Sarita Nirjhra

Co-Founder KalaManthan "An Art Platform" An Equalist. Proud woman. Love to dwell upon the layers within one statement. Poetess || Writer || Entrepreneur

Voice of Sarita Nirjhra

मैं चाहूँ या ना चाहूँ अक्सर कुछ न कुछ छूट जाता है

औरतों से हर मुकाम पर खरा उतरने की उम्मीद सब रखते हैं, पर इन सब उम्मीदों का ख्याल रखते रखते क्या हम अपनी उम्मीदों का ख्याल रख पाते हैं?

टिप्पणी देखें ( 0 )
नाराज़ हूँ, दुःखी हूँ क्यूंकि मैं शर्मसार हूँ बेटियों के पैदा होने पर

आज सुबह हुई इस खबर से कि उन्नाव की पीड़िता इस दुनिया से चली गयी और जाते-जाते कह गयी, "मैं जीना चाहती हूँ और उन दरिंदो को फांसी से लटकते देखना चाहती हूँ।"

टिप्पणी देखें ( 0 )
‘भारत माता की जय’ बोलने वालो, भारत माता की बेटियों को लूटना छोड़ो!

मंदिर, मस्जिद या राज्य की ज़मीन के लिए रातों रात कानून बना सकते हैं, लेकिन बेटी की अस्मत को यूँ ज़ार-ज़ार करने वाले हाथों को काट नहीं सकते!

टिप्पणी देखें ( 0 )
घरेलु हिंसा – रिश्ते की ऊँच-नीच, एक ढका-छुपा सच

घरेलु हिंसा एक सच है, और आश्चर्य यह कि हिंसा करने वाला दोषी तक नहीं समझा जाता और सहने वाला शर्मिंदगी में घुलता चला जाता है। 

टिप्पणी देखें ( 0 )
लोग क्या कहेंगे? सलीके से रहो!

ये सलीका सीखाने का अचूक अस्त्र था, "चार लोग क्या कहेंगे!" वैसे, ये चार एक साथ कभी सामने नहीं आए, किन्तु लाखों लड़कियों की जीवन दशा इनकी वजह से खराब थी।

टिप्पणी देखें ( 0 )
वो कुछ नहीं करती बस हॉउस वाइफ है

कई बार ज़िक्र हुआ, कई बार बहस हुई, ढेरों लेख लिखे गए, लेकिन हर घर में कभी ना कभी ये ज़रूर सुनाई दिया है, "ये कुछ नहीं करती!"

टिप्पणी देखें ( 0 )

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

क्या आपको भी चाय पसंद है ?