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WidowLife
अब तू ही बता इन सात जन्मों के बंधन को कैसे मानूँ मैं…

एक मेरा सिंदूर और बिछिया ही पहचान बनायी समाज ने तुम्हारी पहचान थी, फिर इस सफ़ेद पोशाक में कौन पहचानेगा मुझे कि “मैं तुम्हारी हूँ?”

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मैं रचाऊँगी अपनी भाभी के हाथों में मेहंदी…

जिद्दी रमा ने किसी की कभी सुनी थी? चट रत्ना का हाथ पकड़ सुन्दर बेल-बूटे सजा दिये। मेहंदी का रंग भी ऐसा कि पल भर में चटक लाल हो आया। 

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एक विधवा औरत सुहागिन का माँग भरती है क्या…

पर शादी में जितनी महिलाएं आयी थीं, दुल्हन से ज्यादा शिवानी पर सबकी नजरें थी। कुछ तो "अनर्थ" कहकर चल दीं उठकर शादी से।

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वो अदृश्य है, वो विधवा औरत है…

विश्वगुरु कहे जाने वाले भारत में आज भी विधवा औरत को अछूत और अपशकुनी मानकर उन्हें समाज से अलग कर दिया जाता है। ऐसा क्यों है?

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विधवा पेंशन योजना क्या है और इसके लिए कैसे अप्लाई करें

अब विधवा पेंशन योजना के माध्यम से विधवा महिलाओं को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

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