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और मेरी माँ के कहे वो शब्द मेरी हिम्मत बन गए…

Posted: मई 7, 2021

छोटी सी जान को उसकी मां की गोद में देते हुए डॉक्टर ने कहा, “घबराइए नहीं, बच्ची का रंग थोड़ा दबा हुआ है पर नैन नक्श बहुत अच्छे हैं।”

नोट :मदर्स डे पर #breakthechain की बेस्ट एंट्री, जिसने सारी गाइडलाइन्स का पालन किया, है कशिश भरद्वाज  की ! हार्दिक बधाइयाँ !

उस घर में सभी का रंग में काफी गोरा यानी उजला था और तभी घर में किलकारी गूंजी। बेटी पैदा हुई थी।

छोटी सी जान को उसकी मां की गोद में देते हुए डॉक्टर ने कहा, “घबराइए नहीं, बच्ची का रंग थोड़ा दबा हुआ है पर नैन नक्श बहुत अच्छे हैं।”

उस मां ने अपनी बच्ची को कलेजे से लगा लिया। पहली संतान थी रंग-रूप पर शायद उसका ध्यान था ही नहीं।

घर परिवार में सब बेहद खुश हैं लेकिन कुछ रिश्तेदारों को लड़की के गहरे रंग होने की वजह से परेशानी थी और मां उन सब बातों से अनजान अपनी बेटी के लालन-पालन में लग गई।

दिन बीते महीने बीते लड़की बड़ी होने लगी और वक्त के साथ साथ, वो एक बड़ी बहन भी बन गई।  छोटी बहन दूध जैसी परिवार खुश था और सब कुछ अच्छा आम जिंदगी की तरह चलने लगा।

दोनों बच्चियों ने अब स्कूल जाना शुरू किया और पहली बार मां के आंचल से निकल लोग, समाज और जिंदगी के थपेड़े जोर-जोर से उन नर्म गालों पर लगने शुरू हो गए।

स्कूल के फंक्शन से लेकर मोहल्ले, रिश्तेदार, शादी बर्थडे पार्टी कोई भी ऐसी जगह नहीं थी जहां उन दो बहनों के रंग का कंपैरिजन नहीं किया जाता।

बड़ी बेटी स्वभाव अनुसार हर चीज को हंसी मजाक में ले लेती थी पर धीरे-धीरे उसका कोमल मन आहत होने लगा। अब दोनों बहनों के बीच लड़ाई-झगड़े बढ़ने लगे।

बड़ी बहन को सब कुछ वैसा ही चाहिए था जो छोटी बहन के पास था क्योंकि वो भी सुंदर लगना चाहती थी!

मां को ये बात खटकती थी। अचानक आये बदलाव से वो चिंतित रहने लगी, धीरे-धीरे मां ने जाना कि किस तरीके से लोग बड़ी बेटी को रंग के ताने दे रहे थे।

फिर सिलसिला शुरू हुआ हल्दी, बेसन, दूध, नारियल का दूध और हर घरेलू तरीके से सांवले रंग की बच्ची को गोरे रंग में रंगने का!

अब उस बच्ची के पास एक ही रंग के कपड़े थे जो उसकी मां को लगता था कि उस पर बहुत फबेंगे “गुलाबी”… क्योंकि गुलाबी रंग सांवले रंग के लोगों के नैन-नक्श को निखारता है और बच्चे खूबसूरत लगते हैं। ऐसा उस मां ने कहीं पढ़ा या सुना था।

फिर आई एक करीबी रिश्तेदार की शादी जहां पर वो १२-१३ वर्षीय बच्ची गुलाबी रंग के लाचे में तैयार होकर आई, और एक रिश्तेदार ने टिप्पणी की, “चलो कुछ भी बोलो पहन ओढ़ के तो ठीक ही लगती है, छोटी के लिए बहुत रिश्ते आएंगे ,बड़ी मां-बाप को बहुत दौड़ आएगी।”

न जाने उन शब्दों में क्या था कि पहली बार उस मां ने कड़े शब्दों में विरोध भी किया और जवाब भी दिया।

“रंग-रूप तो भगवान ने बनाए हैं भाभी। कृष्ण सांवले हैं पर फिर भी दिन रात हम उनकी पूजा किया करते हैं और गोरे रंग की राधा भी उन्हीं की दीवानी थी। तो मेरी बेटी हरे, पीले, नीले, जामुनी रंग की नहीं है ना?

कृष्ण से सांवला रंग पाया है उसने। हर बच्चे में कुछ ना कुछ प्रतिभा होती है इसमें भी कुछ होगी और रही बात शादी की जो साथ लिखा होगा वो भी उसे एक दिन मिल ही जाएगा आप चिंता ना करें।”

हल्दी, चंदन, तेल, जो काम नहीं कर पाए, इन शब्दों ने उस बच्ची के मन पर वो काम किया।

उस दिन से बच्ची की प्रतिभा निखारने के लिए उसकी मां ने उसे कभी नहीं रोका। उसने जो करना चाहा उसे करने दिया। जिंदगी में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन दिया। रंग की हीन भावना से बाहर निकलकर, भी उसके पंखों को नीले आकाश में उड़ने की मजबूती और आजादी देकर!

एक मां जब बच्चे की ढाल बन जाती है, उसे स्वाबलंबी बनाती है। सही रास्ता खुद भी देखती है और दिखाती है।

धन्यवाद मेरी मां का जिसने सांवले रंग की इस लड़की को अपनी बात प्रखर रूप से कहने के लिए शक्ति दी, समझ दी और एक नाम दिया “कशिश”…

“कशिश”…  रंग रूप की परिधि से परे दिल की गहराइयों से आत्मा को छूती हुई…

मातृ दिवस की हार्दिक बधाई क्योंकि मां और बच्चे का एक अनूठा संबंध है बच्चे को जब ठेस लगती है तो मां का दिल छलनी हो जाता है। समाज में, समाज के द्वारा बनाए गए नियमों में मानसिक, शारीरिक,आत्मिक रूप से उलझते हुए भी पूरी ताकत के साथ खुद भी बाहर निकलती है और साथ-साथ अपने बच्चे को भी बाहर निकालती है। 

ऐसी सभी मातृशक्ति को मेरा सादर प्रणाम…

मूल चित्र : Still From Short Film Dark Skin, YouTube

घर के बाहर काम करने से क्या मैं बुरी माँ बन जाऊँगी?

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