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खुशखबरी, शायद आपको सुनने को ना मिले

Posted: May 13, 2019

शादी, कम से कम मैंने, नहीं की बच्चे के लिए। एक महिला को अब तो यह अधिकार मिलना ही चाहिए कि वो बच्चा पैदा करे कि नहीं।

इस देश में सेक्स के बारे में बात करना मना है, लेकिन शादी के एक महीने बाद गुड-न्यूज़ सब को सुननी है। भारत ही इकलौता ऐसा देश है जिसकी जनसंख्या यह बताती है कि शादी केवल बच्चे के लिए ही की जाती है।

खैर! मेरी शादी हाल ही में हुई है, लेकिन मेरे माँ बनने की ख़बर सुनना जैसे सबको खुशी देता हो। लेकिन यह बात मुझे गुस्से से जला देती है। महज छब्बीस साल की उम्र में आप शादी तो कर सकते हैं लेकिन बच्चा भी पैदा साथ ही हो जाए? यह बात आपके अलावा, आपके सगे-संबंधी और सभी को सुकून देती है। न जाने क्यों लोग बच्चे की इतनी जल्दी करते हैं। समझ के परे है!

एक महीने बाद जब मैं अपनी सास से मिली तो उन्होंने मेरे बढ़ते पेट को देखा तो उन्होंने तुरंत पूछ डाला, “कुछ होने वाला है क्या?” मैंने ना बोला तो वो चुप तो हो गईं,  लेकिन मुझे शर्म से ज्यादा हैरानी हुई। अगर आप महिला हैं, तो आपके पेट की बढ़ती चर्बी, दो बातें तय करती है। पहली यह कि अगर आप कुँवारी हैं, तो आपका खूब मज़ाक उड़ाया जाएगा और अगर आप शादी-शुदा हैं तो आप यकीनन मां बनने वाली हैं। दोनों ही हालात आपके लिए खराब हैं।

केवल सास ही नहीं आपसे सवाल करती। अगर, आप बीमार हो जाएँ, तो आप किसी से यह नहीं बोल सकतीं कि आपकी तबियत खराब है। अगर, आपको शादी के बाद उल्टी हो गई, तो मतलब आप प्रेगनेंट हैं, और लोग, सुनकर नाचने लग जाते हैं। मेरी माँ का भी यही हाल था। जब उनको बोला कि उल्टी आ रही है, तो उन्होंने पहले की तरह नहीं कहा कि मोमोज़ खा लिए होंगे या देर से उठी होंगी। ऐसा कुछ भी नहीं कहा और पहली बार उनकी यह बातें सुनने को ना मिलीं तो दुःख हुआ। और तो और, अगर आप थोड़ा भी चेहरे से ग्लो कर रही हैं, तो उसका श्रेय मेक-अप को नहीं दिया जाएगा, क्योंकि शादी के बाद अगर आप सुंदर लग रही हैं तो आप माँ बनने वाली हैं।

ये तमाम बातें मुझे गुस्सा दिलाती हैं। समाज को शायद अपने मुँह पर ताला लगा लेना चाहिए। शादी आप बच्चे के लिए नहीं करते हो। कम से कम, मैंने तो नहीं की  बच्चे के लिए। मुझे बच्चा नहीं चाहिए क्योंकि मैं उसे संभालने के काबिल नहीं हूँ। मुझे बच्चों से नफ़रत नहीं है, लेकिन उतना प्यार भी नहीं है। एक महिला को अब तो यह अधिकार मिलना ही चाहिए कि वो बच्चा पैदा करे कि नहीं। मैं इस ज़िम्मेदारी को निभाना ही नहीं चाहती। कम से कम, फिलहाल तो नहीं।

Journalist @MoliticsIndia Believe in the moment of feminism, writes on human rights, LGBTQA, Feminism. Long

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