कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

चरित्र का प्रमाण दूँ क्यों मैं हर पड़ाव पर?

Posted: मार्च 1, 2019

जीवन मेरा, निर्णय मेरे, आश्रित क्यों हो दूसरे के भाव पर? पार करना है मुझे जब अकेले हर बहाव को, तो मूक कैसे कर लूँ स्वयं को, अचर अपने स्वभाव को?

चरित्र का प्रमाण दूँ क्यों मैं हर पड़ाव पर,

जीवन मेरा, निर्णय मेरे, आश्रित क्यों हो दूसरे के भाव पर?

पार करना है मुझे जब अकेले हर बहाव को,

तो मूक कैसे कर लूँ स्वयं को, अचर अपने स्वभाव को?

मनुष्य हूँ दैवीय नहीं तो आशा क्यों चमत्कार की,

और मानते हो दैवीय यदि तो सहूँ क्यों फटकार भी?

राम-संगिनी नहीं जो धरती में समां सकूँ,

अग्नि के आलिंगन से सम्मान को जो पा सकूँ।

हूँ जीव इस धरा की मैं

आत्मीयता की आशा ही क्यों फिर अनुचित व्यवहार पर?

चैतन्य हूँ

अचेतन कैसे बनूँ अपने भावों के बहिष्कार पर?

तो मानुष तुम सिर्फ कर्त्तव्य के ही आधीन हो,

नहीं समर्थ तुम मेरे निर्णय और अधिकार को!

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

Writer. Humanitarian. Traveler. Thinker

और जाने

घर के बाहर काम करने से क्या मैं बुरी माँ बन जाऊँगी?

टिप्पणी

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020