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कुरीतियाँ
बस बहुत हुआ ‘दहेज दो या रहने दो’ का नाटक, अब तुम रहने ही दो!

पैसे की चाह और एक गाड़ी आलीशान, इतने की ख्वाहिश की दंभ में चूर, उछाल कर पगड़ी धमकी स्वरूप 'दो या रहने दो' के भेड़ियों पर आज है समाज शर्मसार!

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हमारे समाज को अंधविश्वास से मुक्ति कब मिलेगी?

शनिदेव पर तेल बहाने से ईश्वर खुश होंगे या किसी गरीब के घर में तेल देने से, उसका परिवार भर पेट भोजन खा सके, उससे ईश्वर खुश होंगे?

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