Anshu Saxena

मैं एक लेखिका एवं समाजसेवी हूँ । मैंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से रसायनशास्त्र में MSc किया है । मैंने कई वर्षों तक अध्यापन कार्य भी किया है। मुझे अपनी अनुभूतियों को कविताओं , कहानियों एवं लेखों के माध्यम से व्यक्त करना अत्यन्त प्रिय है । लेखन मुझे अात्मसंतुष्टि प्रदान करता है ।

Voice of Anshu Saxena

रेशम की डोर – क्या एक औरत को अपनी ज़िंदगी के फ़ैसले लेने का कोई हक़ नहीं?

माला सफ़ेद के अलावा दूसरे रंग भी पहनना चाहती, कभी कभी उसका मन छोटी सी बिंदी लगाने को करता, परन्तु समाज की बेड़ियाँ को तोड़ना मुश्किल लगता था।

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इस दिवाली आप भी किसी की ज़िंदगी में उम्मीद का दीपक जलाने का संकल्प लें!

इस दीवाली मैंने, सरला भाभी के निराशा भरे जीवन में उम्मीद की रोशनी जलाने का संकल्प कर लिया है और अब मेरी उद्विग्नता, मानसिक शांति में परिवर्तित हो चुकी है।

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क्या सिर्फ़ मेरा पहनावा मेरी आधुनिक सोच की निशानी है?

कहाँ तो केतकी सोच रही थी कि गुलाबी शिफ़ॉन की साड़ी में देख, रोहन उसे निहारता रह जायेगा और उसकी तारीफ़ों के पुल बाँध देगा परन्तु रोहन...

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सबको खुश रखने की ज़िम्मेदारी अगर बहु की है तो उसको खुश रखने की ज़िम्मेदारी आपकी है!

आज मेरा मन किचेन में जाने का नहीं है, रविवार को तो मेरी भी छुट्टी है, और एक दिन तो मुझे भी आपकी तरह पूरा आराम करने का हक़ है।

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मेरी हिंदी की गूँज विदेशी धरती तक – हिंदी मेरा अभिमान

हमारे जीवन में हमारी भाषा हिंदी का वही स्थान है जो ब्रम्हाण्ड में सूर्य का है, अर्थात हिंदी बोलने वालों की पूरी दुनिया हिंदी के इर्द-गिर्द ही घूमती है।

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जीने की राह – अतीत की काली परछाइयों से निकल और आगे बढ़

राघव ने कई बार सुम्मी से मिलने की कोशिश की, परन्तु सुम्मी के पास समय नहीं है। वह अतीत की काली परछाइयों से निकल, जीवन पथ पर बहुत आगे निकल चुकी थी।

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एक निर्णय ज़िंदगी की राह बदलने का

थोड़ी देर पहले ही उसने रोहित को किसी दूसरी महिला के साथ स्कूटर पर जाते देखा था। वह महिला रोहित के साथ ऐसे बैठी थी मानो वह उसकी पत्नी हो।

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जीवन की साँझ और एक अनजाना सा अक्स

अपना अक्स आइने में देख मैं अचानक चौंक पड़ी। अपना अनजाना सा अक्स आइने में देख मैंने एक निर्णय लिया और फिर अन्य कामों में संलग्न हो गई।

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बेड़ियाँ तोड़ मुझे मिला आगे बढ़ने का हौसला

आपने ही मुझे ग़लत बातों से लड़ने का पाठ पढ़ाया। आपने ही मुझे आगे बढ़ने का हौसला दिया। आपके ही कारण मैं अपने पाँव में जकड़ी बेड़ियाँ तोड़ पाई।

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आँखों ही आँखों में कटी, नहीं भूलती वो रात

"आप सभी लोग बिलकुल परेशान न हों। आप अपना सामान साथ लीजिये और हमारे घरों में चल कर आराम करें। भोजन भी हमारे साथ ही हो जायेगा।"

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