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Vineeta Dhiman

मै विनीता धीमान M.Phil, B.ed हूं। दो प्यारे बच्चों की माँ हूँ। मुझे लिखना पसंद है और नये दोस्त बनाना भी।

Voice of Vineeta Dhiman

और अब सबसे कठिन सवाल, ‘मम्मी आज खाने में क्या बनेगा…’

अब मैं रोज-रोज नए नए पकवान कहाँ से लेकर आऊं इसके लिए? रोज रोज नया खाना बनाना, अलग अलग सब्जियां बनाना तो मुसीबत बन गया है।

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अब मैं अपना सपना ज़रूर पूरा करूँगी…

एक तो काजल अपने पिता की मौत को सहन नहीं कर पा रही थी, और पिता के जाते ही सब रिश्तेदारों ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया।

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क्या अपने फर्ज़ भूल कर अपने माता पिता को उनका फ़र्ज़ याद दिलाना ठीक है?

आज कल सच्चाई यह है कि परिवार में रहने वाले लोगों की सोच बदल गयी है। पहले जैसे संयुक्त परिवार नहीं रहे हैं, जहाँ सब साथ मिलकर रहते थे।

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आइये बनाएं आलू का हलवा जो है बनाने में आसान और खाने में स्वादिष्ट!

आलू का हलवा जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही इसे बनाना आसान। आप इसे बहुत ही कम समय में बना सकते हैं, और इसे खाएं और खिलाएं! 

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माना झूठ बोलना गलत है, लेकिन ऐसे कई झूठ बोलते हैं हम अपने बच्चों से…

ऐसे झूठ बोलना कि 'तू इतनी चाय पीती है ना इसलिए तेरा रंग ऐसा है, अब तुझसे तो कोई शादी भी नहीं करेगा' और मैं मूर्ख सच मान गयी और...

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‘लड़का विदेश में है’ सुनते ही लड़की का रिश्ता तो तय कर दिया, लेकिन…

काजल को समझ नहीं आ रहा कि वो क्या करे, कैसे अपने पति को वापस बुलाए। अब उसके ससुराल वालों को भी नहीं पता कि उनका बेटा कहाँ है।

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पेश है थोड़ा हटकर, लौकी का रायता, मज़ेदार तड़के के साथ!

दी गयी रेसिपी से बना लौकी का रायता परिवार के 3 से 4 सदस्यों के लिए पर्याप्त है। जब आप इसे परोसें तो पुदीने की पत्तियां डालकर ठंडा ठंडा सर्व कीजिए।

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बहू तो मेरी कामकाजी और स्मार्ट है, लेकिन…

आप किसी की जिंदगी में उतना ही हस्तक्षेप कीजिये, जितना सामने वाला सहन कर सके! किसी के व्यवहार को अपने तराजू से मत तोलिए!

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जय मातृभूमि, जय हिंद

15 अगस्त 1947 को हमारा भारत देश अंग्रेजों के चंगुल से आजाद हुआ था और विरासत में मिली इस आजादी को बनाये रखना हर भारत वासी का परम् कर्तव्य है।

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क्या सीमा की सास का रज्जो के लिया ऐसा कहना सही था?

हमारे घरों में काम करने वालों को समाज के लोग हीन दृष्टि से ही देखते हैं। बहुत कम ही परिवारों में उनका सम्मान किया जाता है। उन्हें उचित दर्जा दिया जाता है।

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बारिश में बालों की देखभाल के ये 8 तरीके दूर करेंगे आपकी झड़ते बालों की समस्या

अगर आप भी अपने बालों की चमक को बरकरार रखना चाहते हो तो आज मैं आपको कुछ टिप्स बताना चाहती हूं। तो पेश हैं बारिश में बालों की देखभाल के तरीके...

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शादी होने के बाद क्यों सिर्फ बहु को ही देनी पड़ती है अपनी नींद की क़ुरबानी?

शादी के बाद, मेरी नींद गायब हो गयी। कभी रस्मों के नाम पर, कभी मेहमानों के आने जाने को लेकर हमेशा नींद की क़ुरबानी देनी पड़ती थी। लेकिन यह सब मुझे ही महसूस होता था, मेरे ससुरालवालों को नहीं।

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बच्चों की छुट्टियां ननिहाल में

पिछले साल भी हम कहीं नहीं गए थे। पहले बच्चे छोटे थे, तब कहीं, नहीं जा सके। अब जब बच्चे बड़े होने लगे हैं, तब आपको ढेर सारे काम रहते हैं।

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लड़की हो! कम बोला करो : क्या कम बोलने की ज़रुरत सिर्फ लड़कियों को है?

