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नारी और समाज
क्या अब निर्भया को मुक्ति मिलेगी?

22 जनवरी 2020, सुबह 7:00 बजे, चारों दोषियों को फांसी! बस तभी वे आखिरी सांस लेंगे! अगर आज निर्भया हमारे बीच होतीं तो वे क्या ऐसा ही महसूस करतीं? 

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सुनो मैं भारत की बेटी बोल रही हूँ क्यूंकि अब तो मेरा ज़माना है…

किसी राजनीतिक विषय पर जब औरतें बात करती हैं तो यही कहा जाता है, "तुम्हें क्या? तुम अपना घर-बार सँभालो और अपने काम से काम रखो।"

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वर्जिनिटी पर हमेशा लड़कियों को ही क्यों जवाब देना पड़ता है, लड़कों को क्यों नहीं

दोस्तों एक तरफ जहां वर्तमान में हम आसमान छूने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर वर्जिनिटी का मुद्दा आए दिन अखबारों और समाचारों में देखा और पढ़ा करते हैं।

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मैं चाहूँ या ना चाहूँ अक्सर कुछ न कुछ छूट जाता है

औरतों से हर मुकाम पर खरा उतरने की उम्मीद सब रखते हैं, पर इन सब उम्मीदों का ख्याल रखते रखते क्या हम अपनी उम्मीदों का ख्याल रख पाते हैं?

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महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता के 5 ज़रूरी कारण, जो हर महिला को गांठ बांध लेने चाहियें

महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता के 5 कारण जो बता रहे हैं कि क्यों महिलाओं के लिए, अपने स्वयं के कुछ मौद्रिक संसाधनों का होना महत्वपूर्ण है। 

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अपनी प्रदर्शनकारी बेटी को एक माँ का खुला पत्र

मैं एक अभिभावक हूँ और मेरी बेटी अभी व्यस्क नहीं है, ये खुला पत्र मैंने खुद को और अपनी बेटी को उन तमाम युवाओं खासकर युवा महिलाओं और उनके अभिभावकों की जगह रख कर लिखा है।

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