कम्युनिटी प्रस्तुत
अब दिन वो आने वाला है, पानी धरती से जाने वाला है

लोग हैं देखो कितने झगड़ते, सड़कों पर है लगी कतार, मटके-बाल्टी खाली पड़े हैं, लाइन लगा सड़कों पर पड़े हैं। 

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वेदना-दिल की बात, कोई मुझसे तो पूछे

"पर कोई मुझसे तो पूछे, कि सच नहीं ये जीवन मेरा, ये तो बस एक कहानी है"- ज़रूरी नहीं कि जो दिखे वही सच्चाई है। कई मर्तबा जो नज़र आता है वह हक़ीक़त से कहीं परे होता है। 

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कर्मों का फल

रोज की तरह रमा घर का काम कर रही थी। तभी पड़ोस की मुनिया चाची आई। मुनिया चाची के स्वभाव से सब परिचित थे। वो सच बोलती थी जो की बहुत कड़वा लगता था सभी को, सेठाईन डर गई ना जाने क्या बोल जाए।"

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खामोशियाँ

"कुछ देर के लिए खामोशियाँ ही बेहतर है, बोलने पर अब सुनता ही कौन है?" क्या खामोश रहने में वाकई समझदारी है ? 

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नई कविता

एक नयी कविता जो अभी मन के झरोखे से निकली है। क्या शांति में ही सदैव समझदारी है - दो लघु कविताएं। 

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ऐ वक़्त, ठहर जा ज़रा

"जब सीख लिया तेरी सीख सेतू उड़ चला पंख तना पसार, झांका तो होता एक बार ही अरमानों की उठी थी बयार"- समय बड़ा बलवान है परंतु किसी के लिए नही रुकता। 

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