जो परिवार अपने घर की बेटियों को खुली छूट देते हैं, उनके परिवार और उन लड़कियों को हमारा समाज स्वीकार नहीं करता। उन्हे गलत नज़र से देखा जाता है।

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ये लड़कियाँ भी ना…बहु बनते ही अपने संस्कार भूल जाती हैं!

मेरे माता पिता के दिये संस्कारों के कारण ही मैं आज तक चुप थी, लेकिन अब और नहीं, आपको मेरे परिवार वाले जब पसंद नहीं थे तो रिश्ता ही क्यों किया था?

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इस झटपट आम फालूदा रेसिपी को आज ही अपनाकर देखें

मैंने अपनी बेटी के साथ आम फालूदा रेसिपी ट्राई की, आप भी अपने बच्चों के साथ रसोई में कुछ वक़्त बिताएं और ठंडे फालूदा का आनंद लें।

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सत्तू और बेल का शरबत : गर्मी से राहत के लिए यूं बनाएं मिनटों में

सत्तू का शरबत और बेल का शरबत, बर्फ की ठंडक से भरे ये दो शर्बत गर्मियों में शरीर को एनर्जी और ताजगी दोनों देते हैं और आज यहां है इसकी रेसिपी। 

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इस बार ठंडे में मेहमानों को राजस्थानी छाछ राबड़ी पिलाएं

खाने को हज़म करने वाली यह राजस्थानी छाछ राबड़ी में गर्मियों का देसी ठंडा है। इसको बनाने में बहुत कम मेहनत करनी पड़ती है और यह पौष्टिक भी है।

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क्या गुनाह कर दिया मैंने…

रिया ने अपने हाथों में लिया मोबाइल बेड पर फेंकते हुए कहा "तुम भी तो सारा दिन मोबाइल देखते हो, यदि मैंने देख लिया तो क्या गुनाह कर दिया?"

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क्या बाहरी सुंदरता और शादी ही मेरे जीवन का अंतिम लक्ष्य है?

क्या पतला होना और शादी ही जीवन का अँतिम लक्ष्य है जो मुझे नहीं मिला तो मेरे जीवन ने खुशियाँ नहीं आयेंगी या मेरा जीना बेकार है? 

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तेरी मेरी बनती नहीं पर तेरे बिना मेरी चलती नहीं

पति पत्नी का रिश्ता ऐसा रिश्ता है जिसमे मीठे और नमकीन दोनों का स्वाद ज़रूरी है, यह 'तेरी मेरी बनती नहीं पर तेरे बिना मेरी चलती नहीं ' कहावत की तरह है।

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क्या आपके परिवार में भी बहू का एक ही संस्कार है, और वह है चुप रहना!

अब आप ही बताइये कि ये कहाँ का इंसाफ़ है कि बहू के घर वाले तो बदतमीज, गवांर कहे जाते है और लड़के वाले संस्कारी, पढ़े-लिखे समझे जाते हैं?

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आम पन्ना बनाने की इस आसान रेसिपी को आप भी इस मौसम में अपनाएं!

आज मैं आपके लिये चिलचिलाती गर्मी से बचने के लिए आम पन्ना बनाने की अचूक रेसिपी लाई हूँ क्यूंकि इस शरबत की इस मौसम में खूब डिमांड रहती है।

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अपनी बहु को सिर्फ दहेज़ कमाने का साधन न समझें!

सच कहा, एक पिता कभी नहीं जान पाता कि जिस घर मे वो अपनी बेटी को दे रहा है आगे चलकर उसकी बेटी के साथ क्या होगा, कैसा बर्ताव किया जाएगा।

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गाँव की शादी और किस्सा एक ‘चटोरी चाची’ का

गाँव की शादी में देसी गाने और देसी खाना! गांव में रहने वाले ताऊजी के बेटी की शादी थी तो पापा मम्मी और हम चारों भाई बहन भी शादी का मजा लेने चल पड़े।

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क्या आपकी बहु भी आपकी मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं कर सकती?

हमसे से कितनी ही महिलाओं की ज़िंदगी शादी के बाद बदल जाती है, हमारा उठना, बैठना, बोलना, चलना, खाना, पीना सब बदल जाता है, यहां तक कि हमारी हंसी भी बदल जाती है।

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अगर दीवारों के कान होते हैं, तो बातों के पैर भी होते हैं!

