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अहसास
अपने बचपन की कहानियां याद करते हुए मुझे आज इमली वाली अम्मा याद आ गयीं!

बात तब की है जब मैं स्कूल में थी, तब इमली बेचने वाली अम्मा रोज़ हमारे स्कूल के पास आती और सारी लड़कियां उससे इमली खरीदतीं।

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एक दिया दिल में जलाओ प्यार का

यूँ तो घरों के बाहर दिए जलाकर हम हर बार अँधेरा दूर करते हैं चलिए इस दिवाली दिल में प्यार का दिया जला कर नफरत के अंधेरों को दूर करें ! 

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क्यों मैं ग़ैर थी, ग़ैर हूँ और ग़ैर ही रहूँगी?

गैरों में भी तन्हा हूं, अपनों में बेगानी हूं, सरहदों के दायरों में घिरी, जिम्मेदारियों के चक्रव्यूह में उलझी, मेरा कोई अपना नहीं, मैं परदेसी हूं।

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कुछ लोग और उनकी यादें हमेशा हमारे साथ रहती हैं, और आखिरी दम तक साथ निभाती हैं!

क्यों मेरे हृदय पर अपने वर्चस्व का परचम फैलाना चाहती हो, क्यों तुम्हारी वह मुस्कुराहट मेरा पीछा नहीं छोड़ती, जो मेरी हर दर्द की दवा थी?

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बस इसी आस में कि कुछ और ना सही, मुट्ठी भर आसमान तो हाथ आए

अंधेरे से पहले सन्नाटा कैसा, ढलने से पहले ही ढलना कैसा, अंबर की ये बातें सुन, हैरान हुआ मन, जब सर उठाकर देखा, नभ के टिमटिमाते तारे बोले। 

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क्यों हरदम तलाशे ग़ैर सभी, तू बन अपना ख़ुदा

हरदम तलाशे गैर में रहते हैं सभी, डरते हैं कहीं खुद से मुलाकात ना हो जाए, ये रिश्ते तुम्हारे मेरे, देते हैं सुकून बहुत, पुराने खुद की याद मुझे दिला जाएं।

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