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शेफ़ाली शाह की “हैप्पी बर्थडे मम्मीजी” हर महिला की कहानी

फिल्म हैप्पी बर्थडे मम्मीजी में “आदर्श नारी” का चोला उतार शेफ़ाली शाह, अपनी पसंद के कपड़े, संगीत, खाना और तो और कंचे खेलती दिखीं...

फिल्म हैप्पी बर्थडे मम्मीजी में “आदर्श नारी” का चोला उतार शेफ़ाली शाह, अपनी पसंद के कपड़े, संगीत, खाना और तो और कंचे खेलती दिखीं…

भारतीय फिल्म और टेलीविज़न की बहुचर्चित अभिनेत्री शेफ़ाली शाह ने शार्ट फिल्म “हैप्पी बर्थडे मम्मीजी“ से निर्देशन की दुनिया में अपना पहला और सफल क़दम रखा है। अपने बेहतरीन अभिनय से सब का दिल जीत चुकीं शेफ़ाली शाह ने निर्देशन में भी अपना हुनर दुनिया को दिखा दिया है।

“हैप्पी बर्थडे मम्मीजी” में उन्होंने न केवल अभिनय और निर्देशन किया है बल्कि फिल्म की कहानी भी लिखी है।

बात कुछ ऐसी हुई कि एक लंबे थकान भरे दिन के बाद मैंने बेमन से टीवी ऑन ये सोचते हुए किया कि कुछ देखते-देखते सो जाऊंगी। तब ध्यान आया कि आज मेरी मेंटोर (गुरु) ने शेफाली शाह द्वारा निर्देशित शार्ट फ़िल्म का ज़िक्र किया था। फिर क्या था बिना समय गँवाए मैंने यूट्यूब पर “happy birthday mummyji” देखने के लिए लगा ली।

शेफ़ाली शाह की “हैप्पी बर्थडे मम्मीजी” (Shefali Shah Happy Birthday Mummyji)

फ़िल्म की शुरूआत टाइटल से मेल खाती होती है यानि की बर्थडे के गुब्बारों से। सुन्दर सा घर जिसकी सफ़ेद दीवारों पर आसमानी रंग के पर्दे टंगे हैं। घर की सजावट मन को मोहने वाली दिखती है और गार्डन में स्विमिंग पूल का नज़ारा क्या कहना। ऐसा लगता है मानो किसी चित्रकार ने बड़ी फुर्सत से अपनी कल्पनाओं को कैनवस पर उतार दिया हो।

और इन सब के बीच हमें नज़र आती हैं फ़िल्म की इकलौती कलाकार शेफ़ाली शाह। उनके नीले रंग के सलवार कमीज़ और मंगलसूत्र में भारतीय बहू की छवि साफ़ नज़र आती है। वो अपनी “मम्मीजी”(सास) के जन्मदिन की तैयारियों में पूरे मन से अकेली सबकुछ संभालते दिखीं। अब तक समझ आ गया था कि ये परिवार का “हॉलिडे होम” है जहाँ वो अकेली सबसे पहले आ कर पार्टी की तैयारियाँ कर रही थीं। ऐसी परिस्थितियों से हम हिंदुस्तानी बहुएँ अक्सर गुज़रा करती हैं। हाँ पर, ये अलग बात है कि हॉलिडे होम हममें से किसी-किसी के पास ही होता है। 

पूरी फ़िल्म यहाँ पर देख सकते हैं ।

अपनी “मम्मीजी” को खुश करने का आईडिया बहूरानी खोज ही लेती है

कहानी में आगे पता चलता है कि पार्टी नहीं हो सकती है क्योंकि शहर में कर्फ्यू लग गया है। तैयारियों में व्यस्त शेफ़ाली शाह सुनते ही दुखी हो जाती हैं। पर, पति का ये कहना की “तुम्हें तो दुनिया की ख़बर ही नहीं रहती है” उन्हें ज़्यादा दुःख पहुँचता है। मायूस हो वो ननद को कॉल करती हैं तो उनसे भी उन्हें निराशा ही मिलती है। इन सब निराशाओं के बीच भी अपनी “मम्मीजी” को खुश करने का आईडिया बहूरानी खोज ही लेती है। जहां मम्मीजी वहां बर्थडे पार्टी। घर से दूर होते हुए भी अकेली पार्टी का सारा इंतज़ाम कर देती हैं। इतना सब करने पर भी पति, सास और ननद मन को चुभने वाली बातें हीं बोलते हैं।

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बिना किसी की परवाह किए “आदर्श नारी” का चोला उतार

तब कहीं जा कर उस आदर्श बहू/पत्नी के अंदर की स्त्री ने आँखें खोली और सब कुछ भूल कर सिर्फ उसने वो किया जो उसे पसंद था। बिना किसी की परवाह किए “आदर्श नारी” का चोला उतार अपने रंगों में रंग गयीं। अपनी पसंद के कपड़े, संगीत, खाना और तो और कंचे खेलती दिखीं हमारी नायिका। अपने लिए समय निकालना कितना आवश्यक और सुखदायी होता है, इसका एहसास होते ही बड़ी समझदारी से “शुचि” ने कुछ दिनों के लिए “सेल्फ लव” को अपनाने का फ़ैसला लिया। 

सेल्फ लव महिलाओं का हक़ 

प्यार और सम्मान रिश्ते की बुनियाद होती है फिर रिश्ता चाहे कोई भी हो। महिलाओं को पूरा हक़ है अपनी जिंदिगी को अपने ढंग से जीने का। “सेल्फ लव” का ख़ूबसूरत एहसास कराती ये फ़िल्म मन को ऐसा कर गुज़रने के लिए उकसाती है। शेफ़ाली शाह ने जिस अंदाज़ में स्त्री के दोनों रूपों को दिखाया है वो सराहनीय है। फ़िल्म को बनाते समय निर्देशक ने सारी अहम बातों का ध्यान रखा है। १४ मिनट की इस शॉर्ट फिल्म ने अपनी बातों को बहुत ही ख़ूबसूरती से दिखाया है।

“हैप्पी बर्थडे मम्मीजी” की पूरी टीम को बधाई! 

मूल चित्र : Still from film, YouTube

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Ashlesha Thakur

Ashlesha Thakur started her foray into the world of media at the age of 7 as a child artist on All India Radio. After finishing read more...

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