“डोर बेल बज रही है…” “अरे सुबह सुबह कौन आ गया, शायद आज सफाईवाला जल्दी आ गया? अरे बहु देख तो कौन आया है?” शांता जी ने अपने कमरे में से कहा। शीला ने भागकर देखा, दरवाजे पर मम्मी जी की सहेली आई हैं, “आईये आंटी जी कैसे आना हुआ सब ठीक है तो है?” […]

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लस्सी कैसे बनाते हैं
लस्सी कैसे बनाते हैं? और अगर बात हो मीठी और ठंडी पंजाबी लस्सी की तो?

आज मैं यहां आपको इस चिलचिलाती गर्मी से राहत देने के लिए ठंडी-ठंडी पंजाब की लस्सी कैसे बनाते हैं बताने जा रही हूँ ...तो इंतज़ार किस बात का?

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काश मेरे बच्चे भी असली बचपन जी सके……

प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही दुनियां में खोया हुआ है व्हाट्सएप, फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम से जुड़े हुए हैं लेकिन अपने आस पास रहने वाले लोगों के साथ बात करने का समय नही है।

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अगर आप एक खुशहाल परिवार चाहते हैं तो आपका ज़िम्मेदार होना भी ज़रूरी है!

जब आप अपने घर, बच्चों और अपनी पत्नी की जिम्मेदारी उठा नहीं सकते थे, तो पहले ही मुझे बता दिया होता तो आज कहानी कुछ और होती।

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अब तो अपनी बहु की बुराइयां करना बंद करें !

माना कि बहू दूसरे घर से आई है, वो तो सदा से ही पराई है, लेकिन बहू को भी सम्मान चाहिये और आप अपने लिए कैसा व्यवहार चाहती हो, यह आप पर भी निर्भर करता है। 

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कोरोना से डरने की ज़रुरत नहीं, बल्कि डटकर सामना करो….

यह वर्ष न जाने विश्व में हर जगह एक नकरात्मक हवा लेकर आया है जो हर ओर अपना तांडव दिखा रहा है कोरोना ऐसा शब्द बन गया जिसे बच्चा बच्चा भी जानने लगा। 

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आज भी माँ के हाथ से बने खाने का लुत्फ़ कुछ और ही है…

हम कितने भी बड़े क्यों न हो जाएँ, चाहे खुद भी माँ बन जाएँ, फिर भी अपनी माँ को, माँ के हाथ से बने खाने के स्वाद को कभी नहीं भूल सकते।

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अरे शादी तो हो गयी, अब तुम बच्चा कब करोगे?

सुहानी बहू शादी की सालगिरह मुबारक हो, अब तो तुम बच्चे के बारे में सोचो। शादी को 3 साल हो गए हैं और अभी तक तुम्हारी गोद नहीं भरी।

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आप जी छोटा मत करो जी, सब ठीक होने पर बच्चे हमसे मिलने आ जाएंगे…

इन गर्मियों की छुट्टियों में आप जी छोटा मत करो, उदास मत हो, आपकी बेटी आपके नातिन के साथ, सब ठीक होने पर आपको मिलने ज़रूर आयेगी।

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क्या लड़की के जीवन का मक़सद सिर्फ शादी करना होता है?

हमारा समाज पता नहीं कब इस बात को समझेगा कि शादी हर समस्या का हल नहीं है, शिक्षित होना उतना ही ज़रूरी है जितना ज़रूरी हमारे लिए साँस लेना। 

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जीवन की सुनहरी धूप की यादें और एक चमकती आशा।

ज़िंदगी एक खेल की तरह है कभी कोई जल्दी हार जाता है और कभी कोई देर से। मृत्यु तो सबको आनी हैं। खुद को संभालना किसी अपने के जाने के बाद,यह मायने रखता है।

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नीम का पेड़ या गाँव की छोटी अदालत।

पेड़ तो हमारे जीवन का हिस्सा है... जितने हो उतने कम लगते है इस धरा का श्रंगार है यह हरे भरे पेड़।

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दहेज मांगने वालों, अब बहु-बेटियां खुद करेंगी तुम्हारा बहिष्कार…

दहेज के लिए किसी की बेटी को तंग करने, उसको प्रताड़ित करने से पहले दो बार जरूर सोचें कि हम जो करने जा रहे हैं, उसका गंभीर परिणाम भी हमें भुगतना होगा।

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अकेली मैं क्या-क्या करूँ, कुछ काम आप भी तो कर दो ना…

एक आप हैं, यदि बच्चे ने पोट्टी कर भी दी तो आप उसके पिता हो, आप भी उसे धोकर साफ कर सकते हो लेकिन आपको तो अपनी मूवी देखनी है...

