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एक सलाम : भारतीय सशस्त्र सेना की प्रथम महिलाएं जिन पर नाज़ है हिंद को

इस लेख में हम जानेंगे भारतीय सशस्त्र सेना की प्रथम महिलाएं कौन हैं, जिन्होंने भारतीय सेना में अपना योगदान देकर देश की सेवा की...

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इस लेख में हम जानेंगे भारतीय सशस्त्र सेना की प्रथम महिलाएं कौन हैं, जिन्होंने भारतीय सेना में अपना योगदान देकर देश की सेवा की…

पुरातन काल से यही मान्यता रही है कि जिन कार्यक्षेत्रों में शारीरक श्रम और बल की आवश्यकता होती है वह पुरुषों के लिए ही उचित है। महिलाओं की शारीरिक बनावट उन्हें कोमल बनाती है और इस कारण उन्हें घर गृहस्थी के कामों तक ही सीमित रखा जाए।

पर देखा जाए तो यह विचारधारा समाज में इसलिए व्याप्त हुई कि समाज सदा से पुरुष प्रधान था और पुरुष अपना वर्चस्व कायम रखना चाहता था। तो देश की रक्षा और उसमें लगने वाले कड़े श्रम और व अथाह बल को वह हमेशा से अपना अधिकारक्षेत्र मानता आया है।

इसी कारण बहुत लंबे समय तक महिलाओं को सेना और सशस्त्र बलों में शामिल होने की अनुमति नहीं थी। महिलाओं में सेवा-भाव को प्रधान मानकर उन्हें केवल नर्सिंग और चिकित्सीय पदों पर शामिल किया जाता था। बीतते समय के साथ महिलाओं ने अपनी योग्यता सिद्ध की है। साथ में यह भी सिद्ध किया है कि वे न तो शारीरक बल में पुरुष से कमतर हैं बल्कि मानसिक बल में पुरुष से उच्चतर ही हैं।

शरीर का सुकुमोल होना केवल एक मानसिकता है। यह मानसिकता स्त्री या पुरुष किसी में हो सकती है जो कि प्राकृतिक है। अपनी शारीरक क्षमता और बल को पहचानकर उसे निखारना और उचित उपयोग में लाना हर किसी के लिए संभव है।

तो आज इस लेख में हम जानेंगे भारतीय सेना की प्रथम महिलाएं कौन हैं जिन्होंने भारतीय सेना में अपना योगदान देकर देश की सेवा की।

भारतीय थल सेना

गर्ट्रूद एलिस राम (Gertrude Alice Ram)

27 अगस्त 1976 को गर्ट्रूद एलिस राम भारतीय थल सेना में मेजर जनरल का पद प्राप्त करने वाली पहली महिला धिकारी बनीं। वे सैन्य नर्सिंग सेवा मेट्रन इन चीफ़ के पद पर कार्यरत थी। इसके साथ ही वह भारतीय सशस्त्र बल में 2 स्टार रैंक प्राप्त करने वाली पहली महिला अधिकारी भी बनीं।

प्रिया झिंगन

सन 1993 में प्रिया झिंगन उन 25 महिलाओं में प्रथम महिला अधिकारी के रूप में नियुक्त हुईं जो भारतीय सेना में उस समय कमीशन की गईं। प्रिया एक पुलिस अधिकारी की बेटी हैं और हमेशा से ही भारतीय पुलिस सेवा में शामिल होना चाहती थीं। पर उन्होंने सेना में भर्ती होना चुना और उसके लिए तत्कालीन सेना प्रमुख से लिखकर अनुमति भी माँगी।

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अंजना भदौरिया

अंजाना भारतीय सेना में स्वर्ण पदक जीतने वाली प्रथम महिला अधिकारी बनीं। वह 1992 में ऑफ़िसर्स ट्रेनिंग अकेडमी, चेन्नई के महिला कैडेटों के सबसे पहले बैच से थीं। 

अल्का खुराना

सन 1993 में भारतीय सेना में कमीशन हुईं अल्का खुराना 1994 में गणतन्त्र दिवस परेड और सेवा दिवस परेड में शामिल होने वाली पहली महिला बनीं।

रुचि शर्मा

सन 1996 में रुचि शर्मा भारतीय सेना में शामिल होने वाली पहली ऑप्रेशनल पैराट्रूपर बनीं। सान 1991 तक भारतीय सेना में महिलाओं को गैर चिकित्सा अधिकारियों के रूप में शामिल नहीं किया जाता था। यह बदलाव सान 1992 से आना आरंभ हुआ।

सैपर शांति तिग्गा

सन 2011 में  भारतीय सेना में जवान (निजी रैंक) के पद पर भर्ती होने वाली प्रथम महिला थीं। अपनी शारीरिक क्षमता और ताकत में उन्होंने अपने साथी पुरुष जवानों को भी पीछे छोड़ रखा था। जिसके चलते उन्हें अपने भर्ती कैंप में सर्वश्रेठ ट्रेनी का सम्मान भी प्राप्त हुआ था।

प्रिय सेमवाल

प्रिय सेमवाल के पति सन 2012 में अरुणाचल प्रदेश में एक आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए थे। उनकी शहादत के बाद वह ईमई की भारतीय सेना कोर में अधिकारी के पद पर शामिल हुईं। 

लफ़्ट्टिनेंट कर्नल मिताली मधुमिता

सन 2000 में सेना में कमीशन हुईं मिताली शौर्य पदक पाने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। 26 फरवरी 2010 को इंडियन एम्बेसी काबुल, अफगानिस्तान पर हुए आतंकवादी हमले, जम्मू और कश्मीर व नॉर्थ ईस्ट में हुई अन्य कार्यवाहियों के लिए असीम शौर्य और साहस का परिचय दिखाने के लिए सन 2011 में सेना पदक से सम्मानित किया गया। 

