कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

पापा, जब आप माँ का सम्मान करते हैं…

एक लड़की जब अपने पिता को अपनी माँ का सम्मान करते हुए देखती है तभी वह लड़की अपने स्वयं के सम्मान को समझ और महत्व दे सकती है।

एक लड़की जब अपने पिता को अपनी माँ का सम्मान करते हुए देखती है तभी वह लड़की अपने स्वयं के सम्मान को समझ और महत्व दे सकती है।

उन लड़कियों के पीछे हमेशा एक मजबूत, खुले विचारों वाला, निष्पक्ष, साहसी, उदार, बड़ा दिल रखने वाला पिता होता है, जो अपवादों के खिलाफ खड़े होने और अन्याय, अपराधी के खिलाफ़ पहल करने की हिम्मत रखती हैं।

वास्तव में पिता एक बेटे और बेटी के लिए आदर्श है, क्योंकि वह अपनी पत्नी या परिवार के अन्य सदस्यों के साथ कैसा व्यवहार करता है, यह बच्चों के लिए मिसाल बन जाता है।

एक लड़की जब अपने पिता को अपनी माँ का सम्मान करते हुए देखती है तभी वह लड़की अपने स्वयं के सम्मान को समझ और महत्व दे सकती है।

पिता का धन्यवाद हमेशा बरबस ही मुंह से निकलता है

हम ऐसे परिवार में पले-बढ़े हैं जहां मेरे पिता के मूल्य, विश्वास और महिलाओं के लिए अवधारणाएं समय से बहुत आगे थीं। हमें इस तरह की निष्पक्ष शिक्षा और दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए हमारे पिता का धन्यवाद हमेशा बरबस ही मुंह से निकलता है। जब तक किसी भी लड़की का परिवार उसके साथ अन्याय के खिलाफ खड़े होने की पहल नहीं करता है, तब तक कोई अन्य भी उनकी मदद नहीं कर सकता है।

एक बेटी को महत्व देने का मतलब यह नहीं है

एक बेटी को महत्व देने का मतलब यह नहीं है कि आप आपके बेटे को उसके उचित सम्मान और अधिकार से वंचित करें, अगर ऐसा होता है तो आप इन लड़कों को उन बेटे भविष्य में कभी भी किसी के खिलाफ असमानता, अपराध या अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस नही दिखा पाएंगे।

न्याय प्रिय पिता की भूमिका बहुत अहम

संतुलन प्रकृति का नियम है। किसी परिवार के प्रत्येक सदस्य को सम्मान की आवश्यकता होती है। भारतीय परिवारों में लड़कियों के साथ बराबरी का व्यवहार अब कुछ हद तक समझ आने लगा है। आज भी कई जगह उन्हें पुरानी रूढ़िवादी, अप्रासंगिक परंपराओं का पालन करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसका अर्थ केवल और केवल लड़कियों के प्रति असमानता और अन्याय ही हो सकता है ऐसे में एक सशक्त, न्याय प्रिय पिता की भूमिका बहुत अहम हो जाती है।

सिर्फ महिलाओं को परोपकारी, दिव्य, दयालु, अपने बच्चों के लिए बलिदान करने के लिए, प्रकृति प्रदत्त वरदान है, जो एक स्त्री का सार भी है, इस बात को कई पिता गलत साबित कर रहे हैं।

Never miss real stories from India's women.

Register Now

माता पिता दोनों ऐसी बेटी और बेटों को पालते हैं जो कि भविष्य में रूढ़िवादी, असंगत , सामाजिक और सांस्कृतिक असमानता की सोच को खत्म करने के लिए आगे आ सकते हैं।

हमें “बेटी बचाओ” तो सार्थक करना है लेकिन उन्हें रूढ़िवादी सोच, उनके प्रति पूर्वाग्रहित दृष्टिकोण से भी बचाना है। ऐसा सिर्फ माता-पिता के संबल, संस्कार और प्यार से संभव हो पाता है।

माना मां का स्थान कोई नहीं ले सकता परन्तु पिता भी वह सशक्त आधार स्तम्भ है जिनके बिना कोई भी उपलब्धि, खुशी और गर्व का संबल अधूरा रहता है। मेरा मानना है कि हर बच्चे के लिए पर्वत सा अटल, अचल, सशक्त संबल है एक पिता।

मूल चित्र : Still from Father Daughter Ad/Amazon.in, YouTube

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

टिप्पणी

About the Author

Dr .Pragya kaushik

Pen woman who weaves words into expressions. Doctorate in Mass Communication. Media Educator Blogger and Communication Skills Expert. read more...

16 Posts | 41,348 Views
All Categories