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काश! हम ना मिलते दोबारा…

पहला प्यार एक खूबसूरत एहसास होता है जिसे वह चाह कर भी भूल नहीं सकता, वह दिल के एक कोने में हमेशा साथ रहता है।

पहला प्यार एक खूबसूरत एहसास होता है जिसे वह चाह कर भी भूल नहीं सकता, वह दिल के एक कोने में हमेशा साथ रहता है।

सुनिधि कल रात में ही अपने मायके आई थी, पहुंचना तो उसे शाम को ही था पर ट्रेन काफी लेट हो गई थी।

खाना खाकर मम्मी के पास लेटी तो मम्मी से, परिवार, रिश्तेदार, आस पड़ोस सब के बारे में पूछ रही थी, तभी मम्मी ने बताया कल शर्मा जी के यहां गई थी।

“कुछ दिनों के लिए सुमित आया हुआ है। वह लोग सुमित के लिए लड़कियां देख रहे हैं, इसी साल सुमित की शादी करना चाह रहे हैं। और हां सुमित तेरे बारे में पूछ रहा था। तो मैंने बताया तू आज शाम को आने वाली है।”

तभी से सुनिधि के मन में अजीब सी उथल-पुथल मची थी। सोने की कोशिश कर रही थी पर नींद नहीं आई।

और अब सुबह से सुनिधि की नजर बार-बार दरवाजे की तरफ जा रही थी। कोई भी आवाज आती तो उसका दिल धक-धक करने लगता। कहीं वही तो नहीं आ गया। मन में अजीब सी कशमकश चल रही थी। पुरानी बातें ही उसे बार-बार याद आ रही थी..

सुमित और वह पड़ोसी थे। दोनों के पापा एक ही ऑफिस में जॉब करते थे। दोनों लोगों में अच्छी दोस्ती थी इसलिए उन्होंने पास-पास घर भी बनवा लिए थे।

सुमित और सुनिधि एक ही क्लास में पढ़ते थे। जहां सुनिधि कम बोलने वाली और अपने काम से काम रखने वाले लड़की थी, वहीं सुमित बहुत चंचल और बातूनी था।

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पर सुमित सुनिधि का बहुत ख्याल रखता। अगर स्कूल में सुनिधि से किसी से कोई बात हो जाती तो सुनिधि से पहले वही लड़ लेता। सुनिधि जब कभी दुखी होती या गुस्सा हो जाती है तो वह उसे मनाता रहता जब तक कि सुनिधि खुश ना हो जाती।

धीरे धीरे दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे। दोनों घरों में बहुत आना जाना था। और सुमित तो अक्सर यही खाना भी खा लेता था। दिन में ज्यादातर सुनिधि और उसके भाई बहनों के साथ ही रहता। दोनों घर के छत मिले हुए थे तो शाम को सारे बच्चे वही पढ़ते और खेलते। मम्मी, पापा लोग भी वहीं बैठ के बातें करते चाय पीते।

जब दोनों बड़े हो रहे थे। तभी सुमित दोस्ती से कहीं ज्यादा बढ़कर सुनिधि के लिए कुछ महसूस करने लगा था। सुनिधि को देखकर उसकी नजरों में एक चमक आ जाती थी। वहीं सुनिधि को भी सुमित का उसका ख्याल रखना, मनाना, हंसाना अच्छा लगता था।

सुनिधि भी सुमित की भावनाओं को कुछ कुछ समझने लगी थी। एक दिन सुनिधि किसी बात पर दुखी थी और गुस्से में छत पर चली गई थी। सुमित आया तो उसे पता चला, कि सुनिधि छत पर है तो वह भी सुनिधि के भाई और बहन के साथ छत पर चला आया।

काफी देर तक वह सुनिधि को मनाने और हंसाने की कोशिश करता रहा। और जब सुनिधि हंस दी तो बोला, “देखो तुम्हें मैं ही मना और हंसा सकता हूं। मेरे अलावा तुम्हारा गुस्सा कोई नहीं शांत कर सकता, तुम ना मुझसे ही शादी करना, अगर किसी और से की तो गुस्सा हुई बैठी रहना वह तुम्हें इतना नहीं मनाने वाला।”

सुनिधि गुस्से में बोली, “तुम कम बोला करो” और वहां से चली जाती है।

उस दिन के बाद से सुमित अक्सर सुनिधि को यह बात बोल देता। और सुनिधि खामोश रहती जैसे उसने कुछ सुना ही ना हो। पर सुमित को, सुनिधि की इस खामोशी का मतलब समझ में आ गया था।

उन्हीं दिनों बारहवीं का रिजल्ट आ गया था। सुमित इंजीनियरिंग की कोचिंग करने दूसरे शहर जा रहा था और सुनिधि यहीं रहकर बीएससी करने वाली थी।

सुमित के जाने के एक दिन पहले शाम को दोनों छत पर बैठे थे। दोनों बहुत उदास थे। पर सुमित जाने से पहले सुनिधि से अपने दिल की बात कहना चाह रहा था।

