Vineeta Dhiman

मै विनीता धीमान M.Phil, B.ed हूं। दो प्यारे बच्चों की माँ हूँ। मुझे लिखना पसंद है और नये दोस्त बनाना भी।

Voice of Vineeta Dhiman

जब दहेज की कोई वैल्यू नहीं, तो इसे लेना बंद करें

बात छोटी है लेकिन सच, बहू के साथ लाए दहेज़ की कोई वैल्यू नहीं होती और कई जगह ससुराल की मिट्टी पर भी झूठा घमंड और लोक दिखावा किया जाता है।

टिप्पणी देखें ( 0 )
12 घरेलू उपाय हाथों की देखभाल के उन सुंदर और मुलायम हाथों के लिए

ये 12 घरेलू उपाय हाथों की देखभाल के लिए बहुत ही बढ़िया हैं और ये उपाय कर के आप अपने हाथों को सुंदर और मुलायम बना सकती हैं। 

टिप्पणी देखें ( 0 )
अब मुझे ‘छेड़े जाने’ का कोई डर नहीं है क्यूंकि मेरी शादी हो गयी है!

हम औरतें भी ना कैसी कैसी धारणा बना लेती हैं कि यदि हमारी शादी हो गई है, हमारी मांग में सिंदूर, माथे पर लगी बिंदी को देखकर कोई भी हमारा बुरा नहीं कर सकता।

टिप्पणी देखें ( 0 )
सवालों में सवाल है ‘बड़ी होती बेटी की शादी कब करोगे?’

ये बात इस समाज को अच्छे से गाँठ बंध लेनी चाहिए कि अपनी बेटी के हाथ कब पीले करने है यह निर्णय लेना, सिर्फ उसके परिवार वालों का ही काम है। 

टिप्पणी देखें ( 0 )
उतार फेंको तुम अब इस धूमिल आवरण को

अपने कदमों को पहचानो, अपनी गति को समझो, तोड़ डालो इन जंजीरों को, तुम एक नारी हो,अपनी पर आ जाओ तो, इस दुनिया पर भारी हो!

टिप्पणी देखें ( 0 )
मेरे मायके जाने पर पतिदेवजी बड़े खुश हुए थे, लेकिन फ़िर…

"क्या हुआ? आज आ गई मेरी याद आपको? इतने दिन बाद? और कैसे चल रही आप दोस्तों की पार्टीज, बहुत मज़े कर रहे हो हमारे बिना...."

टिप्पणी देखें ( 0 )
क्या मंगलसूत्र पति की रक्षा करता है?

क्या जो महिलाएं इतना सज-धज के रहती हैं, उनके साथ हमेशा अच्छा ही होता है? या फिर ये भी हमारे द्वारा बनाए गए नियमों का हिस्सा है?

टिप्पणी देखें ( 1 )
सबकी जोड़ियां बनाना हमारा काम नहीं है…

क्या अजीब जोड़ी है लड़की कितनी सुंदर है, नैन नक्श भी अच्छे हैं और लड़की की हाइट भी माशा अल्लाह काफी अच्छी है, लेकिन इसने क्या देखा इस लड़के में?

टिप्पणी देखें ( 0 )
बच्चों का व्यक्तित्व संवारें : यूँ ही अपने बच्चों का बच्चपन ना छीनें!

घर के बच्चों को जितना डांट कर रखा जाता है, वो बच्चे उतने ही दब्बू, संकोची, और कभी-कभी गुस्सैल भी हो जाते हैं, आप एक मार्गदर्शक की तरह उनको देखें। 

टिप्पणी देखें ( 0 )
शादी हर समस्या का समाधान नहीं है…

मेरी गुज़ारिश है आपसे, अपने ग़ैर ज़िम्मेदार लड़के की शादी करके उसकी ज़िम्मेदारी अपनी बहु पर ना डालें। ऐसा करके आप एक और परिवार की तबाही के लिए ज़िम्मेदार होंगे।  

टिप्पणी देखें ( 0 )
इस बार मकर संक्रांति जाते-जाते मेरी कुछ यादें ताज़ा कर गयी…

वह दिन मैं आज भी नहीं भूलती...किस तरह से इस दिन भगवान ने मेरी सूनी गोद में एक सुंदर सी परी को दिया था और मुझे माँ बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। 

टिप्पणी देखें ( 0 )
परीक्षा की तैयारी के कुछ उपयोगी टिप्स जो आपके बच्चों के काम आएंगे

परीक्षा की तैयारी के ये टिप्स आप भी अपने बच्चों को बताएं ताकि आपके बच्चें भी अपनी परीक्षा में सफल हो सकें और आपको भी कोई परेशानी ना हो। 

टिप्पणी देखें ( 0 )
अब लोक-दिखावे के लिए काहे का स्टाइलिश होना

बच्चों के सामने लड़ाई-झगड़ा करने से, उनके बारे में बुरे, गलत तरीके से बोलने से बनती बात भी बिगड़ सकती है और इसका असर पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है।

टिप्पणी देखें ( 0 )
माता-पिता होने के नाते अपने बच्चों का सहारा बनें दुश्मन नहीं

कल मेरी एक सहेली रिया मुझसे मिलने आई। बहुत उदास थी। पूछा तो उसने जो मुझे जो कहानी बताई, वह मैं आप सबको बयान करती हूँ। सच में ऐसा भी होता है?

टिप्पणी देखें ( 0 )
‘हाय, कोई तो मेरी मदद कर दो!’ क्या ये पुकार आपकी भी है?

