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कौन हैं शैल देवी जिन्हें आयरन चाची के नाम से सब जानते हैं?

Posted: जनवरी 11, 2021

शैल देवी उर्फ़ आयरन चाची को अपने ऊपर विश्वास जगा कि वे भी बहुत कुछ अपने समाज के लिए कर सकती हैं एवं समाज को बदल सकती हैं। 

शैल देवी, वार्ड सदस्य, भैस्वां पंचायत, मसौढ़ी प्रखंड, पटना जिला किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। कभी आयरन चाची के नाम से प्रशिद्ध, तो कभी पुरुषों को मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल में जोड़ने के श्रेय के साथ साथ, पुरुष नसबंदी पर समुदाय में अलख जगाने वाली, इस महिला ने आज वो मुकाम हासिल कर लिया है जो निश्चित रूप से अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणा श्रोत है। शैल देवी ने यह साबित कर दिया है कि अगर ईमानदारी पूर्वक प्रयास किया जाए तो किसी भी चुनौती को स्वतः ही पूरा किया जा सकता है।

अप्रैल 2018, पटना जिला में चैम्पियन परियोजना की शुरुआत के समय में किसी ने यह सोचा भी नहीं था कि इस परियोजना के दूरगामी प्रभाव स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं को प्रभावित कर इस हद तक समुदाय को लाभान्वित कर सकते हैं। महिला वार्ड सदस्यों के लिए तो यह किसी वरदान से कम नहीं था कि कोई उनके व्यक्तिगत नेतृत्व एवं क्षमतावर्धन हेतु इस प्रकार चिंतित है।

समुदाय के अन्य व्यक्तियों की भांति शैल देवी भी स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी मुद्दों को हमेशा सरकारी व्यवस्था से ही जोड़कर देखा करती थीं एवं लगभग इस व्यवस्था एवं परिस्थिति को स्वीकार सा लिया था। चैम्पियन परियोजना द्वारा आयोजित होने वाली तीन दिवसीय प्रशिक्षण के द्वारा उन्हें अपनी भूमिका एवं कर्तव्य के बारे में वास्तविक रूप में पता चला। उन्हें पता चला कि वे वार्ड सदस्य पद पर होने के साथ साथ, एक अच्छी नेत्री भी हो सकती हैं। उन्हें अपने ऊपर विश्वास जगा कि वे भी बहुत कुछ अपने समाज के लिए कर सकती हैं एवं समाज को बदलने के लिए उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान संकल्प भी लिया।

चैम्पियन परियोजना से मिली सीख एवं आत्मविश्वास से ओतप्रोत होकर उन्होंने अपने यहाँ के स्वास्थ्य उपकेन्द्र एवं आंगनवाडी केन्द्रों पर भ्रमण करना शुरू किया। अपने नव अवतरण के पहले दिन ही उन्होंने ठान लिया कि वे अपने भैस्वां पंचायत के स्वास्थ्य उपकेन्द्र की बदहाल स्थिति को दूर करके ही दम लेंगी।

उनके पंचायत का स्वास्थ्य उप केंद्र पर वहीं के एक दबंग ने जबरदस्ती अतिक्रमण कर रखा था एवं वहाँ मवेशियों को दिया जाने वाला चारा रखा जाता था। उन्होंने इस पर चर्चा करने के लिए एक विशेष वार्ड सभा का आयोजन किया एवं इसमें उस दबंग व्यक्ति को भी बुलावा भेजा पर वे इस बैठक में नहीं आए।

बैठक हुई एवं सर्वसम्मति से इसमें निर्णय भी लिया गया की स्वास्थ्य उपकेन्द्र नहीं होने से गांव के लोगों, खास कर के महिलाओं और बच्चों, को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शैल देवी के पहल पर 5 सदस्यीय कमिटी बनाकर अतिक्रमण करने वाले से बात की गई एवं उसे यथाशीघ्र स्वास्थ्य उपकेन्द्र को खाली करने को कहा गया। स्वास्थ्य उप केंद्र के अतिक्रमण मुक्त होने के पश्चात वहाँ पर दी जाने वाली सेवाएं पुनः शुरू हुईं, पर ये ज्यादा दिन नहीं चला।

एक महीना के भीतर ही स्वास्थ्य उप केंद्र के परिसर में लगी लोहे के दरवाजे एवं ग्रील को कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ दिया गया एवं केंद्र पर कुछ उपद्रव भी किया गया जिससे वहाँ शुरू हुई सेवा बहाली पर रोक लग गई। शैल देवी ने इसके सन्दर्भ में मसौढ़ी प्रखंड के डॉक्टर रामानुजम सिंह, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से भी बात की पर स्वास्थ्य उप केंद्र की सेवा शुरू नहीं हो पाईं।

इसी दौरान खुशबु कुमारी, जो उनके ही वार्ड की एक गर्भवती महिला थीं, उन्होंने प्रखंड अस्पताल, मसौढ़ी की लापरवाही से अपने होने वाले बच्चे को गर्भ में ही खो दिया। इसकी जानकारी मिलते ही शैल देवी ने ना केवल इस मुद्दे को स्वास्थ्य मंत्री एवं प्रधान सचिव-स्वास्थ्य विभाग तक ले जाने का काम किया वरण मीडिया में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उछाला। स्वास्थ्य विभाग ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर प्रखंड अस्पताल, मसौढ़ी में सुविधा में बढोत्तरी के अनेकानेक प्रयास किये हैं।

