Vineeta Dhiman

मै विनीता धीमान M.A,B.ed हूं। दो प्यारे बच्चों की माँ हूँ। मुझे लिखना पसंद है और नये दोस्त बनाना भी।

Voice of Vineeta Dhiman

यदि हम ज़िंदगी में आये बदलाव को स्वीकार कर लें तो ज़िंदगी गुलज़ार है!

अब बातें भी सिर्फ बच्चों की ही होती हैं और गानों की जगह तो अब लोरी आ गई जिसको सुनते-सुनाते कभी-कभी हम दोनों पति-पत्नी सो जाते हैं, लेकिन हमारे बच्चे नहीं।

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जब मेरी सहेली ने माँ बनने के लिए मुझे एक नया तरीका सुझाया!

ये तो वरदान है, और तो और आप बिना शादी किए भी इस तकनीक से बाल सुख ले सकते हो। आजकल तो कितने ही बॉलीवुड स्टार्स भी इसकी मदद से माँ-बाप बन रहें हैं। 

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क्यों लड़कों की अपने ससुराल के प्रति कोई ज़िम्मेदारी नहीं होती?

हमारे समाज में लड़की वालों को कब तक लड़के वालों द्वारा बनाये गए मापदंडों पर खरा उतरना पड़ेगा? क्या शादी का मतलब है लड़की के घर वालों से लड़की का रिश्ता ख़त्म?

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बड़ों का तो पता नहीं, पर बच्चे अपनी गलतियों से ज़रूर सीखते हैं!

अरे, एक बार गलती से इसने गर्म पानी को छू लिया था। तब तो यह सिर्फ 2 साल का ही था। तब से आज तक इसने कभी भी किसी गर्म बर्तन को नहीं छुआ।

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हम तो जज करेंगे क्यूंकि जजमेंटल हैं हम!

हम लोग किसी को ना जानते हुए, पहचाने बिना, बाहरी स्थिति को देखकर, दूसरे के प्रति एक धारणा बना लेते हैं, दूसरों को जज करने की आदत हो गयी है हमारी।    

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सुना होगा ‘बहू ने सुहाय, पोता गले लगाय’, पर अब ये सोचिये बहु ना हो तो, पोता कहाँ से आये?

हम अपने रिश्तों को बनाए रखने के लिए चुप रहना पसंद करते हैं, खासकर कि हम बहुएं। हमें अपने और अपने परिवार, दोनों के बारे में सोचकर ही कदम उठाना पड़ता है।

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अपनी सास को खुश करूँ कि अपने पति को, आखिर कब तक ये सवाल मेरे सामने घूमता रहेगा?

आपके साथ भी ऐसा होता है क्या, पति और सास दोनों को खुश करने के चक्कर में हम महिलाओं की आज़ादी हम से छीन ली जाती है और यह हमारे साथ कब तक होगा? 

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क्या आपके बचपन में भी कोई ऐसा व्यक्ति था जो अब भी आपको याद आता हो?

हम सब उन्हें टॉफी वाली नानी कहकर बुलाते थे। वो रोज़ आतीं, अपनी छोटी सी लाठी के सहारे, झुकी हुई कमर, लेकिन उनके चेहरे की चमक आज भी याद है।

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अरे अभी तो शादी हुई है और अभी से ये सब सवाल, आख़िर क्यों?

शादी के बाद सबका यही सवाल रहता है, 'अरे! खुशखबरी कब दे रहे हो?' घर की औरतें, खासकर सास तो हमेशा ही बहू पर अपनी पैनी नज़र रखती हैं। 

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बहू तुम अहोई अष्टमी का व्रत मत करना

वो भी एक माँ हैं, लेकिन सिर्फ बेटों की। तभी उन्हें ये पता कि एक माँ की कोख बेटा बेटी में कोई फर्क नहीं करती। क्या बेटे को पैदा करने में ज़्यादा कष्ट होता है?

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क्यों बच्चों को बिगाड़ने में हमेशा माँ का हाथ होता है, पिता का नहीं?

आज भी बच्चों की परवरिश में माँ का योगदान ज़्यादा रहता है। बच्चों को बिगाड़ने और सँवारने में जितना माँ का योगदान है, उतना ही पिता का भी फ़र्ज़ होना चाहिये।

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हे भगवान् मदद कर दो! सब सही करना!

इतना सुनते ही मैंने अपने बेटे को गोद में उठाया और निकल पड़ी हॉस्पिटल की तरफ। पूरे रास्ते भगवान् से दुआ माँगती रही, हे भगवान् सब सही करना।

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माँ बन कर जाना, मेरी दुनिया मेरे बच्चे

उस समय मानो सब कुछ मिल गया, खुशी के दो आंसू निकल पड़े। समय निकलता गया। मेरे बच्चे के साथ मेरा रिश्ता भी बनता रहा।

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आपको बीमार होने का हक नहीं है

अब सच्चाई यह है कि आप शादी के बाद बीमार नहीं हो सकतीं। आपको बीमार होने का हक ही नहीं है, क्यूंकि आप तो बहू हैं।

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