Vandana Namdev

Voice of Vandana Namdev

सोलह श्रृंगार करने के लिए तैयार हैं आप?

श्रृंगार को जहां कुछ लोग सौभाग्य वर्धक समझते हैं, वहीं कुछ लोग इसे सौंदर्य वर्धक भी मानते है और इतिहास इसे खुशियों का प्रतीक भी मानता है। 

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क्यूं बेवजह, बेहिसाब इल्ज़ाम सहती हो? नारी क्यूं तुम ऐसा करती हो?

अपना सब कुछ छोड़ने के बावजूद उसे दो मीठे बोल भी नहीं मिल पाते, अपने सपनों, अपनी सब इच्छाओं को खुशी-खुशी त्यागने के लिये वह तैयार हो जाती है। आखिर क्यूँ?

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हिंदी मेरी मातृभाषा – मेरी शान, मेरी आन

बोलने में हिंदी होता है ख़ुद पे गर्व, सीखने में हिंदी करती हूं फक्र। हिंदी मेरी है संस्कृति, हिंदी मेरी है विरासत। हिंदी है मेरी आन, हिंदी है मेरी शान।

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शिक्षक के पर्याय-बुरे समय से जो हमें उबारे, अच्छे शिक्षक कहलाते हैं वो

मुश्किल राहें होती हैं पर नामुमकिन कुछ भी नहीं होता, सब कुछ न कुछ सिखलाते हैं, बुरे समय से जो हमें उबारे, अच्छे शिक्षक कहलाते हैं वो।

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