Rashmi Choukse

लघु कथा ,कविताएं व सामाजिक मुद्दों पर लेख लिखने का शौक, समाचार पत्र व पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई रचनाएं, महिला संघ की पत्रिकाओं मेंं संपादिका का कार्यभार संभाला,अनेक नाटकों का संपादन व निर्देशन किया, कुशल मंच संचालिका व गायन में विशेष रुचि

Voice of Rashmi Choukse

जिंदगी का फलसफ़ा

यदि पता होता कि बड़े होकर ये सब झेलना पड़ेगा तो हम बड़े होते ही क्यों? पर अब जब बड़े हो ही गए हैं तो क्यों न ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा कुछ यूं समझ लें

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आधुनिक नारी की एक परिभाषा हूँ मैं!

आइये कहें, 'आधुनिक नारी हूँ मैं! मैं द्रौपदी नहीं कि पति की दुर्बलता पर चीर हरण का शिकार बनूँ, मैं मजबूर माँ नहीं कि कन्या के जन्म पर सिर झुकाऊँ​!'

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