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अरे भाग्यवान! कैसा लगा ये सरप्राइज…

बुआ जी कम फिल्मी थीं? सविता जी का फोन आते उन्होंने जो फिल्मी अंदाज में एक्टिंग कर दिखावा किया कि वो सच में बीमार हैं।

बुआ जी कम फिल्मी थीं? सविता जी का फोन आते उन्होंने जो फिल्मी अंदाज में एक्टिंग कर दिखावा किया कि वो सच में बीमार हैं।

“पापा! ये रही आपकी शिमला की टिकट और बताओ आप, कुछ लिस्ट से छूट तो नहीं रहा?” विनय ने अपने पिता राजीव जी से पूछा।

“बस बेटा तुम और बहू इतना कर रहे मुझे और क्या चाहिए!”

“ऐसा क्यों बोल रहे हैं पापा? क्या हमारा कुछ कर्तव्य नहीं आप दोनों के लिए? और मीरा तो खुद एक-एक पल की तैयारियों में लगी है। आप बस आर्डर दें और हम हाज़िर…”

“जी पापा! विनय बिल्कुल सही बोल रहे हैं और हां चिंता मत करें, मां को अभी तक कुछ भी नहीं पता चला है। अच्छा! मैंने कुछ नंबर भी डायरी में लिख दिए हैं। जरूरत पड़े तो कुछ दोस्त भी हैं मेरे जो मदद कर देंगे।”

असल में राजीव जी और उनकी पत्नी सविता जी की शादी की सालगिरह नज़दीक थी। सो वो चाहते थे कि हमेशा से हमारे बारे में सोचने वाली पत्नी के लिए कुछ उसकी पसंद की जगह ले जाया जाए। जहां वो अपनी खुशियों को जोड़ सकें। शिमला कभी सविता जी गई नहीं थी और उनका मन था सो ये सरप्राइज प्लान हो रहा था।

दूसरे दिन सभी तैयारियां हो रहीं थीं ये कहकर कि बुआ जी की तबियत थोड़ी खराब है। सो सपरिवार चलना है और हां बुआ जी को फोन कर बताया गया था कि अगर सविता जी का फोन आए तो अच्छे से बीमारी का बहाना बनाएँ।

बुआ जी कम फिल्मी थीं? सविता जी का फोन आते उन्होंने जो फिल्मी अंदाज में एक्टिंग कर दिखावा किया कि वो सच में बीमार हैं।

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खैर! जाने के दिन ठीक पूरे प्लान के मुताबिक मीरा ने पेट दर्द का बहाना बना अपने और विनय को रोक लिया।

“मां! हम चलते पर मीरा की तबियत देख लग नहीं रहा उसे सफर कराना ठीक होगा। ऐसा करो आप और पापा चले जाओ और अगर मीरा को आराम मिला तो एक-दो दिन में हम भी आ जाएंगे।”

“ठीक है बेटा! मन तो मेरा भी नहीं कर रहा। पर उधर जीजी की तबियत भी ठीक नहीं और हां ज्यादा खराब लगे तो बता देना मैं आ जाऊंगी। बस तुम बहू का ध्यान रखना अच्छे से।”

इधर जब सविता जी एअरपोर्ट पहुंची तो उन्हें ताज्जुब हुआ।

“अरे! जीजी के घर के लिए जहाज से कब जाने लगे?”

“अरे भाग्यवान, तुम चलो तो! मुझ पर तो भरोसा है न?”

“भरोसा ना होता जी तो ४० साल ऐसे ना गुजारती!” हंसते हुए सविता जी बोलीं।

फ्लाइट में पहली बार बैठते सविता जी असहज थीं पर उन्हें अच्छा लग रहा था। आखिर एक सपना जहाज से सफर का भी तो था।

खैर! तय समय फ्लाइट से वो पहुंच गए। वहां पहुंचते ही सविता जी की आंखें फटी की फटी रह गईं। जब कार से वो होटल जाने लगे बाहर का नजारा देखने लायक था। बर्फ़ से ढके पेड़ और ऊंचे ऊंचे पहाड़ तो देखने लायक थे।

“ये…ये..हम कहां आ गए, विनय के पापा?”

“आप कहां आना चाहतीं थीं हमेशा से…बताइए?”

“क्या? शिमला…!”

“जी और हम आपकी पसंदीदा जगह पर हैं…आगे-आगे देखिए और सरप्राइज भी हैं!”

होटल पहुंच कर सभी स्टाफ ने जैसे ही सालगिरह की बधाई दी तो सविता जी की आंखों में आसूं आ गए।

“क्या ये सरप्राइज था आपका…?”

“जी! मैडम और हां देखिए वीडियो काल पर कौन-कौन हैं…!”

“अरे! विनय, बहू और जीजी… तुम?तुम तो बीमार थीं…? और मीरा तुम भी…”

सब हंसते हुए एक साथ बोले, “हैप्पी एनिवर्सरी कपल!”

“ये सब तो बहाने थे आपको सरप्राइज देने के। मां! आप हमेशा हमारी खुशियों में बस गुम हो गईं। जाइए और जी लीजिए अपनी खुशी।”

फिर तो बहू ने जो सामानों में शिफान की साड़ी रखी थी वो पहन कर सविता जी तो गजब ढा रही थीं। उन्होंने बालीवुड के हर गीत पर नाचकर मजे लिए। साथ ही राजीव जी और बाकी सबको इन खुशियों को जोड़ने के लिए दिल से धन्यवाद दिया। शायद इन सबसे उन्होंने बचपन को भी जी लिया।

इमेज सोर्स: The Honeymooners/ Ft. Rohan, Sanaya, Naresh, Kishori/Flick/ The Zoom Studios/YouTube 

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