Aayushi Agrawal

Voice of Aayushi Agrawal

कब तक बस एक दूसरे में खोए रहेंगे जान, चलो आज थोड़ा हम भी फ़र्ज़ निभा आयें

मुझे सताना हो गया हो तो जान, उस लड़के को सबक सिखा आयें, छेड़ा था उसने कल जिस लड़की को, थोड़ा आराम उसे भी दे आयें। 

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घरेलू हिंसा : पितृसत्तात्मक समाज का प्रभाव? एक हिस्सा?

घरेलु हिंसा के ज़्यादातर मामले घर की चारदीवारी से बाहर नहीं आते। जब घरेलू मामले घरेलू बनकर अपना गला घोंट दें, तो कानून सिर्फ कानून बनकर रह जाते हैं। 

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