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Sherry

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बिग बॉस 13 के सिद्धार्थ शुक्ला की जीत पर मैं खुश नहीं हूँ! और आप?

बिग बॉस 13 के सिद्धार्थ शुक्ला की जीत को देख कर लगता है कि लोगों ने एक बार फिर चेहरे को चुनते हुए कुछ अहम मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया है। 

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तलाश में खुद की – ‘दिल में बेचैनियाँ लेकर चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम!’

तलाश कभी खत्म नहीं होती। कम से कम मेरी तलाश इतनी उम्र बीत जाने के बाद भी वहीं पर है जहां से शुरू की थी, लेकिन ये तलाश ही तो है जो हमें ज़िंदा रखती है।

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डायरी का एक पन्ना-ज़िन्दगी, मुझे इंतज़ार है तुम्हारा

ज़िन्दगी तेरे उन लम्हों के नाम, जो इम्तिहान लेते हैं-"ज़िन्दगी जब भी मिलना, पूरी तैयारी से मिलना क्योंकि इम्तिहान इस बार तुम दोगी। जवाब इस बार तुम दोगी।"

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ख्वाबों के सिमटते रंग

तेरे चांद की चांदनी में ऐ आसमान, मेरी जिल्द की परतें अब सुलगती हैं - चांदनी हो या चाहत, वक़्त के साथ सबके मायने ज़िन्दगी अनुसार बदल जाते हैं।

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दृष्टिकोण – कुछ है या कुछ भी नहीं है

ना से बाहर आकर देखिए, ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है,  ये दुनिया बहुत खूबसूरत है - "हर रोज़ गिरकर भी मुकम्मल खड़े हैं, ऐ ज़िन्दगी देख मेरे हौसले तुझसे भी बड़े हैं।" 

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करवा चौथ – एक परंपरा जिसमें बदलाव की सख्त ज़रुरत है आज

करवा चौथ का त्यौहार मनाना ही है तो इसकी ज़िम्मेदारी सिर्फ महिलाओं पर ही क्यों? जब खानपान, रहन-सहन, रिश्ते नाते, सब बदल गया है, तो ये चीजें क्यों नहीं बदली? 

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