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Ashlesha Thakur

Ashlesha Thakur started her foray into the world of media at the age of 7 as a child artist on All India Radio. After finishing her education she joined a Television News channel as a Content Writer, Anchor and Show Producer where she worked for 4 years. She decided to take a break from professional work when she had her child. She now lives happily with her family and has decided to re-enter the professional field.

Voice of Ashlesha Thakur

महिलाओं में थायराइड के इन 11 लक्षण को पहचानने में देर न करें!

उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में ये समस्या आम है, इसीलिए समय रहते महिलाओं में थायराइड के लक्षण पहचानें और डॉक्टर से सम्पर्क करें।

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काश मेरे पति का असली चेहरा आप भी देख पाते…

क्या प्रिया भाभी को गालियां देने वाले और पीटने वाले ये वही अमन भाई साहब हैं जिनके शराफत के किस्से बाहर की औरतें सुनाती हैं?

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जहां बात पैसे की आती है, बहू पराये घर की हो जाती है…

शादी के साल गिने जाते हैं, पैसे या जायदाद में हक़ देने से पहले। जहां बात पैसे की आती है, तो बहू पराये घर की हो जाती हैं। आख़िर क्यों?

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कमाने वाला पति भी अपनी पत्नी पर निर्भर होता है, तो डिपेंडेंट कौन…

"अपने चारों तरफ देखो हर औरत, चाहे वो हाउस वाइफ हो या ऑफिस जाने वाली, अपना घर संभालती है। समझ नहीं आता कि तुम्हें इतनी शिकायत क्यों है!"

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एक सलाम : प्रकृति और दीक्षा हैं आईटीबीपी की पहली डायरेक्ट कॉम्बैट महिला अफसर

प्रकृति और दीक्षा हैं आईटीबीपी ( भारत तिब्बत सीमा पुलिस) की पहली डायरेक्ट कॉम्बैट महिला अफसर, हमने उनसे जानने की कोशिश की ये कैसे संभव हुआ!

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स्वतंत्रता की लड़ाई में भारतीय महिलाओं का योगदान अविस्मरणीय

महिलाओं ने सहिष्णुता और वीरता से अपनी भूमिका निभाई, जिसके कारण स्वतंत्रता की लड़ाई में भारतीय महिलाओं का योगदान अविस्मरणीय है।

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वजाइनल लुब्रिकेंट से करें दोस्ती अपनी सेक्स लाइफ स्मूथ बनाने के लिए

वजाइनल लुब्रिकेंट के इस्तेमाल से वजाइना में सूखेपन के कारण सेक्स करते हुए हो रही परेशानी जैसे जलन, दर्द इत्यादि पर काबू पाया जा सकता है।

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डॉ क्यूटरस ने दिया तरुण तहिलियानी की “माफ़ी” का करारा जवाब

डॉ. क्यूटरस का डिज़ाइनर तरुण तहिलियानी के स्टोर में उनके साथ हुए भेदभाव को उजागर करना उद्देश था, ना कि किसी बड़े ब्रांड को नीचा दिखाना।

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घरेलू हिंसा क्या है और क्यों इसकी जड़ें हर वर्ग की महिलाओं को जकड़े हैं?

आज यो-यो हनी सिंह तो कल कोई और, क्यों पढ़े-लिखे वर्गों में घरेलू हिंसा तेज़ी से बढ़ रही है? घरेलू हिंसा क्या है, क्या ये सिर्फ मार-पीट है?

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मर्दानगी के जूनून को ‘प्यार’ कहना बंद करें…

मर्दानगी के नाम पर कुछ मर्द कुछ भी कर सकते हैं और हैरानी की बात है कि इन मर्दों की 'मर्दानगी' ज़्यादातर औरतों के इर्दगिर्द ही नज़र आती है।

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क्यों बड़े डिज़ाइनर्ज़ कतराते हैं सामान्य शरीर वाली महिलाओं से?

इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर डॉ तन्या कहती हैं, "मैं शादी से पहले डाइटिंग क्यों नहीं कर रही ये सवाल मेरे परिवार और दोस्तों द्वारा पूछा गया।"

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मैंने अपने लिए दोस्ती का रिश्ता चुना है…

उसने सोचा, "बाक़ी रिश्तों की तरह मैं दोस्ती का ये रिश्ता भी सहेज कर रखूंगी। यही तो एक ऐसा रिश्ता है, जिसे मैंने अपने लिए खुद चुना है।’’

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शेफ़ाली शाह की “हैप्पी बर्थडे मम्मीजी” हर महिला की कहानी

फिल्म हैप्पी बर्थडे मम्मीजी में “आदर्श नारी” का चोला उतार शेफ़ाली शाह, अपनी पसंद के कपड़े, संगीत, खाना और तो और कंचे खेलती दिखीं...

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आईरा खान को माँ रीना दत्ता का दिया उपहार, हर बेटी के लिए ज़रूरी

रीना दत्ता की अपनी बेटी आईरा खान के लिए ये पहल सराहनीय है। माता-पिता का यह दायित्व होता है कि वह अपने बच्चों को सही शिक्षा दें।

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क्यों जींस पहनने के कारण अपनी ही बेटी की जान ली परिवारवालों ने?

उत्तर प्रदेश की नेहा ने परिवार की तानाशाही मानने से इंकार कर जीन्स पहन कर बाहर जाना चाहा तो परिवारवालों ने उसकी हत्या कर दी।

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एक महिला की जीत को दूसरी महिला की हार मानता ये समाज

क्यों मनिका बत्रा और मीराबाई चानू का टोक्यो ओलंपिक्स में बेहतरीन प्रदर्शन करना काफ़ी नहीं है? सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय कुछ और ही है...

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राज कुंद्रा केस में शिल्पा शेट्टी को क्यों ट्रोल किया जा रहा है?

शिल्पा शेट्टी के खर्चे के कारण राज कुंद्रा इस दलदल में धसते चले गए? क्या सच में लोगों को लगता है कि शिल्पा अपना खर्च नहीं उठा सकतीं?

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क्या सोने की चमक बेटियों के खुशहाल भविष्य की गारंटी है?

बहु के लाए हुए गहनों और कपड़ों की नुमाइश की जाती है। क्या कभी ऐसा किसी ने सुना है कि सास-ननद ने घर की नयी बहू को अपने गहने दिखाए हों?

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महिलाओं के बढ़ते कदमों को देख डरते समाज के ठेकेदार…

अक्सर स्वाभिमानी स्वतंत्र महिलाओं को समाज के लिए विस्फ़ोटक बता, उनके लिए परस्पर षड़यंत्र रचने में लगे रहते हैं ये समाज के ठेकेदार।

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क्या आप भी फिल्म हसीन दिलरुबा देखने के बाद ये सोच रहे हैं?

तापसी पन्नू और विक्रांत मैसी की फिल्म हसीन दिलरुबा के अनुसार पत्नी की भूल पर पति का पत्नी को मारने का प्रयास गुस्सा मात्र हो सकता है...

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तलाक़ क्यों? मियाँ-बीवी में तो ये सब चलता है…

तलाक़ लेना या न लेना केवल पति-पत्नी का फैसला होना चाहिए। इसे किसी भी तीसरे पक्ष की सहमति या असहमति पर बिल्कुल निर्भर नहीं होने देना चाहिए।

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मैंने दहेज़ में कुछ नहीं माँगा…

मां ने बताया कि अमन के घर वालों ने ऑफिस के पास एक बड़ा फ्लैट देख कर रखा है, ताकि शादी के बाद नेहा और अमन को ऑफिस आने-जाने में सुविधा हो।

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