क्या विभा की तरह आपके घर के काम भी ख़त्म नहीं होते? विभा की दीदी ने ज़िंदगी आसान बनाने के लिए कुछ बढ़िया टिप्स उसको बताये और ये टिप्स आपकी भी मदद कर सकते हैं! 

टिप्पणी देखें ( 0 )
यदि हम ज़िंदगी में आये बदलाव को स्वीकार कर लें तो ज़िंदगी गुलज़ार है!

अब हमारी बातें भी सिर्फ बच्चों की होती हैं और गानों की जगह, अब लोरियां आ गई हैं जिसको सुनते-सुनाते कभी-कभी तो हम दोनों ही अपने बच्चों से पहले सो जाते हैं!

टिप्पणी देखें ( 0 )
जब मेरी सहेली ने माँ बनने के लिए मुझे एक नया तरीका सुझाया!

ये तो वरदान है, और तो और आप बिना शादी किए भी इस तकनीक से बाल सुख ले सकते हो। आजकल तो कितने ही बॉलीवुड स्टार्स भी इसकी मदद से माँ-बाप बन रहें हैं। 

टिप्पणी देखें ( 0 )
क्यों लड़कों की अपने ससुराल के प्रति कोई ज़िम्मेदारी नहीं होती?

हमारे समाज में लड़की वालों को कब तक लड़के वालों द्वारा बनाये गए मापदंडों पर खरा उतरना पड़ेगा? क्या शादी का मतलब है लड़की के घर वालों से लड़की का रिश्ता ख़त्म?

टिप्पणी देखें ( 0 )
बड़ों का तो पता नहीं, पर बच्चे अपनी गलतियों से ज़रूर सीखते हैं!

अरे, एक बार गलती से इसने गर्म पानी को छू लिया था। तब तो यह सिर्फ 2 साल का ही था। तब से आज तक इसने कभी भी किसी गर्म बर्तन को नहीं छुआ।

टिप्पणी देखें ( 0 )
हम तो जज करेंगे क्यूंकि जजमेंटल हैं हम!

हम लोग किसी को ना जानते हुए, पहचाने बिना, बाहरी स्थिति को देखकर, दूसरे के प्रति एक धारणा बना लेते हैं, दूसरों को जज करने की आदत हो गयी है हमारी।    

टिप्पणी देखें ( 0 )
क्या चुप रह कर सब कुछ सहने की ज़िम्मेदारी सिर्फ आपकी बहु की है?

हम अपने रिश्तों को बनाए रखने के लिए चुप रहना पसंद करते हैं, खासकर कि हम बहुएं। हमें अपने और अपने परिवार, दोनों के बारे में सोचकर ही कदम उठाना पड़ता है।

टिप्पणी देखें ( 0 )
अपनी सास को खुश करूँ कि अपने पति को, आखिर कब तक ये सवाल मेरे सामने घूमता रहेगा?

आपके साथ भी ऐसा होता है क्या, पति और सास दोनों को खुश करने के चक्कर में हम महिलाओं की आज़ादी हम से छीन ली जाती है और यह हमारे साथ कब तक होगा? 

टिप्पणी देखें ( 0 )
क्या आपके बचपन में भी कोई ऐसा व्यक्ति था जो अब भी आपको याद आता हो?

हम सब उन्हें टॉफी वाली नानी कहकर बुलाते थे। वो रोज़ आतीं, अपनी छोटी सी लाठी के सहारे, झुकी हुई कमर, लेकिन उनके चेहरे की चमक आज भी याद है।

टिप्पणी देखें ( 0 )
अरे अभी तो शादी हुई है और अभी से ये सब सवाल, आख़िर क्यों?

शादी के बाद सबका यही सवाल रहता है, 'अरे! खुशखबरी कब दे रहे हो?' घर की औरतें, खासकर सास तो हमेशा ही बहू पर अपनी पैनी नज़र रखती हैं। 

टिप्पणी देखें ( 0 )
बहू तुम अहोई अष्टमी का व्रत मत करना

वो भी एक माँ हैं, लेकिन सिर्फ बेटों की। तभी उन्हें ये पता कि एक माँ की कोख बेटा बेटी में कोई फर्क नहीं करती। क्या बेटे को पैदा करने में ज़्यादा कष्ट होता है?

टिप्पणी देखें ( 0 )
क्यों बच्चों को बिगाड़ने में हमेशा माँ का हाथ होता है, पिता का नहीं?

आज भी बच्चों की परवरिश में माँ का योगदान ज़्यादा रहता है। बच्चों को बिगाड़ने और सँवारने में जितना माँ का योगदान है, उतना ही पिता का भी फ़र्ज़ होना चाहिये।

टिप्पणी देखें ( 0 )
हे भगवान् मदद कर दो! सब सही करना!

इतना सुनते ही मैंने अपने बेटे को गोद में उठाया और निकल पड़ी हॉस्पिटल की तरफ। पूरे रास्ते भगवान् से दुआ माँगती रही, हे भगवान् सब सही करना।

टिप्पणी देखें ( 0 )
माँ बन कर जाना, मेरी दुनिया मेरे बच्चे

उस समय मानो सब कुछ मिल गया, खुशी के दो आंसू निकल पड़े। समय निकलता गया। मेरे बच्चे के साथ मेरा रिश्ता भी बनता रहा।

टिप्पणी देखें ( 0 )
आपको बीमार होने का हक नहीं है

अब सच्चाई यह है कि आप शादी के बाद बीमार नहीं हो सकतीं। आपको बीमार होने का हक ही नहीं है, क्यूंकि आप तो बहू हैं।

टिप्पणी देखें ( 0 )

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

क्या आपको भी चाय पसंद है ?