उस चांदी की अंगूठी को निकाल फेंकना! निशाँ ये हाथ पर नहीं ज़मीर पर कर जायेगी

कभी लगाव था पर आज सिर्फ एक गहना, साफ़ हो सकती है ये परत लेकिन, फिर आएगी जब जब आवाज़ उठाएगी, क्या मूक मुर्दा बन ज़िंदा रह पायेगी? ‘अरे उसे नहीं छूना!’ मैं अक्सर टोकती जब कोई मेरी चांदी की अंगूठी को सफाई के दौरान हिलाया करता ये वो पहली निशानी है जिसने मुझे इस … उस चांदी की अंगूठी को निकाल फेंकना! निशाँ ये हाथ पर नहीं ज़मीर पर कर जायेगी को पढ़ना जारी रखें