आखिर उसने हिम्मत करके सुनिधि से कहा “सुनिधि तुम्हें पता है न, कि मैं तुमको पसंद करता हूं तुमसे ही शादी करूंगा।” पर सुनिधि नजरे नीचे किये बैठी रहती है कुछ बोलती नहीं।

सुमित ने फिर उससे कहा, “सुनिधि तुम मेरा इंतजार करोगी ना।”

सुनिधि बोली, “सुमित बुरा नहीं मानना पर मुझे तुमसे शादी नहीं करनी। तुम्हारे परिवार की दकियानूसी सोच और पुराने विचार मुझे नहीं पसंद।”

सुमित ने कहा, “मुझे यह पता है। मुझसे ज्यादा तुम्हें कौन जानता है।और कौन सा मैं तुम्हें अभी शादी करने के लिए कह रहा हूं। जब मै पढ़ाई पूरी करके नौकरी करने लगूंगा तब हम शादी करेंगे और फिर शादी के बाद मैं तुम्हें अपने साथ लेकर चला जाऊंगा। तुम्हें मेरे परिवार के साथ ज्यादा नहीं रहना पड़ेगा। तुम मेरी बात सुन तो रही हो ना, इधर देखो।”

और जब सुनिधि नजर उठा कर उसे देखती है। तो कुछ पल के लिए दोनों खामोशी से एक दूसरे को देखते रह जाते हैं। बचपन के मासूम एहसास को आज प्यार का नाम मिल गया था।

उस खूबसूरत एहसास को दोनों ने अभी जीना सीखा ही था कि सुमित को कोचिंग करने के लिए जाना पड़ा। और सुनिधि की भी बीएससी की क्लास शुरु हो जाती है। पर सुमित कभी-कभी पीसीओ से उसके लैंडलाइन नंबर पर फोन करता था। पर सुनिधि से बात कम ही हो पाती थी क्योंकि जो फोन के पास होता अक्सर वही बात करके रख देता था।

पर सुमित छुट्टियों में जब भी आता दोनों ढेर सारी बातें करते। और जब सुनिधि की बीएससी की परीक्षाएं और सुमित के इंजीनियरिंग के एंट्रेंस एग्जाम शुरू होने वाले थे। दोनों पढ़ाई में व्यस्त हो गये। इसी बीच सुमित के पापा का ट्रांसफर हो गया। और वह घर किराए पर देकर कुछ दिनों में ही चले गये।

सुनिधि उस समय बहुत परेशान हो गई थी कि अब वह सुमित से नहीं मिल पायेगी। पर कुछ दिन बाद सुमित ने फोन किया था और उस दिन सुनिधि ने भी उससे बात की थी। फिर उसके बाद काफी टाइम हो गया उसका फोन नहीं आया। इधर पापा ने मोबाइल ले लिया तो लैंडलाइन नंबर हटवा दिये। उसी दिन से सुनिधि की उम्मीद है टूटने लगी थी।

और अब सुनिधि की शादी को 4 साल हो गए हैं। वह अपनी शादीशुदा जिंदगी में बहुत खुश भी हैं। पर कुछ महीने पहले मम्मी ने फोन पर बताया कि शर्मा अंकल रिटायरमेंट के बाद पूरी फैमिली के साथ यही शिफ्ट हो गये हैं। उसी दिन उसके मन में यह बात आई थी कि सुमित से अब किसी न किसी बार मुलाकात होगी।

और जब वह कल रात आई तो उसे पता चला कि सुमित आया हुआ है।तभी से उसे पूरी रात नींद नहीं आई और सुबह से वह अजीब कशमकश में फंसी हैं। उसे उससे कुछ पूछना भी नहीं है क्योंकि वह अपने जिंदगी में आगे बढ़ गई है। और खुश भी हैं।

फिर उसे अपनी मर्यादा का भी ख्याल है। फिर भी पता नहीं क्यों नजरें उसे एक बार देखने के लिए बेचैन थी। कहते हैं ना कि- इंसान अपनी जिंदगी में कितना ही खुश क्यों ना हो पर पहला प्यार एक खूबसूरत एहसास होता है जिसे वह चाह कर भी भूल नहीं सकता, वह दिल के एक कोने में हमेशा साथ रहता है।

और जब शाम को सुनिधि और मम्मी छत पर बैठकर चाय पी रहे थे तभी वह अपने छत पर आया। मम्मी और सुनिधि को देखा तो आ गया। मम्मी से नमस्ते करके सुनिधि से बोला कैसी हो। सुनिधि बोली, “मैं अच्छी हूँ। तुम बताओ कैसे हो।”

सुमित बोला, “मैं भी ठीक हूँ। पर यार आज हम लोग बहुत सालों बाद मिल रहे हैं। तुम तो पहले से बहुत बदल गई हो। लगता है पतिदेव बड़ा ख्याल रखते हैं।”

सुनिधि मुस्कुरा दी पर मम्मी हंसने लगी। तभी मम्मी बोली, “तुम लोग बहुत दिनों बाद मिले हो बैठकर बातें करो मैं सुमित के लिए चाय लेकर आती हूँ।”

