Smita Saksena

Smita Saksena writes Stories, Poetries, Articles on Social Issues and Parenting , Quotes etc. for various Websites and Newspaper. She is very active for the hindi blogs too on various websites. She has her own Page 'bolte alfaz' (बोलते अल्फाज़). She:s got Most Loved Blogger of 2018 award and Blogger of the Month Award in January 2019, also for poetry she got certificate and for her Hindi writings she got Hindi Lekhak Samman Patra. Recently in February 2019 her two e-books got published too.

Voice of Smita Saksena

हाँ, मैं माँ भी हूँ और स्त्री का एक पूरा अस्तित्व भी

अब हदें तोड़ने का जी करता है, मन की घुटन से बाहर निकल, दूसरों के बताए नहीं, ख़ुद के लिए, नये रास्ते ढूँढने का मन करता है। 

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खुश रहना हमारे खुद के ही हाथ है

अब हम छोटी लड़कियों जितने अल्हड़ तो नहीं रह गए हैं, पर इतने उम्रदराज़ भी नहीं हुए हैं कि ज़िन्दगी से बेज़ार हो जाएँ।

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क्यों स्त्रियों को एक समूचे अस्तित्व के तौर पर स्वीकारना इतना मुश्किल है

सम्मान दें और सम्मान पाएं, क्यूंकि मर्यादा का पालन सबको करना चाहिए, सिर्फ बहुओं या औरतों को ही नहीं। मर्यादा से ही समाज चलता है, ये न भूलें।

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ससुराल ऐसा भी होता है-पूर्वाग्रह ना पालें

नव्या दुल्हन के जोड़े में सजी माँ की बातें सुन रही थी-"ससुराल में जल्दी उठना, बड़ों से बहस ना करना, उल्टे जवाब मत देना, सभी कामों को अच्छी तरह करना।"

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कुछ कहना था मुझे आज तुमसे

"नहीं समझ पाओगे ये तुम, जानती हूँ मैं ये बात भी, टूटे धागे टूटकर जुड़े हैं कभी, ना हुआ, ना होगा कभी", फिर भी एक आस है, तुम्हारा इंतज़ार है। 

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यादें बचपन की

'क्यों नहीं लौटता मेरा बचपन, वही बेफिकर जीने का तरीका'- कभी न कभी हम सबने अपने बचपन को इसी तरह याद किया है, इसी तरह पुकारा है।    

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