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महिलाओं से जुडी सारे मुद्दे अब पढ़िए हिंदी में और बनाइये अपने विचार भी हिंदी में!
अग्नि सी पावन

"अग्नि रूपी चमक जितनी कंगन और श्रृंगार में है, उतना ही ज़ोर आज इनके आत्मविश्वास की धार में है" - सिमित दायरों में बंधी नारी की आशाओं और आत्मविश्वास का एक परिचय।

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ईर्ष्या, वेलकम बेक! तुम्हे मैं अपनाती हूँ अपने हर कमी के साथ

ईर्ष्या - आज जब मैं ख़ुद को, अपनी हर कमी के साथ, अपनाना चाहती हूँ तो खुल कर अपने अंदर के प्यार के साथ तुमको भी अपनाती हूँ।

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बदलती ज़िंदगी: कल माँ के आँचल में सुकून ढूँढ़ते, आज अपने आँचल का सुकून देते

"हर उस गलती की माफी माँगे, आज माँ, हम भी तो हैं माँ अभी, कर दो माफ आज माँ" - हर बात समझाने का ज़िंदगी का एक अलग ही अंदाज़ है।

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कहती है बेटी, तेरा ही अंग हूँ

ये कविता एक माँ और एक बेटी के पावन रिश्ते को समर्पित है। इस बेटी की अपनी माँ से बस इतनी दुआ है- "जो रिश्ता तुम्हारे अंदर शुरू हुआ था, उस पर विश्वास बनाए रखो तो मैं हार कहाँ मानूँ।"

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‘देवी की उपाधि’ किस लिए?

"ये ‘देवी की उपाधि’ किस काम की?" आज देवी खुद ये सवाल करती है अपने पूजने वालों से - देगा कोई जवाब?

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#MeToo के साथ अब अपनी आवाज़ मुखर करने का वक़्त आ गया है

जो आरोप अब निकले हैं #MeToo की वजह से, उनकी जाँच तो होनी हीं चाहिए ताकि हर उस इंसान का वह चेहरा सामने आए, जो उसने अपने प्रत्यक्ष चेहरे के पीछे छुपाकर रखा है|

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