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अब मैं भी आराम कर सकती हूँ क्यूंकि ये घर तुम्हारा भी है…

अपने परिवार की चिंता करना अच्छा है लेकिन इतनी भी नहीं कि परिवार में कोई भी अपना काम खुद न कर सके और सारी ज़िम्मेदारी एक औरत पर आ जाए...

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शादी तुमसे नहीं तुम्हारे क्रेडिट कार्ड से की थी!

अगर आपको कभी ये पता चल जाए कि आपके पति और परिवार वालों को आपकी कद्र सिर्फ और सिर्फ इसलिए है कि आप कमाती हैं, तो आप क्या करेंगी?

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मम्मी जी आप तो अभी भी कितनी एक्टिव हो!

क्या यह उचित है कि घर का एक वर्ग तो काम करता रहे और एक वर्ग आराम से बैठकर मौज मनाएं। जब घर सबका है तो घर के काम भी सबके होने चाहियें।

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ज़माना बीत गया सुने हुए दादी नानी की कहानियां

वो कहानी जो सिखाती थी, सदाचार की बातें, परोपकार के गुण, नैतिक मूल्यों को अपनाती थी, कहानियाँ दादी नानी की बच्चों की मनभावन थी। 

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कोरोना से बचना है तो कुछ बातों को मान लो

जब सब मिलकर करेंगे ये उपाय, तो मर जायेगा मारने वाला ये जीव, जिसने इतना उत्पात मचायाअब उसको सबक सिखाएंगे, कोरोना का नामोनिशान मिटायेंगे।

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कल से कल तक : महिला का बदलता स्वरूप

अभी भी कितनी जगह हमारे साथ अन्याय, शोषण, अत्याचार किया जाता है, जब तक हमारे देश में एक भी महिला असुरक्षित है, तब तक हमें ये जंग लड़नी होगी। 

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इस बार होली होगी मेरी बेटी की पसंद की…

मेरी बेटी होली को लेकर बहुत उत्साहित है क्योंकि इस बार तो उसका 2 साल का शैतान भाई जो उसके साथ है, उस चुटकी ने तो पहले से सब प्रोग्राम फ़िक्स कर लिया है।

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होली के असली रंग सिर्फ़ अपनों के संग

अपने परिवार को छोड़ना एक बेटी के लिए कितना मुश्किल होता है! ये वही जान सकता है जिसके बेटी हो, लेकिन प्रिया की ससुराल में न तो ननद है ना ही कोई बुआ।

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क्यों मेरी कमाई से तुम्हारा घर नहीं चलता?

मैं सुबह 4 बजे से रात 11 बजे तक घर और ऑफिस के काम में लगी रहती हूँ, कभी थकती भी हूँ, फिर भी यही सुनने को मिलता है कि करती क्या हो?

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आज मैं अपने घर के साथ-साथ अपने लेखन को भी निखार रही हूँ – विनीता धीमान

‘होम-मेकर होने का मेरा सफर’ कांटेस्ट की तीन बेहतरीन कहानियों की श्रृंखला में आज तीसरी कहानी है विनीता धीमान की! विनीता आपको हार्दिक बधाई!

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जब दहेज की कोई वैल्यू नहीं, तो इसे लेना बंद करें

बात छोटी है लेकिन सच, बहू के साथ लाए दहेज़ की कोई वैल्यू नहीं होती और कई जगह ससुराल की मिट्टी पर भी झूठा घमंड और लोक दिखावा किया जाता है।

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12 घरेलू उपाय हाथों की देखभाल के उन सुंदर और मुलायम हाथों के लिए

ये 12 घरेलू उपाय हाथों की देखभाल के लिए बहुत ही बढ़िया हैं और ये उपाय कर के आप अपने हाथों को सुंदर और मुलायम बना सकती हैं। 

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अब मुझे ‘छेड़े जाने’ का कोई डर नहीं है क्यूंकि मेरी शादी हो गयी है!

