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Mukta Tripathi

Voice of Mukta Tripathi

क्या आप जानते हैं भारत में एक शादीशुदा महिला के अधिकार क्या हैं?

यदि आप जानना चाहते हैं कि एक शादीशुदा महिला के अधिकार क्या हैं, तो यहाँ आपके महत्वपूर्ण अधिकारों की पूरी जानकारी देने की कोशिश की गई है!

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माँ की मज़दूरी…

भरी दोपहरी तपती गर्मी में पसीना बहाती, कोमल तो है कमजोर नहीं, यही याद दिलाती, फिर कुछ सोच पत्थर दिल के लिए आँसू बहाती!

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माँ जब तुमने मुझे छुआ था!

तेरे अश्रुओं में खुशी की धमक, इधर भी यही तो था हाल मेरा, मेरे रोने में हंसी की थी खनक। तब निडर मेरा मन हुआ था, माँ जब तुमने मुझे छुआ था!

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इन 10 करियर ऑप्शंस के साथ अब घर बैठे-बैठे बन रही हैं आत्मनिर्भर हम घरेलु औरतें

अपने गुण, योग्यता या इच्छानुसार, निम्नलिखित में से किसी एक का उचित चुनाव कर, हम औरतें, घर में बैठे-बैठे आर्थिक रूप से अवश्य आत्मनिर्भर बन सकती हैं!

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मर्द तो मर्द! कई औरतें भी देती हैं माँ-बहन की गालियाँ…क्यों?

मर्द टैग से संबंधित क्रियाओं में से, दूसरे को माँ-बहन की गालियाँ निकाल कर, क्या आप ये दर्शाने की कोशिश करती हैं कि देखो! हम भी मर्दों से कम नहीं?

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मर्द के दिल की, मैं बात सुनाऊं जो…औरत हो ऐसी कि…

ये नहीं कहूँगी कि ये बात सब पर लागू होती है - बंद कमरे में, तकिए सी लगें जो, और उफ़ भी न करें जो, अक्सर मर्दों को ऐसी औरतें, बहुत हसीन लगती हैं।

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बात बेटी और परिवार की इज़्ज़त बचाने की आये तो ऑनर किलिंग ही सही?

अंतर्मन के द्वंद्व में उसी समय पिता ने भीष्म प्रतिज्ञा कर ली कि बेटी को बेटे की तरह पालेगा और इज्जत पर आँच न आने देगा, तो ज़रुरत पड़ने पर ऑनर किलिंग ही सही!

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अकेली, पगली, क्या रटने लगी है? माँ अब बूढ़ी लगने लगी है…

माँ के जगने से, जगता था, घर-आँगन, धूल भी छूकर उसे, बन जाती थी, पावन, पर, अब वो माँ, निस्तेज सी जगने लगी है, माँ! अब बूढ़ी लगने लगी है...

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गरिमा अरोड़ा : अंतरराष्ट्रीय मिशेलिन सम्मान से सम्मानित, थाई पाक कला विशेषज्ञ

गरिमा अरोड़ा जी कहता हैं, "हम औरतों की सामाजिक कर्मभूमि को ही आर्थिक कर्मभूमि बना देना चाहिए ताकि उनको चुनाव की समस्या न हो!"

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रक्षाबंधन का त्यौहार : जैसे कि राखी ना हो गई, जीवन बीमा की पॉलिसी हो गई!

क्या ऐसा समझा जाए कि आज रक्षाबंधन का मतलब अपना स्वार्थ है? क्या हम केवल अपने फायदे के लिए ये रक्षा सूत्र बांधती हैं, कि भाई को राखी का फ़र्ज़ निभाना ही होगा? 

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क्यों रह जाती हैं अक्सर गरीब, अमीर परिवारों की बहू और बेटियाँ?

इनमें से कई महिलाओं की सफल कहानी, सफल पत्नी, सफल माँ, तक ही सीमित रह जाती है, क्योंकि उनकी योग्यता को ग्रहण लग जाता है, अमीर पिता, पति या पुत्र का?

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घरेलू हिंसा अधिनियम क्या है और हमें इसके बारे में क्यों पता होना चाहिए?

घरेलू हिंसा अधिनियम क्या है और आज हमें इसके बारे में क्यों पता होना चाहिए और कितना कारगर है महिला सरंक्षण अधिनियम 2005, कुछ ऐसे प्रश्नों के जवाब आपके लिए। 

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मनमानी आप करो तो ठीक…मैं करूँ तो बेइमानी?

औरतें नाक-मुँह बंद किए निर्जीव पड़ी रहें तो सुशील! और अगर कहीं सब ठीक करने के लिए आगे बढ़ कर कमान संभाल लें तो मनमानी? विरोध?

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ट्रांसजेंडर्स अब अर्द्ध सैनिक बल संबंधी उच्च पदों पर आवेदन कर सकेंगे

लोकतंत्र है, तो कुछ लोग इस फैसले के विरोध में भी अवश्य होंगे! और दुःख की बात है कि ऐसे लोग बड़ी आसानी से मिल गए, इसी ट्विटर पोस्ट के कमेंट बॉक्स में!

