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Sara pawaskar

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चुप थी तब, चुप हूँ आज-पर, लड़की हूँ बोझ नहीं

मैं चुप थी तब, मैं चुप हूँ आज-काश न होती, और बोल पड़ती, मेरे हक़ की बात-"लड़की हूँ, बोझ नहीं, इंसान हूँ, कठपुतली नहीं।"  

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