हम औरतें भी ना कैसी कैसी धारणा बना लेती हैं कि यदि हमारी शादी हो गई है, हमारी मांग में सिंदूर, माथे पर लगी बिंदी को देखकर कोई भी हमारा बुरा नहीं कर सकता।

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सवालों में सवाल है ‘बड़ी होती बेटी की शादी कब करोगे?’

ये बात इस समाज को अच्छे से गाँठ बंध लेनी चाहिए कि अपनी बेटी के हाथ कब पीले करने है यह निर्णय लेना, सिर्फ उसके परिवार वालों का ही काम है। 

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उतार फेंको तुम अब इस धूमिल आवरण को

अपने कदमों को पहचानो, अपनी गति को समझो, तोड़ डालो इन जंजीरों को, तुम एक नारी हो,अपनी पर आ जाओ तो, इस दुनिया पर भारी हो!

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मेरे मायके जाने पर पतिदेवजी बड़े खुश हुए थे, लेकिन फ़िर…

"क्या हुआ? आज आ गई मेरी याद आपको? इतने दिन बाद? और कैसे चल रही आप दोस्तों की पार्टीज, बहुत मज़े कर रहे हो हमारे बिना...."

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क्या मंगलसूत्र पति की रक्षा करता है?

क्या जो महिलाएं इतना सज-धज के रहती हैं, उनके साथ हमेशा अच्छा ही होता है? या फिर ये भी हमारे द्वारा बनाए गए नियमों का हिस्सा है?

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सबकी जोड़ियां बनाना हमारा काम नहीं है…

क्या अजीब जोड़ी है लड़की कितनी सुंदर है, नैन नक्श भी अच्छे हैं और लड़की की हाइट भी माशा अल्लाह काफी अच्छी है, लेकिन इसने क्या देखा इस लड़के में?

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बच्चों का व्यक्तित्व संवारें : यूँ ही अपने बच्चों का बच्चपन ना छीनें!

घर के बच्चों को जितना डांट कर रखा जाता है, वो बच्चे उतने ही दब्बू, संकोची, और कभी-कभी गुस्सैल भी हो जाते हैं, आप एक मार्गदर्शक की तरह उनको देखें। 

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शादी हर समस्या का समाधान नहीं है…

मेरी गुज़ारिश है आपसे, अपने ग़ैर ज़िम्मेदार लड़के की शादी करके उसकी ज़िम्मेदारी अपनी बहु पर ना डालें। ऐसा करके आप एक और परिवार की तबाही के लिए ज़िम्मेदार होंगे।  

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इस बार मकर संक्रांति जाते-जाते मेरी कुछ यादें ताज़ा कर गयी…

वह दिन मैं आज भी नहीं भूलती...किस तरह से इस दिन भगवान ने मेरी सूनी गोद में एक सुंदर सी परी को दिया था और मुझे माँ बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। 

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परीक्षा की तैयारी के कुछ उपयोगी टिप्स जो आपके बच्चों के काम आएंगे

परीक्षा की तैयारी के ये टिप्स आप भी अपने बच्चों को बताएं ताकि आपके बच्चें भी अपनी परीक्षा में सफल हो सकें और आपको भी कोई परेशानी ना हो। 

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अब लोक-दिखावे के लिए काहे का स्टाइलिश होना

बच्चों के सामने लड़ाई-झगड़ा करने से, उनके बारे में बुरे, गलत तरीके से बोलने से बनती बात भी बिगड़ सकती है और इसका असर पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है।

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माता-पिता होने के नाते अपने बच्चों का सहारा बनें दुश्मन नहीं

कल मेरी एक सहेली रिया मुझसे मिलने आई। बहुत उदास थी। पूछा तो उसने जो मुझे जो कहानी बताई, वह मैं आप सबको बयान करती हूँ। सच में ऐसा भी होता है?

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‘हाय, कोई तो मेरी मदद कर दो!’ क्या ये पुकार आपकी भी है?

क्या विभा की तरह आपके घर के काम भी ख़त्म नहीं होते? विभा की दीदी ने ज़िंदगी आसान बनाने के लिए कुछ बढ़िया टिप्स उसको बताये और ये टिप्स आपकी भी मदद कर सकते हैं! 

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यदि हम ज़िंदगी में आये बदलाव को स्वीकार कर लें तो ज़िंदगी गुलज़ार है!

अब हमारी बातें भी सिर्फ बच्चों की होती हैं और गानों की जगह, अब लोरियां आ गई हैं जिसको सुनते-सुनाते कभी-कभी तो हम दोनों ही अपने बच्चों से पहले सो जाते हैं!

