तू तो नहीं पर तेरी एक याद अब भी बाकी है 

Posted: December 24, 2018

“साथ मिलकर गाई, बेसुरी ग़ज़लों में; तेरे लिए लिखी कविता की,अधूरी पंक्तियों में”, तेरे साथ बिताये हर लम्हे में, तू तो नहीं पर तेरी एक याद बाकी है। 

मेरे कमरे की खिड़की पर लटकी,
हवा की मनमानियों से खनकती,
विंडचाइम में;

तेरे दिए तोहफे के,
सहेज के रखे हुए,
रैपिंग पेपर की सिलवटों में;

जनवरी की ठण्ड में सड़क किनारे,
साथ ली
चाय की चुस्कियों में;

तेरे हाथ के बने,
मफलर की गर्माहट में;

तेरे साथ तय किए,
ऊंचे- नीचे रास्तों की थकान में;

लकड़ी के उस बैंच पर बैठकर,
घंटों की बेतुकी बातों में;

साथ मिलकर गाई,
बेसुरी ग़ज़लों में;

तेरे लिए लिखी कविता की,
अधूरी पंक्तियों में;

और हर लम्हा तेरे,
इंतज़ार की चुभन में;

हाँ…
तेरी एक याद अब भी बाकी है!

प्रथम प्रकाशित 

मूल चित्र: Pexels

पसंद आया यह लेख?

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स में पाइये! बस इस फॉर्म में अपना ईमेल एड्रेस भरें!

I writer by 'will' , 'destiny' , 'genes', & 'profession' love to write as it is the perfect

Learn More
Video Of The Week

VIDEO OF THE WEEK

Comments

Share your thoughts! [Be civil. No personal attacks. Longer comment policy in our footer!]

NOVEMBER's Best New Books by Women Authors!

Get our weekly mailer and never miss out on the best reads by and about women!

#MyEverydaySuperStar