नारीवादी
ख़ूबसूरत या खूबसीरत? बताओ लगन किस की है, अगन किस की है? पूछती हैं कमला भसीन

इंटरव्यू में सुन्दरियां गीत मदर टेरेसा के गाती हैं, ख़िताब मिलते ही चक्कर बॉलीवुड के लगाती हैं। इंटरव्यू में बात वीमेन एम्पावरमेंट की करी, बाद में नज़र पैसे पर धरी।

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हाँ! वो भी देशभक्ति कहलाई थी

ज़रूरी नहीं हथियारों से ही लड़ा जाए, अपने घर से देश के लिए लड़ती आयी थी, हां! यही देशभक्ति कहलाई थी। हां! वो भी देशभक्ति कहलाई थी। 

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महिलायों और लड़कियों पर होने वाली हिंसा दुनिया का सबसे बड़ा युद्ध है

हमारे परिवार पुरुषसत्ता के स्कूल बने हुए हैं। यहीं पर पुरुषसत्ता सिखाई और पनपाई जाती है। बहुत से परिवारों में बराबरी और प्रजातंत्र नाम की चीज़ नहीं होती।

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मेरी नौकरी – सिर्फ कमाई नहीं मेरा आत्मसम्मान भी

मेरे लिए नौकरी करने का मतलब सिर्फ रुपये कमाना नहीं है, मैं फिर से अपनी पहचान खोजना चाहती हूँ, अपना खोया हुआ आत्मविश्वास फिर से जगाना चाहती हूँ। 

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‘पितृसत्ता के अंतिम संस्कार का समय आ पहुँचा है’-कमला भसीन

दुर्भाग्यवश हमारे परिवार और धर्म जिन्हें समानता और न्याय के पक्ष में खड़ा होने चाहिए था, वे ही पितृसत्ता के सबसे बड़े हिमायती और शालाएं या मदरसे बने बैठे हैं। 

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एक ही स्थान पर संवर रही है बच्चों एवं महिलाओं की ज़िंदगी

आज के दौर में ऐसी महिलाएँ भी हैं, जो समाज की भलाई के लिए कुशलतापूर्वक कार्य करने में सक्षम हैं, यह तारीफे काबिल तो है ही, साथ ही आश्चर्यजनक भी। 

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मुझे ऐसे और पाओ नारीवादी!

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