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जब मेरी सहेली ने माँ बनने के लिए मुझे एक नया तरीका सुझाया!

ये तो वरदान है, और तो और आप बिना शादी किए भी इस तकनीक से बाल सुख ले सकते हो। आजकल तो कितने ही बॉलीवुड स्टार्स भी इसकी मदद से माँ-बाप बन रहें हैं। 

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क्यों लड़कों की अपने ससुराल के प्रति कोई ज़िम्मेदारी नहीं होती?

हमारे समाज में लड़की वालों को कब तक लड़के वालों द्वारा बनाये गए मापदंडों पर खरा उतरना पड़ेगा? क्या शादी का मतलब है लड़की के घर वालों से लड़की का रिश्ता ख़त्म?

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बड़ों का तो पता नहीं, पर बच्चे अपनी गलतियों से ज़रूर सीखते हैं!

अरे, एक बार गलती से इसने गर्म पानी को छू लिया था। तब तो यह सिर्फ 2 साल का ही था। तब से आज तक इसने कभी भी किसी गर्म बर्तन को नहीं छुआ।

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हम तो जज करेंगे क्यूंकि जजमेंटल हैं हम!

हम लोग किसी को ना जानते हुए, पहचाने बिना, बाहरी स्थिति को देखकर, दूसरे के प्रति एक धारणा बना लेते हैं, दूसरों को जज करने की आदत हो गयी है हमारी।    

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क्या चुप रह कर सब कुछ सहने की ज़िम्मेदारी सिर्फ आपकी बहु की है?

हम अपने रिश्तों को बनाए रखने के लिए चुप रहना पसंद करते हैं, खासकर कि हम बहुएं। हमें अपने और अपने परिवार, दोनों के बारे में सोचकर ही कदम उठाना पड़ता है।

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अपनी सास को खुश करूँ कि अपने पति को, आखिर कब तक ये सवाल मेरे सामने घूमता रहेगा?

आपके साथ भी ऐसा होता है क्या, पति और सास दोनों को खुश करने के चक्कर में हम महिलाओं की आज़ादी हम से छीन ली जाती है और यह हमारे साथ कब तक होगा? 

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क्या आपके बचपन में भी कोई ऐसा व्यक्ति था जो अब भी आपको याद आता हो?

हम सब उन्हें टॉफी वाली नानी कहकर बुलाते थे। वो रोज़ आतीं, अपनी छोटी सी लाठी के सहारे, झुकी हुई कमर, लेकिन उनके चेहरे की चमक आज भी याद है।

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अरे अभी तो शादी हुई है और अभी से ये सब सवाल, आख़िर क्यों?

शादी के बाद सबका यही सवाल रहता है, 'अरे! खुशखबरी कब दे रहे हो?' घर की औरतें, खासकर सास तो हमेशा ही बहू पर अपनी पैनी नज़र रखती हैं। 

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बहू तुम अहोई अष्टमी का व्रत मत करना

वो भी एक माँ हैं, लेकिन सिर्फ बेटों की। तभी उन्हें ये पता कि एक माँ की कोख बेटा बेटी में कोई फर्क नहीं करती। क्या बेटे को पैदा करने में ज़्यादा कष्ट होता है?

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क्यों बच्चों को बिगाड़ने में हमेशा माँ का हाथ होता है, पिता का नहीं?

आज भी बच्चों की परवरिश में माँ का योगदान ज़्यादा रहता है। बच्चों को बिगाड़ने और सँवारने में जितना माँ का योगदान है, उतना ही पिता का भी फ़र्ज़ होना चाहिये।

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हे भगवान् मदद कर दो! सब सही करना!

इतना सुनते ही मैंने अपने बेटे को गोद में उठाया और निकल पड़ी हॉस्पिटल की तरफ। पूरे रास्ते भगवान् से दुआ माँगती रही, हे भगवान् सब सही करना।

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माँ बन कर जाना, मेरी दुनिया मेरे बच्चे

उस समय मानो सब कुछ मिल गया, खुशी के दो आंसू निकल पड़े। समय निकलता गया। मेरे बच्चे के साथ मेरा रिश्ता भी बनता रहा।

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आपको बीमार होने का हक नहीं है

अब सच्चाई यह है कि आप शादी के बाद बीमार नहीं हो सकतीं। आपको बीमार होने का हक ही नहीं है, क्यूंकि आप तो बहू हैं।

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Women In Corporate Allies 2020

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