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प्रमुख लेख
मैं खुश तो मेरा परिवार भी खुश…

एकांत मिलते ही मां ने मेरी नाराज़गी का कारण जानना चाहा तो मैं रोने लग गई। मां ने बड़े प्यार से पूछा, "क्या कोई रूपए पैसे की कमी है?"

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तुम आराम कर लो, बाकी काम मैं कर लूंगी…

रात में ही जेठानी जब कमरे में छोड़ने आई थी, तभी कह गई थी कि कल सुबह रसोई की रस्म है। सुबह जल्दी उठकर तैयार हो जाना।

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हिन्दी भाषा की वर्तमान स्थिति और भविष्य के लिए सरलता है ज़रूरी

हिन्दी भाषा की वर्तमान स्थिति और भविष्य के लिए भाषा में परिवर्तन कीजिये अन्यथा इतने विशाल साहित्य भंडार को पढ़ने वाला कोई रहेगा ही नहीं।

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बिना मावे के मोदक की रेसिपी ढूढ़ रहे हैं तो यहीं रुकिए

गणपति जी और परिवार के सदस्यों को भी बिना मावे वाले मोदक का आनंद उठाने दें। तो देर किस बात की घर के बने मोदक का भोग लगाएँ।

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हिंदी साहित्य में इन 6 महिला साहित्यकारों का योगदान कौन भूल सकता है! 

हिंदी साहित्य में इन महिला साहित्यकारों का योगदान इतना है कि इनकी रचनाएं, हर पाठक को उसके जीवन के उद्देश्यों के तलाश करने में मदद करेंगी। 

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बेटियाँ भी करती हैं एक कन्या दान…

पर बेटियां जो करती हैं कन्यादान अपने दिल के अंदर किसी कोने में छिपी उस मासूम लड़की का तो नहीं होती उसके बाद पगफेरे की रस्म के लिए कोई जगह...

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