मम्मी के जाने के बाद सुनिधि ने पूछा और कहां हो आजकल। तो वह बोला मुंबई में हूं। फिर सुनिधि बोली, “मम्मी बता रही थी आजकल लड़कियाँ देख रहे हो।”

तभी सुमित सुनिधि के आंखों में देखते हुए बोला “हाँ, तुमने तो मेरा इंतजार किया नहीं। बड़ी जल्दी थी तुम्हें शादी करने की” और हंसने लगा।

सुनिधि ने नजरें नीचे कर ली। उसके दिल की धड़कने कुछ देर के लिए थम गई थी। पर फिर उसे हंसता देखकर उसे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। उसे लगा जैसे वह उसका मजाक उड़ा रहा है।

तभी मम्मी चाय लेकर आ गई और बोली, “सुमित कल तुम लोग लड़की देखने गए थे क्या हुआ?”

वह बोला, “आंटी कल दोपहर में हम लोग गए थे। लड़की हम लोगों को पसंद आ गयी तो हम लोगों ने हाँ भी कर दिया है। मैंने तो इसलिए हाँ कर दिया कि बैंक में है और आराम से ट्रांसफर भी हो जाएगा मेरे पास उसका। आपको तो पता है आंटी मुझे नौकरी वाली लड़की चाहिए थी। घर में बैठी लड़कियां मुझे बिल्कुल नहीं पसंद है। मम्मी पापा भी बहुत खुश हैं। हमारी पसंद की गाड़ी भी दे रहे हैं वह लोग। मैंने सोचा है आंटी, कि जो कैश मिलेगा उससे मैं मुंबई में घर बुक कर लूँगा। पापा ने तो फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक सामान की जगह भी कैश देने को बोल दिया है।”

सुनिधि मन में सोची आज भी इसे बोलने का मौका मिल जाए बस। पर सुनिधि उसकी बातें सुनकर बहुत दुखी भी हो रही थी। सोच रही थी कि जिन विचारों और सोच वाले लोगों से यह मुझे बहुत दूर ले जाने वाला था कभी आज इसकी सोच उन लोगों से दो कदम आगे की हैं। उसे लग रहा था जैसे वह उसकी भावनाओं का मजाक उड़ा रहा है। बस वह चुपचाप बैठी रही। उसकी बातें भी नहीं सुन रही थी।

क्योंकि उसके दिल में अजीब सी टूट फूट मची थी। सोच रही थी इतने सालों बाद हम दोनों मिले हैं पर इसके चेहरे पर तो कोई एहसास ही नहीं, बल्कि वह अपनी बड़ी-बड़ी बातें बताने में ही लगा है।

सुनिधि को एक-एक पल भारी लग रहा था। उसे यह सब बर्दाश्त नहीं हो रहा था।कि तभी वह जाने के लिए उठा और सुनिधि से बोला, “अपना नंबर तो दे दे यार और हाँ कांटैक्ट में रहना।”

फिर अपने पैंट की जेब में हाथ डाला और बोला, “यार मोबाइल तो घर पर ही रह गया। ऐसा करो अपने मोबाइल में मेरा नंबर सेव कर लो।”

सुनिधि कुछ बोली नहीं बस पास रखें मोबाइल को उठाया और उसका नंबर टाइप कर लिया। और वह बाय कह कर चला गया। तभी घर की डोर बेल बजी शायद पापा आ गए थे। मम्मी बोली, “मैं नीचे जाकर दरवाजा खोलती हूँ, तू सारा सामान लेकर आ जा।”

पर सुनिधि चुपचाप बैठी मोबाइल के स्क्रीन पर उसका नंबर देख रही थी। कुछ देर बाद उसने सेव की जगह कैंसल पर अंगूठा रख दिया। और इतनी देर से उसकी पलकों में जो समंदर रुका था आंसू बनकर बहने लगा। 

बड़ी मुश्किल से वह अपने आप को संभाले बैठी थी। क्योंकि सुमित के सामने वह अपने आंखों में आंसू ला कर अपने को कमजोर नहीं दिखा सकती थी। आज सुमित उसकी भावनाओं को आहत कर गया था उसी छत पर। जिस छत से इन दोनों की बहुत सी यादें जुड़ी थी।

सुनिधि ने तो पहले प्यार की उन खूबसूरत यादों को अपने दिल में बड़े प्यार से संभाल के रखा था। पर सुमित आज उनके टुकड़े कर गया था। सुनिधि ने सोचा अच्छा किया जो मैंने तुम्हारा इंतजार नहीं किया। और उसने उन खूबसूरत पलों, यादों को हमेशा-हमेशा के लिए अपने दिल के एक अंधेरे कमरे में बंद कर दिया। और बहुत दर्द के साथ बोली, “काश, हम न मिलते तो यह मुलाकात ना बदलती। तो ये प्यार नफरत में न बदलता। काश! हम ना मिलते दोबारा।”

कहानी थोड़ी लंबी जरूर है पर कहते हैं ना कि, “वक्त भी हार जाता है कई बार जज्बातों से, कितना भी लिखो कुछ ना कुछ बाकी रह जाता है।”

 

मूल चित्र: Still from Hindustan Live ad via Youtube

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