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तब्बू की ये पांच फिल्में मैं कभी भी देख सकती हूँ और आप?

तब्बू एक अंडररेटेड एक्टर हैं। लेकिन तब्बू की ये फिल्में हमेशा मेरे लिए खास हैं, जिनमें वे अपनी एक्टिंग स्किल्स से जान डाल देती हैं।

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एक मां के जीवन के भावपूर्ण उतार-चढ़ाव की कहानी है फिल्म शकुंतला देवी

फिल्म शकुंतला देवी एक ऐसी मां की भी कहानी है जो अपने स्वतंत्र जीवन को जीने के लिए ऐसा जीवन जीती है जो उस दौर के तयशुदा मान्याताओं के बेड़ियों को तोड़ता है। 

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हमारी बॉलीवुड फिल्मों से ऐसा क्यों लगता है कि दोस्ती का एक ही जेंडर है?

बॉलीवुड फिल्मों को देखकर ऐसा लगता है कि दोस्ती का भी जेंडर होता है, हिंदी फिल्मों के अनुसार एक लड़का-लड़की तो क्या, लड़कियां भी आपसी दोस्ती नहीं निभा सकतीं। 

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खयाली पुलाव : एक छोटे से गांव की लड़कियों के सपनों को दर्शाती है ये शार्ट फिल्म

शार्ट फिल्म खयाली पुलाव पूछती है, क्यों आज भी लड़कियों के सपनों को बस खयाली पुलाव मात्र कहकर अनदेखा कर दिया जाता है? आखिर कब तक?

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क्लीन स्लेट फ़िल्मज़ की फ़िल्म बुलबुल कई महत्वपूर्ण सवाल उठाती है …

क्लीन स्लेट फ़िल्मज़ की फ़िल्म बुलबुल एक डरावनी फ़िल्म है, बिल्कुल, लेकिन उस से भी अधिक भयावह है समाज का घिनौना सच आज भी दिखता है। 

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फिल्म बुलबुल – महिला उत्पीड़न की परतों को खोलती एक फ़िल्म

फिल्म बुलबुल की पृष्ठभूमि 100 साल पहले की है, जब बंगाल में ईश्वरचन्द्र विद्यासागर जैसी हस्तियाँ महिलाओं के शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठा रहीं थीं।

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