कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

यादें
मैं भी मुसाफ़िर – सफ़र और मेरा रिश्ता कुछ ऐसा है जैसे रुई के फ़ाहे और बयार का

दूर तक फैले खेत, जंगल, हरियाली के मनोहारी दृश्य, जिन्हें कलाकार अपने चित्रों में उतारते हैं, आँखों के सामने दौड़ते तो मन रोमांच से भर जाता।

टिप्पणी देखें ( 0 )
काश कोई लौटा दे मेरा वो मासूम सा, नादान सा बचपन!

हर दिन पलकों पर नए सपने संजोता हुआ सा वो बचपन अपनी ही रवानी में मस्त वो बचपन, छोटी छोटी खुशियों का जश़न मनाता हुआ वो बचपन!

टिप्पणी देखें ( 0 )
कुछ तो आपकी भी होंगी भूली-बिसरी यादें, स्कूल और बचपन की!

प्रथम पाठशाला में जो प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार सिखाए जाते हैं वह हमारे कुशल व्यक्तित्व में समाहित होते हैं और वह ज्ञान कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है।

टिप्पणी देखें ( 0 )
क्या आपके बचपन में भी कोई ऐसा व्यक्ति था जो अब भी आपको याद आता हो?

हम सब उन्हें टॉफी वाली नानी कहकर बुलाते थे। वो रोज़ आतीं, अपनी छोटी सी लाठी के सहारे, झुकी हुई कमर, लेकिन उनके चेहरे की चमक आज भी याद है।

टिप्पणी देखें ( 0 )
यादों का पिटारा

यादें मरा नहीं करतीं, ये हमेशा दिलों में ज़िंदा रहती हैं, ये हमेशा दिलों में ज़िंदा रहती हैं...

टिप्पणी देखें ( 0 )

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020