saroj maheshwari

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तब के रावण को राम ने मारा पर कलियुग के रावण को कौन मारेगा?

पर नारी पर कुदृष्टि का अंजाम बताती यह रामायण हमें आज भी, दानवों की अपावन नज़रों से क्यों त्रसित है सबला आज भी, कैकई रूप में जीवित क्यों विमाता है आज भी?

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इस नवरात्री दुर्गा का सिर्फ स्मरण काफी नहीं, ज़रुरत है उसके सशक्तिकरण की

कन्या विहीन धरा को तुम कैसे पुष्पित कर पाओगे?फिर कन्याओं का भोग तुम कैसे लगा पाओगे?जब तक असुरक्षित कन्या और नारी हैंतब तक चंद्रघंटा पूजा अधूरी हमारी है

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अब फूलों सी नाज़ुक नहीं हैं ये बेटियाँ

तीन तलाक का दर्द न सहेंगी अब ये बेटियाँ, दहेज रूपी दैत्य को भी मसल फेंकेंगी अब ये बेटियाँ, अब फूलों सी नाज़ुक नहीं हैं ये बेटियाँ। 

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नर तू जीवनदात्री बिन पूर्ण नहीं

सम्मान करो उसकावह तो जीवनदात्री हैउड़ने दो उन्मुक्त गगन में उसकोजिसकी वह अधिकारी हैनारी बिन नर का अस्तित्व नहींनर! नारी बिन कभी पूर्ण नहीं

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नारी! है शक्ति की अवतारी अब तू

चल उठ अपनी रक्षक बन, ले ले कवच ढाल हाथों में अब तू, ना कृष्ण कोई तुझे बचाने आएगा अबबन काली दिखा दे अब तू

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