सहमति
माननीय खट्टर साहब, कश्मीरी लड़कियां को ना तो आपकी ज़रुरत है ना ही दूसरे पुरुषों की

माननीय खट्टर साहब, अगर कश्मीरी गोरी’ की, धारा 370 के रहते, आप में रुचि नहीं थी, तो वह अब भी आप में कोई दिलचस्पी नहीं लेगी।

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अपनी मौन सहमति ना दें, सबक सीखाना ज़रूरी है

अगर कोई पुरुष आपसे कोई भद्दा मज़ाक करे तो उसका विरोध करें, चुपचाप अपनी मौन सहमति ना दें। इससे पुरुषों का हौसला बढ़ता है और वो मज़े लेते हैं।

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