उनके द्वारा उछाले गए प्रसव के दौरान हुए लापरवाही वाले मुद्दे पर जब कारवाई होनी शुरू हुई तो उनकी पूछ प्रखंड अस्पताल एवं अनुमंडल अस्पताल में बढ़ी। उन्हें अब विभिन्न बैठकों में बुलाया जाने लगा एवं उनकी राय भी विभिन्न मुद्दों पर ली जाने लगी है।

इन सब घटनाक्रम ने उन्हें फिर से एक बार स्वास्थ्य उप केंद्र के समस्या को आगे बढ़ाने का हौसला दिया एवं स्वास्थ्य उपकेन्द्र की समस्या को लेकर उन्होंने 26 नवंबर 2019 को फिर से एक पत्र श्री मंगल पाण्डेय, स्वास्थ्य मंत्री, प्रधान सचिव, स्वास्थ्य एवं कार्यकारी निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना को पत्र एवं ईमेल किया। 10 दिनों के अंदर ही, स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गंभीरता से इस विषय पर संज्ञान लेने के साथ साथ दिनांक 6 दिसंबर 2019 को छह सदस्यीय टीम को स्वास्थ्य उपकेन्द्र, भैस्वां पंचायत का मुआयना करने के लिए भेजा।

इस टीम ने शैल देवी, वार्ड सदस्य को भी वहाँ बुला कर विस्तृत रूप से वस्तुस्थिति का ब्यौरा लिया एवं राज्य को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्राथमिकता के साथ इस स्वास्थ्य उपकेन्द्र के जीर्णोधार हेतु निर्देश दिए साथ ही साथ इसे हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर के रूप में स्थापित करने हेतु आदेश दिया। 11 दिसंबर 2019 से यहाँ काम जोड़ शोर से शुरू हो चुका है, जो अब तक जारी है।

50 डीसीमील में फैले हुए इस केंद्र एवं यहाँ आने वाले नागरिकों की सुरक्षा हेतु इसके चाहरदीवारी करवाने के लिए भी शैल देवी प्रयासरत हैं एवं इस सन्दर्भ में उन्होंने अपनी क्षेत्र की विधायक श्रीमती रेखा देवी, सांसद, श्री रामकृपाल यादव एवं अनेक प्रभावशाली व्यक्तियों से बात की है। चूँकि स्वास्थ्य विभाग में चाहरदीवारी हेतु कोई बजट का प्रावधान नहीं होता है इसलिए इस करवाने हेतु वे अन्य लोगों के साथ संपर्क में हैं। उन्होंने अपने पंचायत के मुखिया श्री साधु पासवान से कहकर मेंन रोड से स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँचने के 50 मीटर रोड को भी PCC में करवाने की स्वीकृति ले ली है एवं इसकी राशि भी पंचायत में आ चुकी है।

ढांचागत परिवर्तन, ग्रील पेंटिंग, शौचालय का काम किया जा चुका है एवं एक महीने के अंदर यह चार बेड के पंचायत स्तरीय हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर पर एक डॉक्टर, दो ए. एन.एम्. की नियुक्ति कर वहाँ स्वास्थ्य सुविधा को बहाल किये जाने की प्रबल संभावना है। नीति आयोग के द्वारा महिला पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा स्वास्थ्य एवं पोषण को लेकर किये जा रहे विडियो फिल्म के लिए भी इनकी शूटिंग हुई है एवं राज्य के कई प्रमुख संस्थानों ने भी इनके यहाँ भ्रमण कर इनके कार्यों को वास्तविक रूप से देखा एवं समझा है।

शैल देवी की कहानी बिहार सरकार के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों में एक मील का पत्थर साबित होगी। बहुत ही कम समय में अनेकानेक प्रशंसनीय कार्य करने का वे पूरा श्रेय चैम्पियन परियोजना एवं इसको चलाने वाली संस्था सेंटर फॉर कैटेलाईजिंग चेंज को देती हैं।

सेंटर फॉर कैटेलाईजिंग चेंज(सी थ्री) एक राष्ट्रीय स्तर की संस्था है जो महिलाओं एवं लड़कियों को सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पिछले तीस वर्षों से कार्यशील है। संस्था के द्वारा विगत दो वर्षों से बिहार के दस जिलों में चैम्पियन परियोजना के माध्यम से 2000 से ज्यादा महिला जन प्रतिनिधियों को उनके पंचायतों में स्थानीय स्वास्थ्य, पोषण, लैंगिक, शिक्षा, सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को चिन्हित कर उन्हें दूर करने के लिए क्षमतावान बनाने का प्रयास किया जा रहा है। चैम्पियन परियोजना ने हुस्ना खातून की नेतृत्व क्षमता एवं मातृत्व स्वास्थ्य, पोषण, परिवार नियोजन, घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव इत्यादि से संबंधित मुद्दों पर् जानकारी एवं समझ विकसित कर उनके अंदर अदम्य जोश और साहस भरने का काम किया है। 

मूल चित्र : by the Author

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