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मुझे भी अपनी पत्नी की उम्र लंबी चाहिए…

तुम इस व्रत को इतना मानती हो! अगर ऐसा है तो केवल पत्नी को ही पति की लंबी आयु नहीं चाहिए बल्कि पति को भी तो अपनी पत्नी की लंबी आयु चाहिए।

तुम इस व्रत को इतना मानती हो! अगर ऐसा है तो केवल पत्नी को ही पति की लंबी आयु नहीं चाहिए बल्कि पति को भी तो अपनी पत्नी की लंबी आयु चाहिए।

पूरा दिन निर्जल व्रत रखके मैंने पूजा की पूरी तैयारी की, करवा को धो के, भर के रखा, थाली सजाई और बिस्तर पर कुछ देर आराम करने लेट गई।

जब शाम हुई तो मैंने अपनी अलमारी खोली। सबसे आगे हेंगर पे मेरी सिल्क की लाल और हरे बॉर्डर वाली साड़ी टंगी थी। मैंने उसे बाहर निकाला और ड्रेसिंग के आगे खड़ी हो गई। पूरी तरह सोलह सिंघार करके जब आईने को देखा तो मैं खुद ही शर्मा गई।

जब भी करवा चौथ नज़दीक आता है मुझे अपनी शादी और अपना पहला करवा चौथ जरुर याद आ जाता है। तो आज आपको अपने पहले करवा चौथ की कहानी बताती हूँ।

हमारी शादी बड़े ही नाटकीय अंदाज में हुई थी। मेरे पति, सहाय, पहले अमेरिका में रहते थे और उनके मामाजी वर्मा अंकल का घर मेरे ही घर के पास था।

तो मैं उस दिन की बात बता रही थी। उस दिन करवा चौथ था और मैं अपनी माँ के साथ छत पर खड़ी चाँद का इंतज़ार कर रही थी। चाँद निकला ही नहीं तो मैं छत पर इधर-उधर घूमने लगी। तभी मुझे लगा कोई मुझे देख एकटक रहा है। शायद हम औरतों की छठी इन्द्रिय कुछ ज्यादा ही तेज़ होती है। मैंने मुड़ कर देखा, तो मेरे पड़ोसी वर्मा अंकल की छत पर एक लंबा सा सांवले रंग का स्मार्ट सा लड़का खड़ा था और मुझे बार-बार देख रहा था।

तभी चाँद निकल आया और मैं माँ को बुलाने नीचे दौड़ गई। वो लड़का भी नीचे चला गया।

दो दिन बाद ही वर्मा अंकल के घर से उनके भांजे सहाय का रिश्ता मेरे लिए आया।

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शायद हम दोनों में ‘लव एट फर्स्ट साइट’ हुआ था, क्यूंकि सहाय की वो आंखें पता नहीं क्यों मुझे हमेशा याद आती रहती थीं।

खैर, मेरा बिलकुल भी शादी करने का दिल नहीं था पर पता नहीं उनको देखते ही मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगता। शादी से मैं मना न कर पाई। कुछ दिन में ही मेरी शादी सहाय से हो गई और मैं अमेरिका चली गई।

मेरा वैवाहिक जीवन सुखी गुज़र निकल रहा था तभी सहाय का इंडिया तबादला हो गया और हम वापस इंडिया आ गए।

करवा चौथ आने ही वाला था और सहाय मुझे शाम को मार्केट ले गए। मैं भी बहुत खुश थी आखिर मेरा पहला करवा चौथ था और बचपन से माँ को इस दिन को मनाते देखा था। उनको पिता के लिए व्रत रखते उनके लिए सजते, उनकी लंबी आयु की दुआ करते देखा था।

सहाय ने एक कपड़ों के शोरूम के आगे गाड़ी रोकी। हम दोनों ने अंदर जाकर साड़ी देखने शुरू की। मेरी नज़र लाल और हरे बॉर्डर वाली एक साड़ी पर रुक गई। सहाय की आदत है कि मेरी नज़रों को देख कर तुरंत समझ जाते हैं कि मैं क्या चाहती हूँ। मैंने देखा कि उन्होंने वो लाल साड़ी पैक भी करवा ली और खुद के लिए भी मिलते रंग का लाल कुरता भी लिया।

करवा चौथ वाले दिन मेरी तबियत कुछ सही नहीं थी, पर मैंने सोच रखा था कि पूरे दिन निर्जल व्रत ही रखूंगी। मेरी सास ने फोन करके कहा भी कि बेटा कुछ खा लेना और सहाय को भी समझाया।

सहाय उस दिन ऑफिस नहीं गये थे। 9 बजे वो कमरे में आए और मुझे डाइनिंग टेबल पर ले गए।  मेरे मना करने के बाद भी उन्होंने मुझे नाश्ता कराया और कहने लगे, “वैसे तो मैं व्रत वगैरा ज्यादा मानता नहीं हूँ पर तुम इस व्रत को इतना मानती हो तो तुम्हारे स्थान पर मैं यह फ़ास्ट रखूँगा। केवल पत्नी को ही पति की लंबी आयु नहीं चाहिए बल्कि पति को भी तो अपनी पत्नी की लंबी आयु चाहिए।”

सहाय ने पूरे दिन व्रत रखा और जब शाम हुई तो वही लाल हरे बॉर्डर वाली साड़ी निकाल कर ले आए और स्वयं ने भी लाल कुरता पहना। जब मैं लाल साड़ी को पहन कर आई तो सहाय मुझे देखते ही रह गए।

अपने पति का यह प्यार और समपर्ण देख कर मेरी आँखें भर आईं।

मेरा पहला करवा चौथ मेरे लिए हमेशा की एक सुनहरी याद दे गया और तब से जब भी करवा चौथ आता है मैं इस लाल हरे बॉर्डर वाली साड़ी निकालती हूँ और अपने पति के प्रेम को महसूस करने लगती हूँ।

और हाँ, तबसे सहाय हमेशा मेरे साथ करवा चौथ का फ़ास्ट रखते हैं और मेरी साड़ी के रंग का ही कुरता पहनते हैं।

इमेज सोर्स : Still from Short Film Karwa Chauth/Contentka Keeda, YouTube

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About the Author

shalini verma

I am Shalini Verma ,first of all My identity is that I am a strong woman ,by profession I am a teacher and by hobbies I am a fashion designer,blogger ,poetess and Writer . मैं सोचती बहुत हूँ , विचारों का एक बवंडर सा मेरे दिमाग में हर समय चलता है और जैसे बादल पूरे भर जाते हैं तो फिर बरस जाते हैं मेरे साथ भी बिलकुल वैसा ही होता है ।अपने विचारों को ,उस अंतर्द्वंद्व को अपनी लेखनी से काग़ज़ पर उकेरने लगती हूँ । समाज के हर दबे तबके के बारे में लिखना चाहती हूँ ,फिर वह चाहे सदियों से दबे कुचले कोई भी वर्ग हों मेरी लेखनी के माध्यम से विचारधारा में परिवर्तन लाना चाहती हूँ l दिखाई देते या अनदेखे भेदभाव हों ,महिलाओं के साथ होते अन्याय न कहीं मेरे मन में एक क्षुब्ध भाव भर देते हैं | read more...

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