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आईरा खान को माँ रीना दत्ता का दिया उपहार, हर बेटी के लिए ज़रूरी

रीना दत्ता की अपनी बेटी आईरा खान के लिए ये पहल सराहनीय है। माता-पिता का यह दायित्व होता है कि वह अपने बच्चों को सही शिक्षा दें।

रीना दत्ता की अपनी बेटी आईरा खान के लिए ये पहल सराहनीय है। माता-पिता का यह दायित्व होता है कि वह अपने बच्चों को सही शिक्षा दें।

फिल्म प्रोड्यूसर रीना दत्ता और अभिनेता आमिर खान की बेटी आईरा खान ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा कर बताया है कि जब वह किशोरवस्था में कदम रख रही थीं तब उनकी माँ ने उन्हें सेक्स एजुकेशन पर एक क़िताब उपहार में दी थी।

अगस्तु फाउंडेशन के लिए की जा रही ‘पिंकी प्रॉमिस टु मी’ सीरीज के एक हिस्से में आईरा अपने शरीर के प्रति जिज्ञासा नाम के टॉपिक पर बात कर रही थीं। 

रीना दत्ता की पहल सराहनीय 

आईरा खान ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे नहीं लगता कि मैंने पहले कभी खुद को पूरी तरह से देखा है। जब मैं बड़ी हो रही थी तो मेरी मम्मी ने मुझे सेक्स एजुकेशन की किताब दी थी और उसमें मुझे खुद को मिरर में देखने के लिए कहा था। लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। मेरा शरीर भी सामान्य रूप से बहुत बदल गया है। अभी एक लंबा रास्ता तय करना है।”

रीना दत्ता की ये पहल सराहनीय है। हर माता-पिता का यह दायित्व होता है कि वह अपने बच्चों को सही शिक्षा दें और साथ ही शिक्षा को किसी दायरे में बांध कर न रखें। 

कई बच्चे पोर्नोग्राफी का सहारा लेते हैं 

जब बच्चें बचपन से वयस्कता की ओर बढ़ते हैं तो उनमें से कईओं को सेक्स के बारे में भ्रमित करने वाली जानकारी होती है। इसका कारण है माता-पिता का अपने बच्चों से सेक्स के विषय में खुल कर बात न करना। ऐसी स्तिथि में नादान बाल मन अपनी जिज्ञासा को समझने के लिए कई बार अपने उम्र के दोस्तों या पोर्नोग्राफी का सहारा लेने लगता है। जिससे उन्हें सिर्फ आधी बात पता चलती है और यह तो हम सभी जानते हैं कि आधा-अधूरा ज्ञान कितना ख़तरनाक होता है।

सेक्स पर बात करना सभ्य समाज की पहचान के विरुद्ध 

हमारे देश में सेक्स पर बात करना सभ्य समाज की पहचान के विरुद्ध है। यह एक ऐसा वर्जित विषय है जिस पर अगर बात की भी जाती है तो वह सिर्फ दबी आवाज़ में। जबकि परिस्थिति इसके विपरीत होनी चाहिए। सेक्स लगभग हर किसी के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। हमें अपने बच्चों को सही समय पर, यानि उनके किशोरावस्था में कदम रखते ही, उससे परिचित करा देना चाहिए। बच्चों को सही जानकारी उप्लब्ध कराने में व्यापक यौन शिक्षा मददगार होती है। 

सेक्स एजुकेशन अनिवार्य होना चाहिए 

हमारे स्कूल्स में भी सेक्स एजुकेशन को बाकी विषयों की तरह पढ़ाया जाना चाहिए।अगर बच्चों को सही यौन शिक्षा नहीं दी जाए तो लिंग आधारित हिंसा, अनपेक्षित गर्भधारण और यौन संचारित संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। यह शिक्षा सही समय पर देना भी अत्यंत आवश्यक है। ताकि उम्र में हो रहे बदलावों को सहजता से स्वीकार करने के लिए बच्चों को तैयार किया जा सके। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता अपनी झिझक को दूर रखकर अपने बच्चों से इस विषय पर बात करें।

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सेक्स एजुकेशन शारीरिक अधिकारों के बारे में भी बताता है

सेक्स एजुकेशन सिर्फ शारीरिक संबंध के बारे में नहीं बताता है बल्कि हमें हमारे शारीरिक अधिकारों के बारे में भी बताता है। खास कर हमारे देश में जहाँ ज़्यादातर लड़कियों को सेक्स में इस्तेमाल करने वाली वस्तु समझा जाता हो।

सेक्स के लिए लड़कियों की सहमति कहाँ मायने रखती है हमारे इस खोखले समाज में? बेटियों को केवल संस्कार देने की बातें क्यों करता है ये समाज? जबकि हमारी बेटियों का उनके शारीरिक अधिकारों के बारे में जानना कहीं ज़्यादा ज़रूरी है। लड़कियों का उनके शरीर पर पूरा अधिकार है और कोई भी उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध नहीं छू सकता है फिर वो चाहे उनका पति ही क्यों न हो, यह बात हमें हमारी बेटियों को सबसे पहले बतानी चाहिए।

हमें अपने बच्चों से खुल कर हर विषय पर बात करनी चाहिए ताकि उन्हें हममें अपना दोस्त नज़र आए। यकीन मानिए जब रिश्ता ऐसा होगा तो हम न केवल अपने बच्चों की चिंताओं से मुक्त हो जायेंगे बल्कि समाज को सही दिशा दे पाएंगे।

मूल चित्र : Ira Khan Instagram

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Ashlesha Thakur

Ashlesha Thakur started her foray into the world of media at the age of 7 as a child artist on All India Radio. After finishing her education she joined a Television News channel as a read more...

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