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‘नारीवादी प्रयोग’ का एक नया ही मतलब आज मुझे समझाया जा रहा था…

देखो असली नारीवादी प्रयोग यही है, हर चीज़ चाहे छोटी हो या बड़ी, मर्द की हो या औरतों की, पर विज्ञापन में बस लड़कियाँ क्यों खड़ी की जाती हैं? बताओ! बताओ!

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‘पति का गिफ्ट’ हमेशा एक ही रहा है – आज भी यही ट्रेडिंग है!

सचमुच ये पति का गिफ्ट एक चारदीवारी को घर तथा दूसरी चारदीवारी को कारागार बना देती है और यह सब किस पर आधारित है? बस एक स्पर्श पर!

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शादी डॉट कॉम ने रंग के फ़िल्टर हटा दिए तो क्या, लड़की तो हम गोरी…

हाल ही में शादी डॉट कॉम ने एक क्रांतिकारी फैसला लिया कि अब उनकी वेबसाईट पर स्किन शेड कार्ड के आधार पर लड़की की प्रस्तुति नहीं होगी। 

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इतनी औरतों का स्कूल टीचर बन जाना सिर्फ एक इत्तिफ़ाक़ या कुछ और?

समाज में एक व्यवसाय के रूप में जब अध्यापन कार्य को जब देखा जाता है तो लिंग भेद करते हुए स्कूल टीचर की नौकरी किसके लिए श्रेष्ठ मानी जाती है?

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पुराने आदर्शवादी परिवारों में पिसते हमारे माता-पिता के जीवन का कड़वा सत्य

अगर आप आज भी अपनी असफलता का ठीकरा अपने माता-पिता पर ही फोड़ कर फिर अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं तो आपसे कोई भी उम्मीद रखना बेकार है।  

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हमारे जैसे ‘सामान्य लोग’ असमान्य व्यवहार करते हैं और कहते हैं, कि ‘वो’ सामान्य नहीं?

इस लेख में मैंने छोटे-छोटे कस्बों और शहरों में केवल LGBTIQ कम्यूनिटी के T को पेश आती मुश्किलों के बारे में बात की है। बाकि आप 'सामान्य लोग' खुद सोचें...

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अगर माहीन ज़फर अपने हिस्से का आकाश बना सकती है तो फिर उड़ान का रिमोट समाज के पास क्यों?

माहीन ज़फर समाज को ललकार कर कह रही है कि अब ये रिमोट भी उन्हें ही दे दो, अगर वो अपनी जिदंगी को आकाश दे सकती है, तो उड़ान क्यों नहीं?

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औरतें दुखी होने के बावजूद भी शादी के रिश्ते को क्यों निभाना चाहती हैं?

अपने जीवन साथी को देख कर दिल यूँ धड़क जाता है और कहीं से आवाज़ आती है, "हाय! आ गए!" और हाथ-पैर फूलने शुरु! ऐसा ही हाल था अपना....

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मैं पास हूँ या फ़ेल? मेरे मन में ये ख़्याल बार-बार क्यों आता है?

जब नौकरी के आदेश, पति के तकाजे, बच्चों की इच्छाएं पूरी करने में 19-20 का फर्क रह जाता है ना, तो ये अंतर एक औरत, एक पत्नी, माँ के नाते बहुत भारी पड़ता है।

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मैं और तुम मिलकर…

मैं और तुम मिलकर एक साथ होकर आओ समाज में फैली अराजकता को समेटते हैं, आओ हम एक होकर प्रार्थनाओं के सहारे जीवन को सरस् बनाते हैं। 

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हिम्मत की रवानी : एक उमंग से भरी ज़िंदगी की शुरुआत कर ..

ज़िंदगी बहुत अच्छी है, ज़िंदगी में उतार चढ़ाव तो आते ही हैं और साथ के साथ अपनी सोच को सकरात्मक दिशा देनी की ज़रूरत होती है ताकि एक प्रफुल्लित जीवन जी सकें।

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बुद्धू दिल: कभी इधर तो कभी उधर, चंचल भी और सुकुमार भी…..

दिल का करें और दिल का क्या कसूर,यह बेचारा कहीं भी चला जाता है और कहीं  भी घूम कर आ जाता है। बुद्धू दिल , सच्ची में बुद्धू।

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डट जाओ आंधी के आगे ,सम्भलो मगर भागो नहीं !

देश में भ्र्ष्टाचार की आंधी में सबको डट कर सामना करना होगा , डर  कर नहीं, और न मुँह छुपकर, सम्भलो और देश को बदलने का विश्वास रखो। 

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घर भी कुछ कहता है

हर  घर कुछ कहता है' - घर का मानवीकरण कर एक  संदेश देती कविता। 

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नए नवेले पन्ने

"तेरी मेरी ज़िन्दगी की किताब में कुछ नए पन्ने जुड़ने लगे" - एक प्रेम भरी लघु कविता 

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Women In Corporate Allies 2020

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