दिव्या अजित कुमार

2010 में कमीशन हुईं दिव्या अजित कुमार स्वोर्ड ऑफ ऑनर प्राप्त करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। उन्होंने 2015 में गणतन्त्र दिवस की परेड में 154 महिला अधिकारियों और कैडेटों की टुकड़ी का नेत्रत्व किया था।

कैप्टन स्वाति सिंह

कैप्टन स्वाति सिंह एक इंजीनियर हैं और भारतीय सेना की 63वीं ब्रिगेड में एकमात्र महिला अधिकारी हैं। इसके साथ ही सिग्नल प्रभारी के रूप में नाथु ला दर्रे पर तैनात होने वाली पहली महिला अधिकारी भी हैं।

भारतीय नौ सेना

डॉ. बारबरा घोष

सन 1961 में डॉ. बारबरा घोष स्थायी नौ सेना आयोग प्राप्त करने वाली पहली महिला चिकित्सा अधिकारी बनीं। साथ ही सन 1968 में उन्होंने पहली महिला नौ सेना अधिकारी के रूप में कमांडर का पद प्राप्त किया।  

डॉ. पुनिता अरोड़ा

1968 में कमीशन हुईं डॉ. पुनिता अरोड़ा, भारतीय सशस्त्र बलों में लेफ़्टिनेंट जनरल और भारतीय नौ सेना में वाइस एडमिरल के रूप में सर्वोच्च रैंक तक पहुँचने वाली वाली पहली महिला हैं। पुनीता अरोड़ा लाहौर में एक पंजाबी परिवार में पैदा हुई थीं और विभाजन के समय उनका परिवार हिंदुस्तान में सहारनपुर, उत्तर प्रदेश आकर बस गया था।

भारतीय वायु सेना

विजयलक्ष्मी रामानन

आर्मी मेडिकल कोर में कमीशन हुईं विजयलक्ष्मी रामानन को वायु सेना में भेजा गया और वह भारतीय वायु सेना की पहली महिला अधिकारी बनीं। सन 1979 में वह वायु सेना से विंग कमांडर के पद से सेवा निवृत्त हुईं।

पद्मा बंधोपाध्याय

पद्मावती बंधोपाध्याय भारतीय वायु सेना में पहली महिला एयर मार्शल हैं और भारतीय सशस्त्र बलों में लेफ़्टिनेंट जनरल पुनिता अरोरा के बाद थ्री स्टार रैंक तक पदोन्नत होने वाली दूसरी महिला। साथ ही वह उत्तरी ध्रुव में अनुसंधान करने वाली पहली महिला भी हैं।

फ्लाइट लेफ़्टिनेंट कांता हांडा

1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान फ्लाइट लेफ़्टिनेंट कांता हांडा अपनी सेवाओं के लिए प्रशंसा पाने वाली पहली वायु सेना अधिकारी बनीं। वे भारतीय वायु सेना में चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत थीं।

गुंजन सक्सेना और श्रीविद्या राजन

सन 1999 में कार्गिल युद्ध के दौरान गुंजन सक्सेना (उड़ान अधिकारी) और श्रीविद्या राजन युद्ध क्षेत्र में उड़ान भरने वाली पहली महिलाएँ हैं। गुंजन बचपन से ही पायलट बनने का सपना रखती थीं और आगे चलकर अपने पिता की प्रेरणा से वह सन 1994 में वायु सेना में शामिल हुईं।

दीपिका मिश्रा और निवेदिता चौधरी

दीपिका मिश्रा, सन 2006 में सारंग डिस्प्ले टीम के लिए प्रशिक्षण लेने वाली पहली बहरतीय वायु सेना अधिकारी थीं। भारतीय वायु सेना से फ्लाइट लेफ़्टिनेंट निवेदिता चौधरी माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली महिला बनीं।

भावना कंठ

सन 2015 से पूर्व भारतीय वायु सेना में महिलाओं को लड़ाकू विमान उड़ाने का अवसर नहीं दिया जाता था। भावना कंठ 22 मई सन 2019 को भारतीय वायु सेना में लड़ाकू मिशन पर जाने के लिए योग्यता प्राप्त करने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बनीं।       

शालिजा धामी और मिंटी अग्रवाल

भारतीय वायु सेना में स्थायी कमीशन पाने वाली पहली महिला विंग कमांडर शालिजा धामी बनीं और स्क्वाड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल युद्ध सेवा पदक प्राप्त करने वाली पहली महिला बनीं।

देश की सेवा के लिए दिल में जज़्बा और जुनून की ज़रूरत होती है। कौन कहता है कि यह जोश और जुनून केवल पुरुषों में ही हो सकता है। बदलते समय के साथ भारतीय सशस्त्र बलों में विभिन्न पदों पर माहिलाओं को शामिल किया जा रहा है।

इसी वर्ष से महिलाओं के लिए भारतीय सेना में मिलिट्री पुलिस की भर्तियाँ भी शुरू की गईं हैं। अब महिलाएँ भारतीय थल सेना में जनरल सोल्जर के पद पर भी आवेदन कर सकती हैं। यह न केवल असल में स्त्री-पुरुष समानता की ओर उठाया हुआ मज़बूत कदम है बल्कि इस तरह महिलाओं के लिए नए अवसर भी सामने आ रहे हैं।

भारतीय सेना की प्रथम महिलाएं अपना नाम कमा चुकीं हैं और इन महिलाओं से आने वाली पीढ़ी की सभी लड़कियों को प्रेरित होना चाहिए और बढ़-चढ़कर भारतीय सेनाओं में शामिल होना चाहिए।


मूल चित्र: Gunjan Saxena, Netflix

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