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मैं आपके हाथ की कठपुतली नहीं…

"ये मत पहनो, वो मत पहनो... इससे बात मत करो... यहाँ मत जाओ... वहाँ मत जाओ... क्या है ये सब? ऐसा लगता है मैं आपकी पालतू चिड़िया हूँ..."

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“ये मत पहनो, वो मत पहनो… इससे बात मत करो… यहाँ मत जाओ… वहाँ मत जाओ… क्या है ये सब? ऐसा लगता है मैं आपकी पालतू चिड़िया हूँ…”

“ये मत पहनो, वो मत पहनो… इससे बात मत करो… यहाँ मत जाओ… वहाँ मत जाओ… क्या है ये सब? ऐसा लगता है मैं आपकी पालतू चिड़िया हूँ, जिसे आपने एक पिंजरे मे बंद कर रखा है!” नीलू गुस्से से बोली।

“अरे, पति हूँ तुम्हारा। इतना बोलने का हक़ मुझे होना ही चाहिए”, सुहास गुस्से में बोला।

ये हैं सुहास और नीलू, पति-पत्नी। इनकी शादी को 2 साल हुए हैं और अभी तक एक भी दिन ऐसा नहीं जाता जब दोनों के बीच किसी बात को लेकर बहस या झगड़ा नहीं होता हो।

नीलू ने आज तक सुहास द्वारा लगाई हुई रोक-टोक स्वीकार करी, पर अब उसको इन सब बंधनों मे घुटन लगने लगी है। उसको लगता है अगर उसने अभी खुलकर बात नहीं की तो वो हमेशा तनाव में ही रहेगी।

नीलू ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “नहीं, आप को टोकने का हक़ नहीं है, बल्कि समझाने का हक़ है और आप अपनी इच्छाएं मुझ पर थोप नहीं सकते। शादी का मतलब बराबरी की हिस्सेदारी होती है, जिसमें घर और बाहर के काम निहित हो सकते हैं, वो भी अगर पति और पत्नी दोनों की स्वीकृति हो तो। ऐसा नहीं कि आप मुझे बोलते जाओ और मैं कठपुतली की तरह मानती रहूँ। आप क्या चाहते हो मेरी अपनी कोई इच्छा ना हो, यहाँ तक अब आपसे ही पूछ कपड़े भी पहनूँ?”

आज नीलू कुछ भी सुनने की स्तिथि में नहीं थी। उसने तय किया था चाहे कुछ भी हो जाए वो अपनी रोज़ रोज़ की रोक टोक के लिये आवाज़ उठाएगी।

“बस अब और नहीं सहा जाता, एक दिन मैं आपके इस पंजरे को छोड़ चली जाऊँगी”, नीलू ने कहा।

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कुछ क्षण सोचने के बाद सुहास को अपनी गलती का अहसास हुआ, “ठीक है, आज मैं तुम्हारी बात समझ गया और मानता हूँ कि मैं गलत था। आज से मैं कोई रोक टोक नहीं करूँगा।  तुम भी खुश और मैं भी खुश… कोशिश करूँगा कि हमेशा प्यार से पेश आऊं।”

नीलू मिली हुई आजादी से अपनी जिंदगी मे खुश है। उसको यकीन है कि वो अब अपने पत्नी होने का फर्ज़ और बेहतर तरीके से निभाएगी।

ये काल्पनिक कहानी हज़ारों पत्नियों के मन की व्यथा को बयान करती है।

मूल चित्र : Still from Short film Malaal/Banyan Productions, YouTube

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