने विचारों को साझा करें, विनम्रता से (व्यक्तिगत हमला न करें! वेबसाइट के नीची भाग में पूरी टिप्पणी नीति पढ़ें |)

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020